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वृषभ – बैल
जहाँ मेष की अग्नि भूमि पाती है – वृषभ वह उपवन जहाँ बीज वृक्ष बनते और इच्छा सम्पत्ति।
वृषभ सायन राशि चक्र की द्वितीय राशि है, 30° से 60° तक। यदि मेष चिंगारी थी तो वृषभ वह पृथ्वी जो उस चिंगारी को पोषित कर बढ़ती ज्वाला बनाती है। शुक्र शासित – सौन्दर्य, धन और इन्द्रिय सुख का ग्रह। भौतिक अभिव्यक्ति का सिद्धान्त – सम्भावना को स्पर्शनीय वास्तविकता में बदलना।
शास्त्रीय ग्रन्थ वृषभ जातकों को सशक्त, सुनिर्मित काया – चौड़े कन्धे, मोटी गर्दन, आयु के साथ भारीपन बताते हैं। चेहरा गोल या वर्गाकार – बड़े, कोमल, अभिव्यंजक नेत्र। ओष्ठ भरे, वर्ण गोरा या दीप्तिमान। चाल धीमी और विचारशील – जैसे पृथ्वी उनकी हो। केश घने और चमकदार।
कफ प्रधान (पृथ्वी-जल)। शीतल, स्थिर, पोषक, किन्तु असन्तुलन में मन्द। बैल प्रसिद्ध रूप से धैर्यवान – वृषभ जातक को क्रोधित करने में अत्यधिक उकसावा। किन्तु एक बार क्रोधित होने पर क्रोध भयंकर और अरोक्य। बैठे रहने की विलासिता स्थिरता लाती है; उत्पादक श्रम भव्यता।
धैर्य, विश्वसनीयता, दृढ़ संकल्प, वित्तीय कुशाग्रता, सौन्दर्य संवेदनशीलता, सम्बन्धों में निष्ठा, शारीरिक सहनशक्ति, पोषक स्वभाव, व्यावहारिक बुद्धि, स्थिर कार्य नैतिकता, किसी भी वातावरण में सुख और सौन्दर्य रचने की क्षमता।
हठ (वृषभ की प्रमुख छाया), सम्बन्धों में अधिकार-भावना, भौतिकवाद, परिवर्तन-प्रतिरोध, उत्तेजना के बिना आलस्य, ईर्ष्या, भोजन-पेय में अत्यधिक भोग, व्यक्तियों या वस्तुओं को उनके समय के बाद भी न छोड़ पाना, और आत्ममूल्य को सम्पत्ति से जोड़ना।
तीन नक्षत्र वृषभ में। कृत्तिका के बाद के पाद पृथ्वी में सौर अग्नि, रोहिणी चन्द्र सौन्दर्य का मुकुट रत्न, और मृगशिरा के प्रारम्भिक पाद मंगल की खोजी जिज्ञासा।
पृथ्वी राशि में शुद्धिकरण की अग्नि – ये पाद भौतिक महत्त्वाकांक्षी किन्तु नैतिक रूप से तीक्ष्ण जातक बनाते हैं। वृषभ में कृत्तिका व्यावहारिक विषयों पर सूर्य का छेदक विवेक: खाद्य गुणवत्ता, वित्तीय ईमानदारी, सौन्दर्य मानक। मूल्य का उत्कृष्ट निर्णायक। सशक्त भूख, आधिकारिक स्वर।
चन्द्र भवनों का मुकुट रत्न – रोहिणी सबसे सुन्दर और उर्वर नक्षत्र। इस क्षेत्र में चन्द्र उच्च, सम्पूर्ण राशि चक्र में सबसे भावनात्मक रूप से पोषक स्थिति। जातक शारीरिक रूप से आकर्षक – अभिव्यंजक नेत्र, कामुक उपस्थिति, स्वाभाविक आकर्षण। संगीत, नृत्य, कला में असाधारण प्रतिभा। भौतिक समृद्धि स्वाभाविक। अधिकारी, विलासिता-आसक्त।
