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सभी कार्यों में सफलता का योग
सर्वार्थ सिद्धि योग (संस्कृत: सर्वार्थसिद्धियोग, "सभी लक्ष्यों की प्राप्ति") वैदिक ज्योतिष में सबसे सामान्य रूप से होने वाला विशेष मुहूर्त योग है। यह तब बनता है जब विशिष्ट वार और नक्षत्र का संयोग होता है। जब यह सक्रिय होता है, तो कोई भी महत्वपूर्ण कार्य अनुकूल परिणाम देता है।
सर्वार्थ सिद्धि योग पूरी तरह से सप्ताह के दिन और सूर्योदय के समय चन्द्रमा के नक्षत्र से निर्धारित होता है। शास्त्रीय स्रोत मुहूर्त चिन्तामणि और निर्णय सिन्धु है।
अश्विनी, पुष्य, उ.फाल्गुनी, हस्त, मूल, उ.आषाढ़ा, उ.भाद्रपद
रोहिणी, मृगशिरा, पुष्य, हस्त, अनुराधा, श्रवण
अश्विनी, कृत्तिका, उ.फाल्गुनी, उ.आषाढ़ा, उ.भाद्रपद
रोहिणी, मृगशिरा, हस्त, अनुराधा, ज्येष्ठा, रेवती
अश्विनी, पुनर्वसु, पुष्य, अनुराधा, श्रवण, रेवती
अश्विनी, पुनर्वसु, पुष्य, अनुराधा, श्रवण, रेवती
रोहिणी, स्वाती, श्रवण, रेवती
सर्वार्थ सिद्धि योग सार्वभौमिक रूप से शुभ माना जाता है। शास्त्रीय ग्रंथ लगभग किसी भी रचनात्मक कार्य के लिए इसकी सिफारिश करते हैं:
सर्वार्थ सिद्धि योग सबसे अधिक बार होने वाला विशेष योग है — यह महीने में कई बार बनता है। यह सूर्योदय से योग्य नक्षत्र के अंत तक सक्रिय रहता है।
सर्वार्थ सिद्धि योग कुछ अशुभ कारकों के साथ मेल खाने पर रद्द या कमज़ोर हो जाता है: