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उदय तिथि, मध्याह्न, प्रदोष, निशीथ और अन्य काल नियमों को समझें जो त्योहारों की तिथियाँ निर्धारित करते हैं
एक तिथि (चान्द्र दिन) औसतन लगभग 23 घंटे 37 मिनट की होती है — 24 घंटे के सौर दिन से छोटी। इसका अर्थ है कि एक तिथि एक सूर्योदय-से-सूर्योदय दिन में शुरू होकर अगले दिन में समाप्त हो सकती है। जब दो लगातार सौर दिनों में एक ही तिथि हो, तो त्योहार किस दिन मनाएँ? यही वह मूल प्रश्न है जिसका उत्तर काल-व्याप्ति नियम देते हैं।
अधिकांश त्योहारों के लिए यह मूल नियम है। सूर्योदय पर जो भी तिथि व्याप्त हो, वही उस दिन की तिथि मानी जाती है। यदि मंगलवार को सूर्योदय पर चतुर्थी चल रही है, तो मंगलवार को अनुष्ठान के लिए चतुर्थी माना जाता है — भले ही चतुर्थी पिछले दिन दोपहर से शुरू हुई हो।
इस नियम का पालन करने वाले त्योहार: होली, हनुमान जयन्ती, गोवर्धन पूजा, भाई दूज
शास्त्रीय स्रोत: सूर्य सिद्धान्त
दिन के मध्य 1/5 भाग (लगभग सुबह 10:45 से दोपहर 1:30 तक, स्थान और ऋतु के अनुसार भिन्न)। जब देवता का जन्म या प्रमुख पौराणिक घटना दोपहर में हुई हो तब इसका उपयोग होता है। जिस दिन मध्याह्न काल में तिथि व्याप्त हो, वह दिन चुना जाता है।
त्योहार: राम नवमी (राम का जन्म दोपहर में), गणेश चतुर्थी (गणेश का जन्म दोपहर में), अक्षय तृतीया, हरतालिका तीज