खोजी मृग – वृषभ में मृगशिरा के प्रथम दो पाद मंगल की सक्रिय खोज और शुक्र की इन्द्रिय रसज्ञता का संयोग। जातक सुन्दर वस्तुओं के प्रति शाश्वत जिज्ञासु: उत्कृष्ट भोजन, संगीत, कला, प्रकृति। सुगन्ध विज्ञान, पाकशास्त्र, वस्त्र डिज़ाइन के लिए शुभ। सम्बन्धों में अस्थिर – सदा बेहतर की खोज।
वृषभ में चन्द्र उच्च – मन सर्वाधिक शान्त। राहु भी यहाँ उच्च (अनेक प्राधिकारी), भौतिक इच्छा विस्तारित। केतु नीच – आसक्ति की राशि में वैराग्य। शुक्र स्वगृह में निर्विवाद रानी।
चन्द्रमा वृषभ में उच्च – मन शुक्र के उपवन में गहनतम शान्ति पाता है। सर्वाधिक भावनात्मक रूप से स्थिर, इन्द्रिय-तृप्त और भौतिक रूप से सन्तुष्ट चन्द्र स्थिति। शान्त, पोषक स्वभाव, उत्कृष्ट रसज्ञता। माता प्रायः सौम्य, सुन्दर और भौतिक रूप से समृद्ध। 3° अंश पर चन्द्र ग्राह्यता चरम।
अनेक शास्त्रीय प्राधिकारियों के अनुसार राहु वृषभ में उच्च। भौतिक समृद्धि की राशि में अतृप्त इच्छा का छाया ग्रह धन, विलासिता और इन्द्रिय अनुभव की असाधारण प्रेरणा। अपरम्परागत माध्यमों से महान सम्पत्ति – विदेशी व्यापार, प्रौद्योगिकी, मनोरंजन। शुक्र गुणों को चरम तक बढ़ाता है।
केतु वृषभ में नीच – भौतिक सुख से आसक्ति की राशि में वैराग्य का ग्रह। जातक शारीरिक सुखों से विलग – समृद्धि से घिरे होने पर भी भोजन, सौन्दर्य या इन्द्रिय अनुभव का आनन्द न ले पाना। भौतिक सुरक्षा से आसक्ति त्यागने पर गहन आध्यात्मिक प्रगति सम्भव।
शुक्र वृषभ का स्वामी – सौन्दर्य की देवी अपने उपवन में। सबसे भूमिगत और उत्पादक शुक्र। वृषभ में शुक्र कृषक, रसोइया, गायक और शिल्पकार। जातक स्पर्शनीय सौन्दर्य रचता है। भौतिक समृद्धि स्वाभाविक किन्तु स्थिर प्रयास से। स्वर प्रायः मधुर और शारीरिक रूप आकर्षक।
चन्द्रमा का मूलत्रिकोण वृषभ में 4° से 20° – रोहिणी नक्षत्र से महत्त्वपूर्ण अतिव्यापन। मन सर्वाधिक सन्तुलित: भावनात्मक रूप से स्थिर, सौन्दर्यबोधी, व्यावहारिक। उत्कृष्ट भावनात्मक बुद्धि – दूसरों की आवश्यकताओं को सहज अनुभव। परामर्शदाता, रसोइया, संगीतकार, आन्तरिक डिज़ाइनर के लिए आदर्श स्थिति।
वृषभ में स्थित प्रत्येक नवग्रह का व्यवहार। शुक्र की पार्थिव, इन्द्रिय ऊर्जा प्रत्येक ग्रह को भौतिकवाद, सौन्दर्यबोध और स्पर्शनीय परिणामों की इच्छा से रंगती है।
शुक्र की पृथ्वी राशि में सूर्य – कोषागार में राजा। भौतिक उपलब्धि से अधिकार व्यक्त। धन, सौन्दर्य उपलब्धि और प्रदान करने की क्षमता से सम्मान। पिता वित्त, कृषि या कला से सम्बद्ध। कोषागार, कराधान सम्बन्धी शासकीय भूमिकाएँ उपयुक्त। स्वर में अधिकार – लोक वक्तृत्व और गायन के लिए उत्कृष्ट।
चन्द्रमा वृषभ में अपने शिखर पर – मन सर्वाधिक शान्त, ग्राही और भावनात्मक रूप से सन्तुलित। जातक की अलौकिक शान्ति सबको सुखद। स्वाद और सौन्दर्यबोध परिष्कृत। असाधारण स्मृति – स्वाद, सुगन्ध, धुन। माता पोषक, सुन्दर और भौतिक रूप से सम्पन्न। पाकशास्त्र, बागवानी, संगीत में असाधारण प्रतिभा।
शुक्र की पृथ्वी राशि में मंगल भौतिक अर्जन और शारीरिक सुख की ओर आक्रामक ऊर्जा। धन, सम्पत्ति और इन्द्रिय सुख के लिए हठी दृढ़ संकल्प। भूसम्पत्ति, कृषि, निर्माण, खाद्य उद्योग के लिए उत्कृष्ट। अधिकारी, ईर्ष्यालु और भौतिकवादी। असाधारण शारीरिक सहनशक्ति – ये मैराथन धावक हैं, स्प्रिंटर नहीं।
शुक्र की राशि में बुध – सुन्दर और व्यावहारिक विषयों पर बुद्धि। ठोस शब्दों में विचार: संख्या, बनावट, स्वाद, स्पर्शनीय परिणाम। उत्कृष्ट व्यापारिक समझ – आकर्षण और व्यावहारिक गणना का मिश्रण। वित्त, लेखा, विलासिता विपणन, खाद्य आलोचना के लिए शुभ। स्वर सुखद और संवाद शैली विचारशील।
वृषभ में गुरु भौतिक समृद्धि विस्तारित – कोषागार में शिक्षक। नैतिक माध्यमों, शैक्षिक उद्यमों और बुद्धिमान निवेश से धन वृद्धि। उदार, प्रचुर जीवन दर्शन। बैंकिंग, निवेश परामर्श, कृषि शिक्षा, पाक कला और परोपकार के लिए उत्कृष्ट। अत्यधिक भोग और आध्यात्मिक विकास में आत्मसन्तुष्टि सम्भव।
शुक्र अपने पार्थिव गृह में – देवी अपने उपवन की सेवा करती हुई। अधिकतम भूमिगत शुक्र: सौन्दर्य स्पर्शनीय – हस्तनिर्मित वस्तुएँ, तैयार भोजन, उपजाये पुष्प। भौतिक वास्तविकता पर असाधारण सौन्दर्यबोध। सृजनात्मक और कलात्मक प्रयासों से स्थिर धन संचय। सम्बन्ध निष्ठावान, कामुक और गहन। स्वर प्रायः अद्भुत सुन्दर।
शुक्र की पृथ्वी राशि में शनि – भौतिक संचय पर अनुशासन। जातक धीरे किन्तु निश्चित रूप से धन निर्माण – पत्थर दर पत्थर, वर्ष दर वर्ष। वास्तुकला, सिविल अभियान्त्रिकी, खनन, औद्योगिक कृषि के लिए उत्कृष्ट। सम्बन्ध गम्भीर और दीर्घकालिक। अत्यधिक मितव्ययी और सुख-विरोधी। वित्तीय सुरक्षा देर से किन्तु सुदृढ़।
राहु वृषभ में उच्च – प्रचुरता की राशि में अतृप्त भूख। जातक सभी परम्परागत सीमाओं से परे धन, विलासिता और इन्द्रिय अनुभव चाहता है। विदेशी सम्पर्क, प्रौद्योगिकी, मनोरंजन से असाधारण सम्पत्ति। सौन्दर्य और आकर्षण लगभग अलौकिक स्तर तक। भौतिक वस्तुओं के प्रति जुनूनी आसक्ति सम्भव।
केतु वृषभ में नीच – बाज़ार में सन्यासी। भौतिक आसक्ति की राशि में आध्यात्मिक वैराग्य का ग्रह। जातक शारीरिक सुखों से मूलभूत रूप से विलग – भोजन स्वादहीन, संगीत प्रभावहीन। उपेक्षा से वित्तीय हानि। कण्ठ और स्वर तन्तु प्रभावित। भौतिक सुरक्षा से आसक्ति त्यागने पर गहन आध्यात्मिक सम्भावना।
