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एक ही तिथि दो कैलेंडर दिनों पर क्यों पड़ सकती है – और सही दिन कैसे निर्धारित होता है
एक तिथि लगभग 23 घण्टे 37 मिनट की होती है, जो 24 घण्टे के सौर दिन से मेल नहीं खाती। जब तिथि दो दिनों पर पड़ती है, तो प्रश्न होता है: किस दिन त्योहार मनायें? उत्तर प्रत्येक त्योहार से जुड़े काल (समय खण्ड) पर निर्भर करता है।
भारत में दो मास-गणना प्रणालियाँ हैं। अमान्त (दक्षिण भारत, गुजरात) में मास अमावस्या (नई चन्द्रमा) पर समाप्त होता है। पूर्णिमान्त (उत्तर भारत) में मास पूर्णिमा पर समाप्त होता है। इसका अर्थ है कि कृष्ण पक्ष (पूर्णिमा के बाद) में पूर्णिमान्त मास अमान्त से एक मास आगे है। दीपावली अमान्त में कार्तिक अमावस्या पर है – लेकिन पूर्णिमान्त में भी यही तिथि कार्तिक अमावस्या है (क्योंकि कृष्ण पक्ष में दोनों प्रणालियाँ मेल खाती हैं)। समस्या शुक्ल पक्ष के त्योहारों में आती है।
उदाहरण: होली पूर्णिमा पर है। अमान्त में यह "फाल्गुन पूर्णिमा" है। पूर्णिमान्त में यह "फाल्गुन पूर्णिमा" ही है (क्योंकि पूर्णिमा पर मास समाप्त होता है, अतः यह फाल्गुन का अन्तिम दिन है)। किन्तु राम नवमी (चैत्र शुक्ल नवमी) अमान्त में "चैत्र" में है, पूर्णिमान्त में भी "चैत्र" – यहाँ भी मेल। विसंगति तब प्रकट होती है जब कृष्ण पक्ष के त्योहारों को सन्दर्भित करते हैं। हमारा ऐप सभी त्योहार परिभाषाओं में अमान्त मास नामों का उपयोग करता है (मुख्यधारा के सन्दर्भ पंचांगों के अनुरूप)।
मूल नियम। सूर्योदय पर जो तिथि हो, वह दिन। होली, हनुमान जयन्ती, दशहरा, गोवर्धन पूजा, भाई दूज।
दिन का मध्य 1/5 भाग (~10:45 – 1:30)। देवता का जन्म मध्याह्न में हुआ। राम नवमी, गणेश चतुर्थी, अक्षय तृतीया, हरतालिका तीज।
सूर्यास्त से ~96 मिनट (4 घटी)। दीप जलाने और सन्ध्या पूजा के लिए। दीपावली, धनतेरस, करवा चौथ।
रात्रि का 8वाँ मुहूर्त (~11:40 – 12:28)। गहन रात्रि के देवता। जन्माष्टमी (कृष्ण जन्म), महाशिवरात्रि, नरक चतुर्दशी।
सूर्योदय से ~96 मिनट पहले। भोर के स्नान और शुद्धि के लिए। नरक चतुर्दशी (अभ्यंग स्नान), छठ पूजा।
द्वि-तिथि (Spanning): जब एक ही तिथि दो क्रमिक सूर्योदय पर उपस्थित हो – अर्थात तिथि इतनी लम्बी है कि दो दिनों पर फैलती है। सामान्य नियम: एकादशी के लिए दूसरा दिन चुनें (व्रत लम्बा होता है); अन्य सभी तिथियों के लिए पहला दिन।
क्षय तिथि (Compressed): जब तिथि एक सूर्योदय और अगले सूर्योदय के बीच पूर्ण हो जाती है – किसी भी सूर्योदय पर मौजूद नहीं। यह दुर्लभ है (~2% दिनों पर)। त्योहार पिछले दिन मनाया जाता है।
अधिक तिथि: जब एक अतिरिक्त तिथि सम्मिलित हो – एक ही नम्बर की तिथि दो बार आती है। त्योहार दूसरी (निज) तिथि पर मनाया जाता है, पहली (अधिक) पर नहीं।
एकादशी व्रत के लिए स्मार्त और वैष्णव सम्प्रदाय भिन्न नियमों का पालन करते हैं। स्मार्त परम्परा उदय तिथि (सूर्योदय पर तिथि) का अनुसरण करती है। वैष्णव परम्परा अतिरिक्त प्रतिबन्ध जोड़ती है: एकादशी में दशमी का "वेध" (संस्पर्श) नहीं होना चाहिए – यदि सूर्योदय पर दशमी शेष है, तो एकादशी व्रत अगले दिन (द्वादशी) पर होता है। यही कारण है कि कभी-कभी स्मार्त और वैष्णव एकादशी अलग-अलग दिनों पर पड़ती है।