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अक्षय तृतीया 2026लंदन में
लंदन के निर्देशांकों (51.51°N, -0.13°E) के लिए सटीक पूजा समय
प्रमुख समय
त्योहार की तिथि
रविवार, 19 अप्रैल 2026
सूर्योदय
05:56
सूर्यास्त
20:03
यह तिथि क्यों?
मध्याह्न नियम: जिस दिन तृतीया तिथि मध्याह्न में व्याप्त हो। अक्षय तृतीया स्वयंसिद्ध मुहूर्त दिवस है — हर क्षण शुभ है — परन्तु पूजा और स्वर्ण क्रय मध्याह्न में उत्तम।
तिथि निर्धारण नियम
मध्याह्न (दोपहर) में तिथि व्याप्त होनी चाहिए। राम नवमी और गणेश चतुर्थी जैसे त्योहारों के लिए प्रयुक्त।
स्रोत: धर्मसिन्धु एवं निर्णयसिन्धु — शास्त्रीय काल-व्याप्ति पद्धति
पूजा विधि
आवश्यक सामग्री
- सोना या चाँदी की वस्तु (छोटी भी हो — सिक्का, अँगूठी या चेन)
- तुलसी के पत्ते
- दान की वस्तुएँ (वस्त्र, भोजन, जल के बर्तन)
- विष्णु मूर्ति या चित्र
- लक्ष्मी मूर्ति या चित्र
पूजा के चरण
- 1
प्रातः — स्नान एवं संकल्प
प्रातः शुद्धि स्नान करें। स्वच्छ पीले या सफ़ेद वस्त्र पहनें। वेदी के सामने बैठकर अक्षय तृतीया पूजा और दान के लिए विधिवत्...
- 2
लक्ष्मी-विष्णु पूजा
पीले कपड़े से सजी वेदी पर लक्ष्मी-विष्णु की मूर्तियाँ या चित्र स्थापित करें। चन्दन, तुलसी पत्र (विष्णु को), पीले फूल, अक...
- 3
विष्णु बीज मन्त्र जप
तुलसी माला से विष्णु बीज मन्त्र का 108 बार जप करें। भगवान विष्णु के स्वरूप पर ध्यान केन्द्रित करें और अक्षय आशीर्वाद की ...
फल (लाभ)
अक्षय तृतीया हिन्दू पञ्चाँग की सबसे पवित्र तिथियों में से एक है। इस दिन किया गया कोई भी पुण्य कर्म — दान, पूजा, जप, नई शुरुआत — अक्षय (कभी न घटने वाला) फल देता है। ब्रह्म पुराण के अनुसार अक्षय तृतीया पर दान सभी तीर्थों के दान के बराबर है। यही दिन है जब त्रेता युग आरम्भ हुआ, गंगा पृथ्वी पर अवतरित हुईं, और कुबेर को शिव से उनका धन प्राप्त हुआ।
गणना प्रमाण — पारदर्शी लेखा परीक्षा
देवता
भगवान विष्णु, देवी लक्ष्मी, परशुराम
कथा एवं इतिहास
इस दिन वेद व्यास ने गणेश जी को लिखाते हुए महाभारत की रचना आरम्भ की। इसी दिन त्रेतायुग का आरम्भ हुआ, परशुराम का जन्म हुआ, कुबेर को शिव से धन प्राप्त हुआ और सुदामा ने कृष्ण से अक्षय ऐश्वर्य पाया।
कैसे मनाएँ
सोना, चाँदी या नयी सम्पत्ति खरीदें — इस दिन प्राप्त वस्तु अक्षय (अविनाशी) होती है। दान करें, अन्नदान करें। नए कार्य, निवेश या गृहप्रवेश आरम्भ करें।
महत्व
अक्षय तृतीया हिन्दू कैलेंडर के सबसे शुभ दिनों में से एक है — प्रत्येक क्षण मुहूर्त है, अलग शुभ मुहूर्त की आवश्यकता नहीं। यह स्वयंसिद्ध मुहूर्त दिवस है।