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राशि स्वामित्व, गरिमा, प्राकृतिक भाव कारक और लग्नानुसार कार्यात्मक स्थिति का सम्पूर्ण संदर्भ।
प्रत्येक 12 राशि का स्वामी सात दृश्य ग्रहों में से एक है। यह स्वामित्व निर्धारित करता है कि आपकी कुण्डली में कौन सा ग्रह किस भाव का "मालिक" है।
| राशि | स्वामी | स्वामी स्वभाव | उच्च ग्रह | नीच ग्रह |
|---|---|---|---|---|
| ♈ मेष | मंगल | साहस, ऊर्जा, कर्म | सूर्य | शनि |
| ♉ वृषभ | शुक्र | सौन्दर्य, विलास, प्रेम | चन्द्र | — |
| ♊ मिथुन | बुध | बुद्धि, वाणी, व्यापार | राहु | केतु |
| ♋ कर्क | चन्द्र | मन, भावनाएँ, पोषण | बृहस्पति | मंगल |
| ♌ सिंह | सूर्य | आत्मा, अधिकार, प्राणशक्ति | — | — |
| ♍ कन्या | बुध | बुद्धि, वाणी, व्यापार | बुध | शुक्र |
| ♎ तुला | शुक्र | सौन्दर्य, विलास, प्रेम | शनि | सूर्य |
| ♏ वृश्चिक | मंगल | साहस, ऊर्जा, कर्म | — | चन्द्र |
| ♐ धनु | बृहस्पति | ज्ञान, विस्तार, धर्म | केतु | राहु |
| ♑ मकर | शनि | अनुशासन, धैर्य, कर्म | मंगल | बृहस्पति |
| ♒ कुम्भ | शनि | अनुशासन, धैर्य, कर्म | — | — |
| ♓ मीन | बृहस्पति | ज्ञान, विस्तार, धर्म | शुक्र | बुध |
प्रत्येक भाव का एक प्राकृतिक कारक होता है — वह ग्रह जिसका स्वाभाविक स्वभाव उस भाव के अर्थों से मेल खाता है।
| भाव | कारक | अर्थ |
|---|---|---|
| 1 | सूर्य | आत्म, शरीर, व्यक्तित्व, स्वास्थ्य |
| 2 | बृहस्पति | धन, परिवार, वाणी, भोजन |
| 3 | मंगल | साहस, भाई-बहन, लघु यात्रा, संवाद |
| 4 | चन्द्र | माता, गृह, सुख, वाहन, भूमि |
| 5 | बृहस्पति | सन्तान, बुद्धि, रचनात्मकता, पूर्वपुण्य |
| 6 | शनि / मंगल | शत्रु, रोग, ऋण, सेवा, मुकदमा |
| 7 | शुक्र | विवाह, साझेदारी, व्यापार, सार्वजनिक छवि |
| 8 | शनि | आयु, रूपान्तरण, गूढ़ विद्या, विरासत |
| 9 | बृहस्पति | पिता, धर्म, भाग्य, उच्च शिक्षा, तीर्थ |
| 10 | सूर्य / बुध | कर्म, पद, कार्य, अधिकार, सार्वजनिक जीवन |
| 11 | बृहस्पति | लाभ, आकांक्षाएँ, बड़े भाई-बहन, सामाजिक नेटवर्क |
| 12 | शनि / केतु | हानि, मोक्ष, विदेश, व्यय, निद्रा |
ग्रह की कार्यात्मक भूमिका लग्न से उसके भाव स्वामित्व पर निर्भर करती है। एक नैसर्गिक शुभ ग्रह कार्यात्मक पापी बन सकता है और इसके विपरीत।
कोई नहीं — कोई एक ग्रह केन्द्र और त्रिकोण दोनों का स्वामी नहीं
स्वामित्व कुण्डली व्याख्या की रीढ़ है। जब आप किसी भाव में ग्रह देखें, तो दो प्रश्न पूछें: (1) यह ग्रह किन भावों का स्वामी है? (2) मेरे लग्न के लिए उन भावों की कार्यात्मक प्रकृति क्या है?
9वें भाव का स्वामी (त्रिकोण — भाग्य) 10वें भाव (केन्द्र — कर्म) में स्थित हो तो शक्तिशाली राजयोग बनता है। लेकिन 6ठे भाव का स्वामी (दुःस्थान — शत्रु/रोग) 7वें भाव (केन्द्र — विवाह) में साझेदारी में संघर्ष लाता है।
योगकारक ग्रह लग्न के लिए सबसे लाभकारी ग्रह है क्योंकि यह एक साथ केन्द्र और त्रिकोण दोनों का स्वामी होता है। वृषभ लग्न के लिए शनि 9वें (मकर) और 10वें (कुम्भ) का स्वामी है, इसलिए योगकारक है।
सम्बन्धित पृष्ठ: 12 भाव · 12 राशियाँ · नवग्रह