मैसूर · Karnataka
गणेश चतुर्थी 2029मैसूर मे
Exact puja times & muhurta computed for Mysore coordinates (12.30°N, 76.64°E)
मुख्य समय
पर्वक तिथि
Tuesday, September 11, 2029
Ganesh Puja (Madhyahna)
11:06 – 13:33
सूर्योदय
06:12
सूर्यास्त
18:27
ई तिथि किएक?
मध्याह्न (दोपहर) नियम: ओहि दिन मनाओल जाइत अछि जखन मध्याह्न (दिनक मध्य १/५ भाग) मे चतुर्थी तिथि रहैत अछि। भगवान गणेशक जन्म दोपहर मे भेल छल। एहि काल मे स्थापना (प्रतिष्ठा) आ मुख्य पूजा कएल जाइत अछि।
तिथि निर्धारणक नियम
The tithi must prevail at Madhyahna (midday). Used for festivals like Rama Navami and Ganesh Chaturthi.
Source: Dharmasindhu & Nirnayasindhu – classical Kala-Vyapti system
पूजा विधि
आवश्यक सामग्री
- माटि/पर्यावरण-अनुकूल गणेश प्रतिमा
- मोदक (मीठ पकवान)(21)
- दूर्वा घास
- लाल फूल (अड़हुल)
- नारिकेर(1)
पूजाक चरण
- 1
आचमन
दाहिना हाथक हथेलीमे तीन बेर जल लिय, प्रत्येक बेर विष्णु (केशव, नारायण, माधव) क नामक उच्चारण करैत आत्म-शुद्धिक लेल पान कर...
- 2
सङ्कल्प
दाहिना हाथमे जल आ अक्षत लिय, पूजाक तिथि, स्थान आ उद्देश्यक घोषणा करू, फेर जल छोड़ि दिय।
- 3
ध्यान
भगवान गणेशक ध्यान करू – गज-मुख, चारि हाथवला, पाश, अंकुश, मोदक आ आशीर्वाद मुद्रा धारण कएने, कमल पर विराजमान, मूषक जिनकर व...
फल (लाभ)
सभ बाधासभक निवारण (विघ्न नाशन), बुद्धि आ विवेकक प्रदान (बुद्धि प्रदायक), नव कार्यसभमें सफलता, आ सभ धर्मसङ्गत इच्छासभक पूर्ति।
गणनाक प्रमाण – पारदर्शी लेखा परीक्षण
देवता
भगवान गणेश
कथा आ इतिहास
गणेश चतुर्थी भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी कें शिव-पार्वती कें ज्येष्ठ पुत्र गणपति कें जन्म कें पर्व अछि। पूरा कथा पढू →कम देखाबू ↑
गणेश चतुर्थी भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी कें शिव-पार्वती कें ज्येष्ठ पुत्र गणपति कें जन्म कें पर्व अछि।
पार्वती कैलास पर एकाकिनी छलथि — शिव दीर्घ तपस्या मे छलाह। हुनका अइसन रक्षक चाहल जे पूर्णतः हुनकहि होय। हुनकर अपन शरीर पर लागल हरिद्रा-चन्दन सँ एक सुन्दर बालक कें मूर्ति गढ़ि कय अपन श्वास सँ ओहि मे प्राण फुकलनि। बालक हुनकहि छल। हुनका स्नान-कक्ष कें द्वार पर बैसा कय कहलखिन्ह — किनको प्रवेश नहि देबय।
शिव लौटि कय अज्ञात बालक कें द्वार पर देखलनि। हटय कें कहलखिन्ह; बालक मनाही कयलक। गण हारि गेलाह, ब्रह्मा-विष्णु-इन्द्र सेहो। अन्त मे शिव स्वयं त्रिशूल सँ सन्ध्या समय बालक कें शिर काटि देलखिन्ह।
पार्वती बाहर एलि, पुत्र कें मरल देखि कय सृष्टि सँ कृपा खींचि लेलनि। देवता प्रार्थना कयलनि। शिव कें आदेश सँ उत्तरमुख गज कें शिर अनलक, बालक कें धड़ पर स्थापित कयल गेल, बालक उठल, शिव हुनका गणपति आ विघ्नहर्ता घोषित कयलनि।
दस-दिवसीय उत्सव कें लोकमान्य तिलक 1893 मे सार्वजनिक रूप देलखिन्ह। माटि कें मूर्ति, मोदक, दूर्वा, आ अन्त मे जल मे विसर्जन — सब कथा कें अनुसरण।
कनाय पालन करब
घर में गणेश प्रतिमा (मिट्टी) स्थापित करें। 1.5 / 3 / 5 / 7 / 10 दिन पूजा करें। मोदक, दूर्वा और लाल फूल चढ़ाएँ। जुलूस के साथ विसर्जन करें।
महत्व
नई शुरुआत के देवता, विघ्नहर्ता। सभी कार्यों से पहले पूजित। ज्ञान, समृद्धि और भक्ति की शक्ति का उत्सव।