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मांगलिक दोष – निर्माण, तीव्रता, 10+ निवारण नियम और भ्रम निवारण
मांगलिक दोष (जिसे कुज दोष या चेव्वई दोषम् भी कहते हैं) वैदिक ज्योतिष की सबसे भयप्रद और सबसे गलत समझी गयी अवधारणा है। यह तब बनता है जब मंगल लग्न, चन्द्र या शुक्र से 1, 2, 4, 7, 8, या 12वें भाव में हो। मंगल अग्नि तत्त्व का आक्रामक ग्रह है, विवाह सम्बन्धित भावों में इसकी स्थिति दाम्पत्य जीवन में कलह का कारक मानी जाती है। किन्तु वास्तविकता भय से कहीं अधिक सूक्ष्म है – लगभग 40% कुण्डलियों में किसी न किसी प्रकार का मांगलिक दोष होता है, और शास्त्रीय ग्रन्थ 10 से अधिक निवारण नियम प्रदान करते हैं।
सभी मांगलिक दोष स्थितियाँ समान नहीं। 7वें भाव (स्वयं विवाह भाव) और 8वें भाव (दाम्पत्य दीर्घायु, साझी सम्पत्ति, कामजीवन) में मंगल सबसे कठोर माना जाता है। 1ले भाव (व्यक्तित्व) में मंगल प्रभावशाली स्वभाव बनाता है। 4थे भाव (गृह शान्ति) में घरेलू सामंजस्य बिगाड़ता है। 2रे भाव (परिवार, वाणी) में कठोर वाणी। 12वें भाव (शयन, हानि) में अन्तरंगता प्रभावित। लग्न से दोष सबसे बलवान, चन्द्र से मध्यम, शुक्र से सबसे हल्का।
शास्त्रीय ग्रन्थ, विशेषतः बीपीएचएस अध्याय 81, ऐसी अनेक स्थितियाँ बताते हैं जिनमें मांगलिक दोष निष्प्रभावी या काफ़ी कम हो जाता है। प्रमुख निवारण नियम: (1) मंगल दोष भाव में स्वगृही (मेष/वृश्चिक) या उच्च (मकर), (2) मंगल पर गुरु की युति या दृष्टि, (3) मंगल गुरु की राशि (धनु/मीन) में, (4) 7वें भाव का स्वामी केन्द्र में, (5) मंगल 2रे भाव में मिथुन या कन्या में, (6) दोनों साथियों में दोष (परस्पर निवारण), (7) 7वें भाव से शुभ ग्रह की दृष्टि, (8) 1ले/8वें भाव में मंगल सिंह/कुम्भ में, (9) 4थे भाव में मंगल-चन्द्र युति, (10) 28 वर्ष के बाद मंगल परिपक्व होता है।
मंगल स्वगृही (मेष/वृश्चिक) या उच्च (मकर)
गुरु की युति या दृष्टि
मंगल गुरु की राशि (धनु/मीन) में
7वें भाव का स्वामी केन्द्र में
मंगल 2रे भाव में मिथुन या कन्या में
दोनों साथियों में मांगलिक दोष
7वें भाव से शुभ ग्रह की दृष्टि
1ले/8वें भाव में सिंह/कुम्भ में
4थे भाव में मंगल-चन्द्र युति
28 वर्ष की आयु के बाद (मंगल परिपक्व)
मांगलिक दोष के कई मिथक अनावश्यक भय पैदा करते हैं। मिथक 1: 'मांगलिक व्यक्ति पत्नी/पति की मृत्यु का कारण बनेगा।' बीपीएचएस में 'दाम्पत्य कलह' लिखा है, मृत्यु नहीं। मिथक 2: 'मांगलिक दोष कभी नहीं जाता।' 28 वर्ष बाद मंगल परिपक्व होता है। मिथक 3: 'केवल मांगलिक से ही विवाह करना चाहिए।' अनेक अन्य निवारण नियम हैं। मिथक 4: 'कुम्भ विवाह दोष दूर करता है।' यह किसी प्रामाणिक ग्रन्थ में नहीं है। मांगलिक दोष का मूल्यांकन सम्पूर्ण कुण्डली के सन्दर्भ में होना चाहिए।
बीपीएचएस में "दाम्पत्य कलह" है, मृत्यु नहीं
28 के बाद मंगल परिपक्व होता है
10+ अन्य निवारण नियम हैं
किसी प्रामाणिक ग्रन्थ में नहीं
जब निवारण नियम लागू न हों और दोष सक्रिय हो, शास्त्रीय उपाय: (1) मांगलिक दोष मिलान – दूसरे मांगलिक से विवाह। (2) कुज शान्ति पूजा – लाल पुष्प, लाल वस्त्र और मंगल मन्त्र जप। (3) मंगलवार का उपवास। (4) दक्षिण हाथ की अनामिका में मूँगा धारण। (5) मंगलवार को मसूर दाल, लाल वस्त्र या गुड़ का दान। (6) हनुमान चालीसा पाठ। (7) वैथीश्वरन कोविल (तमिलनाडु) दर्शन। किसी योग्य ज्योतिषी से परामर्श अवश्य लें।
दोनों साथियों में दोष – परस्पर निवारण
लाल पुष्प, लाल वस्त्र, मंगल मन्त्र
मंगल का दिन
दक्षिण हाथ की अनामिका में
हनुमान मंगल की आक्रामकता शान्त करते हैं
मंगलवार को