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बृहत् पाराशर होरा शास्त्र 100 अध्यायों में कैसे व्यवस्थित है, प्रमुख सन्दर्भ अध्याय जो हर विद्यार्थी को जानने चाहिए, और शास्त्रीय नियमों को खोजने की व्यावहारिक विधियाँ
बृहत् पाराशर होरा शास्त्र (BPHS) वैदिक ज्योतिष का सबसे महत्वपूर्ण और व्यापक ग्रन्थ है। यह महर्षि पाराशर और उनके शिष्य मैत्रेय के बीच संवाद के रूप में लगभग 100 अध्यायों में संरचित है। "होरा" शब्द "अहोरात्र" (दिन और रात) से निकला है – होरा शास्त्र = समय का विज्ञान। यह ग्रन्थ ग्रह स्वभाव, राशि गुण, वर्ग, दशा, योग, बल, और उपचार – ज्योतिष के लगभग हर विषय को कवर करता है।
Ch. 1-2: सृष्टि और विष्णु अवतार
Ch. 3-4: ग्रह स्वभाव और राशि विशेषताएँ
Ch. 5-6: ग्रह गरिमा और दृष्टि
Ch. 7-16: वर्ग चार्ट (D1-D60)
Ch. 17-26: भाव कारकत्व (1-12)
Ch. 27-36: योग और राजयोग
Ch. 37-45: ग्रह अवस्थाएँ और बल
Ch. 46-52: दशा पद्धतियाँ
Ch. 53-80: उन्नत विषय और विशेष लग्न
Ch. 81-100: उपाय और मुहूर्त