बैंकिंग, वित्त और निवेश प्रबन्धन, भूसम्पत्ति विकास और वास्तुकला, कृषि और खाद्य उत्पादन, रेस्तराँ और आतिथ्य उद्योग, संगीत और स्वर कला, रत्न व्यापार, वस्त्र और फ़ैशन डिज़ाइन, सुगन्ध और सौन्दर्य प्रसाधन, आन्तरिक डिज़ाइन, कला विक्रय, विलासिता खुदरा, पशु चिकित्सा।
वृषभ जातक स्थिर, सतत गति से कार्य करते हैं – कछुआ जो खरगोश को हराता है। आरामदायक कार्यस्थल चाहिए। दीर्घकालिक परियोजनाओं में उत्कृष्ट जिनमें धैर्य और गुणवत्ता आवश्यक। सम्मान मिलने पर उत्कृष्ट सहयोगी। सबसे बड़ी व्यावसायिक शक्ति: कच्चे माल को तैयार सौन्दर्य में बदलना।
पृथ्वी-पृथ्वी त्रिकोण – साझा व्यावहारिकता, गुणवत्ता ध्यान और स्पर्शनीय परिणामों की सराहना। कन्या की विश्लेषणात्मक सटीकता वृषभ की इन्द्रिय रसज्ञता की पूरक। बुध-शुक्र मैत्री सुचारु संवाद। स्थिरता कभी कमी नहीं।
गहन स्वाभाविक आत्मीयता – चन्द्र वृषभ में उच्च और कर्क का स्वामी, असाधारण पोषक शक्ति की भावनात्मक-भौतिक धुरी। दोनों गृह, परिवार और भावनात्मक सुरक्षा को प्राथमिकता। राशि चक्र का सबसे गर्म, सबसे पोषक गृह वातावरण।
स्थिर वर्ग तनाव – दोनों हठी और कोई नहीं झुकता। वृषभ सुख और स्थिरता, सिंह प्रशंसा और नाटक। शुक्र-सूर्य घर्षण – धन और जीवनशैली पर सत्ता संघर्ष। किन्तु दोनों अत्यन्त निष्ठावान – पारिवारिक गर्व पर सहमत होने पर अटूट गठबन्धन।
स्थिर विरोध – राशि चक्र में मूल्यों का सबसे मूलभूत संघर्ष। वृषभ व्यक्तिगत सम्पत्ति, कुम्भ सामूहिक बँटवारा। वृषभ परम्परा से चिपटता, कुम्भ क्रान्ति माँगता। दोनों अचल रूप से हठी। किन्तु यह धुरी व्यक्तिगत सुरक्षा और सामाजिक उत्तरदायित्व का सन्तुलन सिखाती है।
देवी लक्ष्मी और भगवान कृष्ण वृषभ जातकों के प्रमुख देवता। लक्ष्मी शुक्र की कृपा – भक्ति से प्रवाहित सौन्दर्य, प्रचुरता और समृद्धि। कृष्ण दिव्य गोपाल – वृन्दावन में क्रीड़ा, वृषभ के गोवंश प्रतीकवाद से सीधा सम्बन्ध, शुक्र गुणों की सर्वोच्च अभिव्यक्ति: दिव्य प्रेम, कलात्मक सौन्दर्य (वंशी)।
ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः
शुक्र बीज मन्त्र "ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः" शुक्रवार को शुक्र होरा में 16,000 बार। दैनिक अभ्यास में 108 बार। श्री सूक्तम् (ऋग्वेद से लक्ष्मी स्तुति) शुक्रवार को पाठ आध्यात्मिक और भौतिक प्रचुरता।
हीरा या श्वेत नीलम दाहिने हाथ की मध्यमा में प्लेटिनम या रजत जड़ित शुक्रवार को शुक्र होरा में – केवल योग्य ज्योतिषी के निर्देश पर। शुक्रवार को श्वेत वस्त्र, चावल, शक्कर, घी, कपूर दान। शुक्रवार व्रत शुक्र सशक्त। लक्ष्मी को श्वेत पुष्प। सुन्दर, स्वच्छ गृह बनाये रखना – सौन्दर्य व्यवस्था से शुक्र सशक्त।
