शिमला · Himachal Pradesh
नरक चतुर्दशी 2030शिमला मध्ये
Exact puja times & muhurta computed for Shimla coordinates (31.10°N, 77.17°E)
महत्त्वाच्या वेळा
उत्सवाची तारीख
Friday, October 25, 2030
सूर्योदय
06:30
सूर्यास्त
17:39
ही तारीख का?
निशिता काळ (मध्यरात्र) नियम: ज्या दिवशी मध्यरात्री चतुर्दशी तिथी असते, त्या दिवशी हा नियम पाळला जातो – दिवाळीच्या आदल्या रात्री. पहाटेचे अभ्यंगस्नान (तेल स्नान) नवीन वर्षासाठी शुद्धीकरण करते. याला छोटी दिवाळी असेही म्हणतात.
तिथी निश्चितीचा नियम
The tithi must prevail at Arunodaya (96 minutes before sunrise). Used for Narak Chaturdashi and Ekadashi observance.
Source: Dharmasindhu & Nirnayasindhu – classical Kala-Vyapti system
गणनेचा पुरावा – पारदर्शक लेखापरीक्षण
देवता
भगवान कृष्ण, देवी काली
आख्यायिका आणि इतिहास
नरक चतुर्दशी कृष्ण द्वारा नरकासुर वध का उत्सव है। नरकासुर ने 16,100 राजकुमारियों को बन्दी बनाया था। कृष्ण ने सत्यभामा सहित युद्ध कर उसे मारा और सबको मुक्त किया। भोर में कृष्ण को सुगन्धित तेल से स्नान … पूर्ण आख्यायिका वाचा →कमी दाखवा ↑
नरक चतुर्दशी कृष्ण द्वारा नरकासुर वध का उत्सव है। नरकासुर ने 16,100 राजकुमारियों को बन्दी बनाया था। कृष्ण ने सत्यभामा सहित युद्ध कर उसे मारा और सबको मुक्त किया। भोर में कृष्ण को सुगन्धित तेल से स्नान कराया गया। कुछ स्थानों पर इसे काली चौदस के रूप में मनाते हैं।
कसे पाळावे
भोर से पहले उठकर तिल के तेल और उबटन से अभ्यंग स्नान करें। शाम को चौदह दीप जलाएँ। पटाखे फोड़ें। कृष्ण और कुछ परम्पराओं में काली या हनुमान की पूजा करें। विशेष मिठाइयाँ बनाएँ।
महत्त्व
नरक चतुर्दशी बुराई के नाश और पीड़ितों की मुक्ति का प्रतीक है। भोर का स्नान पापों को धोता है और चौदह दीप चौदह लोकों को प्रकाशित करते हैं। यह दीपावली से पूर्व शुद्धिकरण का दिन है।