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मन्त्रेश्वर की 13वीं शताब्दी की उत्कृष्ट कृति – ग्रह-भाव फल, योग वर्णन, और यह ग्रन्थ कुण्डली व्याख्या के लिए सबसे व्यावहारिक सन्दर्भ क्यों बना हुआ है
फलदीपिका (Phaladeepika) 13वीं शताब्दी में मन्त्रेश्वर द्वारा रचित एक उत्कृष्ट होरा ग्रन्थ है। "फल" = परिणाम/फल, "दीपिका" = दीप – अर्थात "फलों को प्रकाशित करने वाला दीप।" यह 28 अध्यायों में कुण्डली विश्लेषण की कला को सुलभ और व्यावहारिक रूप में प्रस्तुत करता है। जहाँ BPHS विश्वकोश है, फलदीपिका एक केन्द्रित, कार्यमूलक मार्गदर्शिका है – "इस ग्रह की इस भाव में स्थिति का क्या फल है?" इसका सीधा उत्तर देती है।
Ch. 1: ग्रह और राशि स्वभाव
Ch. 2: राशियाँ – गुण और फल
Ch. 3-4: बारह भावों में ग्रह
Ch. 5: ग्रहीय संयोजन (योग)
Ch. 6: राजयोग
Ch. 7: अरिष्ट (अशुभ योग)
Ch. 15: दशा व्याख्या
Ch. 25: स्त्री ज्योतिष (स्त्री जातक)
Ch. 28: अन्तिम अध्याय – संश्लेषण