परभणी · Maharashtra
गोवर्धन पूजा 2030परभणी मध्ये
Exact puja times & muhurta computed for Parbhani coordinates (19.26°N, 76.77°E)
महत्त्वाच्या वेळा
उत्सवाची तारीख
Sunday, October 27, 2030
सूर्योदय
06:21
सूर्यास्त
17:52
ही तारीख का?
Govardhan Puja follows the Udaya Tithi rule – the festival is observed on the day when the required tithi prevails at sunrise. This is the default Dharmasindhu convention for festivals without a special time-window requirement.
पूजा विधी
आवश्यक साहित्य
- गाईचे शेण (गोवर्धन मूर्तीसाठी)
- कृष्णाची मूर्ती किंवा चित्र
- अन्नकूट सामग्री (५६ प्रकारच्या खाद्यपदार्थांचे नैवेद्य)
- फुले आणि हार
- तुळशीची पाने
पूजेच्या पायऱ्या
- 1
गोवर्धन पर्वत बनवणे
अंगणात किंवा पूजा करण्याच्या ठिकाणी शेणाचा छोटा डोंगर (गोवर्धन) तयार करा. तो फुले, गवत आणि लहान रोपांनी सजवा. त्यावर एक ...
- 2
गौ पूजा (गोपूजन)
गाईची कुंकू आणि हळदीचा टिळा लावून, हार घालून पूजा करा आणि तिला ताजे हिरवे गवत व गूळ खाऊ घाला. गाय कामधेनूचे प्रतीक आहे आ...
- 3
संकल्प
उजव्या हातात पाणी आणि अक्षता घ्या. आपले नाव, गोत्र, तिथी (कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा) आणि गोवर्धन पूजेचा उद्देश सांगा. पाणी ...
फळ (फायदे)
गोवर्धन पूजेमुळे भगवान श्रीकृष्णाचे आशीर्वाद, नैसर्गिक आपत्तींपासून संरक्षण, अन्न आणि संपत्तीची समृद्धी, पशुधन आणि कुटुंबाचे कल्याण प्राप्त होते आणि भगवंतावरील भक्ती अधिक दृढ होते.
गणनेचा पुरावा – पारदर्शक लेखापरीक्षण
देवता
भगवान कृष्ण
आख्यायिका आणि इतिहास
गोवर्धन पूजा उस दिन का स्मरण है जब बालकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी उँगली पर उठाकर वृन्दावन के लोगों और गौओं को इन्द्र की प्रलयकारी वर्षा से बचाया। कृष्ण के कहने पर व्रजवासियों ने इन्द्र यज्ञ बन… पूर्ण आख्यायिका वाचा →कमी दाखवा ↑
गोवर्धन पूजा उस दिन का स्मरण है जब बालकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी उँगली पर उठाकर वृन्दावन के लोगों और गौओं को इन्द्र की प्रलयकारी वर्षा से बचाया। कृष्ण के कहने पर व्रजवासियों ने इन्द्र यज्ञ बन्द कर गोवर्धन की पूजा की। पराजित इन्द्र ने कृष्ण से क्षमा माँगी।
कसे पाळावे
गोवर्धन पर्वत के आकार में अन्नकूट सजाएँ – चावल, दाल, सब्ज़ियाँ, मिठाइयाँ। कृष्ण को अर्पित करें। गौओं को सजाकर पूजा करें। गोबर से गोवर्धन बनाकर परिक्रमा करें। मन्दिर में अन्नकूट दर्शन करें।
महत्त्व
गोवर्धन पूजा प्रकृति-भक्ति और आत्मनिर्भरता की शिक्षा देती है। कृष्ण ने दिखाया कि समुदाय का पोषण करने वाला पर्वत और गौएँ पूजा के योग्य हैं। यह दीपावली का चौथा दिन है।