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ग्रहों का शरीर के अंगों और अंग प्रणालियों से सम्बन्ध, जन्म कुण्डली में रोग सूचक, और स्वास्थ्य भविष्यवाणी के लिए 6वें और 8वें भाव का विश्लेषण
चिकित्सा ज्योतिष (Medical Astrology) वैदिक ज्योतिष की वह शाखा है जो जन्म कुण्डली से स्वास्थ्य प्रवृत्तियों, रोग सम्भावनाओं और उपचार समय का विश्लेषण करती है। आयुर्वेद और ज्योतिष में मौलिक सम्बन्ध है – दोनों पंचभूत (पाँच तत्व) और त्रिदोष (वात, पित्त, कफ) सिद्धान्त पर आधारित हैं। प्रत्येक ग्रह विशिष्ट शारीरिक अंगों, अंग प्रणालियों और रोग प्रकारों से सम्बन्धित है।
सूर्य: हृदय, रीढ़, दाहिनी आँख, जीवन शक्ति, अस्थि
चन्द्र: मन, रक्त, बाईं आँख, स्तन, शारीरिक तरल
मंगल: माँसपेशियाँ, रक्त (लाल कोशिकाएँ), मज्जा, पित्त
बुध: तन्त्रिका तन्त्र, त्वचा, फेफड़े, वाणी
गुरु: यकृत, वसा, कान, जंघा, अग्न्याशय
शुक्र: प्रजनन तन्त्र, गुर्दे, मुख, कण्ठ
शनि: हड्डियाँ, जोड़, दाँत, दीर्घकालिक रोग, वृद्धावस्था
राहु: विष, एलर्जी, महामारी, रहस्यमय रोग
केतु: घाव, वायरल संक्रमण, मनोदैहिक रोग