अष्टविनायक · Maharashtra
हनुमान जयन्ती 2029अष्टविनायक मे
Exact puja times & muhurta computed for Ashtavinayak coordinates (18.52°N, 73.86°E)
मुख्य समय
पर्वक तिथि
Saturday, April 28, 2029
सूर्योदय
06:09
सूर्यास्त
18:55
ई तिथि किएक?
Hanuman Jayanti follows the Udaya Tithi rule – the festival is observed on the day when the required tithi prevails at sunrise. This is the default Dharmasindhu convention for festivals without a special time-window requirement.
पूजा विधि
पूजाक चरण
- 1
तैयारी
सूर्योदयसँ पहिने उठू। स्नान करू आ स्वच्छ वस्त्र (लाल/नारङ्गी रङ्गक वस्त्र पसन्द कएल जाइत अछि) धारण करू। पूजा स्थलकेँ साफ...
- 2
आचमन एवं सङ्कल्प
शुद्धिकरणक लेल तीन बेर जल ग्रहण करू। दाहिना हाथमे जल आ अक्षत लिय, पूजाक उद्देश्य कहू आ जलकेँ छोड़ि दिय।
- 3
गणेश वन्दना
निर्विघ्न पूजाक लेल भगवान गणेशक संक्षिप्त प्रार्थनासँ आरम्भ करू। अक्षत आ फूल अर्पित करू।
फल (लाभ)
अपार शारीरिक आ मानसिक शक्ति, बाधासभकेँ पार करबाक साहस, दुष्ट शक्तिसभसँ रक्षा, सभ कार्यमे सफलता, आ भगवान रामक प्रति भक्तिमे गहनता प्रदान करैत अछि
गणनाक प्रमाण – पारदर्शी लेखा परीक्षण
देवता
हनुमान जी
कथा आ इतिहास
हनुमान जयन्ती — चिरञ्जीवी हनुमान कें जन्म पर्व, अञ्जना आ केसरी कें पुत्र, वायु कें कृपा सँ गर्भाधान — भारत मे भिन्न सम्प्रदाय द्वारा भिन्न दिन मनायल जाइत अछि। पूरा कथा पढू →कम देखाबू ↑
हनुमान जयन्ती — चिरञ्जीवी हनुमान कें जन्म पर्व, अञ्जना आ केसरी कें पुत्र, वायु कें कृपा सँ गर्भाधान — भारत मे भिन्न सम्प्रदाय द्वारा भिन्न दिन मनायल जाइत अछि।
अञ्जना पूर्वजन्म मे इन्द्र सभा कें अप्सरा पुञ्जिकस्थला छलथि, अगस्त्य ऋषि कें शाप सँ वानरी रूप मे पृथ्वी पर जन्म लेलनि। केसरी सँ विवाह भेल मुदा सन्तान नहि। अञ्जनाद्रि पर दीर्घ तपस्या कयलनि।
ओही समय दशरथ अयोध्या मे पुत्रकामेष्ठि यज्ञ कय रहल छलाह। यज्ञ कें पायस कें अंश पक्षी उठा कय लय गेल; वायु ओकरा अञ्जना कें खुलल हाथ मे गिरेलनि। अञ्जना पी लेलथि — हनुमान कें गर्भाधान।
बालक हनुमान उदित सूर्य कें पक्व आम बुझि कय छलाङ्ग लगओलनि। इन्द्र ऐरावत पर आबि कय वज्र सँ प्रहार कयलनि; हनुमान कें निच्चा कें होंठ टूटि गेल। वायु कें श्वास रुकि गेल; सब लोक मे श्वास बन्द। देवता हर वर देलखिन्ह — ब्रह्मा अबध्यता, इन्द्र वज्र-अबध्यता, यम अमरत्व, सूर्य प्रभांश, वरुण-अग्नि अबध्यता, वायु गति-बल। हनुमान चिरञ्जीवी भेलाह।
दोसर शाप — ऋषि कें शाप सँ अपन शक्ति बिसरि गेलाह; अन्य कें स्मरण कराओल पर मात्र स्मरण होइत अछि। सुन्दर काण्ड मे जाम्बवान् कें स्मरण कराओनाइ कें कारण।
हनुमान चालीसा कें पाठ, सिन्दूर-तेल अर्पण, मन्दिर शोभायात्रा। सबसँ अधिक आचरित अनुष्ठान — भय कें क्षण मे हुनकर नाम कें मौन उच्चारण।
कनाय पालन करब
हनुमान मन्दिर जाएँ, हनुमान चालीसा और सुन्दरकाण्ड का पाठ करें। सिन्दूर, तेल और फूल अर्पित करें।
महत्व
भक्ति, शक्ति और निःस्वार्थ सेवा के मूर्तिमान रूप का उत्सव। हनुमान आदर्श भक्त हैं – शक्तिशाली किन्तु विनम्र।