वैदिक सभ्यता में वृषभ (बैल) पवित्र स्थान रखता है। नन्दी दिव्य वृषभ – भगवान शिव का वाहन, भक्ति से आदि ऊर्जा का अनुशासित संचालन। ऋग्वेद में वृषभ इन्द्र की वीर्यशक्ति और मानसून की प्रचुरता। कामधेनु (कामना पूर्ण करने वाली गाय) समुद्र मन्थन से प्रकट – पृथ्वी की अक्षय प्रदान क्षमता। राशि प्रतीक के रूप में वृषभ सम्पूर्ण स्पेक्ट्रम: बैल की कच्ची शक्ति, गाय की पोषक प्रचुरता, मानवता और पृथ्वी का पवित्र सम्बन्ध।
बैल दृढ़ खड़ा रहता है – यह मूलभूत वृषभ गुण। जबकि मेष आगे बढ़ता है, वृषभ अपने खुर गाड़ कर कहता है "मैं नहीं हिलूँगा।" बैल के सींग ऊपर – पृथ्वी से आकाश, पदार्थ से आत्मा। तान्त्रिक प्रतीकवाद में वृषभ प्रकृति में भूमिगत शक्ति – अभिव्यक्ति की शक्ति। वृषभ का पाठ: सच्ची सम्पत्ति संचय नहीं बल्कि खेती – धैर्य और प्रेम से पृथ्वी की सेवा।
वृषभ कण्ठ, गर्दन, थायरॉइड ग्रन्थि, मुख, निचला जबड़ा और ग्रीवा कशेरुकाओं का शासक है। द्वितीय राशि का कण्ठ से सम्बन्ध वृषभ जातकों को थायरॉइड विकार, टॉन्सिलाइटिस, सर्वाइकल स्पॉन्डिलोसिस और स्वर तन्तु तनाव के प्रति विशेष संवेदनशील बनाता है। जब शुक्र बली और शुभ स्थित हो तो जातक को सुन्दर रंगत, मधुर स्वर और दृढ़ शारीरिक संरचना मिलती है। दुर्बल शुक्र थायरॉइड असन्तुलन, पुराना गला दर्द, दन्त समस्या या त्वचा रोग दे सकता है। आयुर्वेदिक दृष्टि से वृषभ प्रधानतः कफ प्रकृति है – पृथ्वी-जल संविधान जो दृढ़ता देता है किन्तु भार वृद्धि, मन्द चयापचय और जल प्रतिधारण की प्रवृत्ति भी। आहार में ऊष्ण, हल्के और उत्तेजक पदार्थ – अदरक चाय, हरी पत्तेदार सब्जियाँ, हल्दी युक्त व्यंजन और संयमित मात्रा अनुशंसित। भारी, शीतल और अत्यधिक मीठे पदार्थ कफ बढ़ाते हैं। व्यायाम नियमित और सतत हो – पैदल, तैराकी, योग और बागवानी उपयुक्त। मानसिक रूप से हठ-जनित तनाव और आसक्ति-सम्बन्धी चिन्ता से ग्रस्त; वैराग्य अभ्यास अत्यन्त लाभकारी।
कण्ठ, गर्दन, थायरॉइड, ग्रीवा मेरुदण्ड, निचला जबड़ा, मुख, स्वर तन्तु, टॉन्सिल
कफ प्रधान। ऊष्ण, हल्के, तीक्ष्ण आहार अनुकूल। अतिरिक्त दुग्ध, मिठाई और शीतल पदार्थ वर्जित। स्वाभाविक आलस्य से बचने हेतु नियमित संयमित व्यायाम अनिवार्य।
कुण्डली व्याख्या में वृषभ को समझने के लिए सूर्य राशि से परे देखना आवश्यक – यह राशि आपकी कुण्डली में जहाँ पड़ती है वहाँ शुक्र की भौतिक ऊर्जा कैसे अभिव्यक्त होती है।
शुक्र लग्नेश बनता है – सौन्दर्य, आराम और भौतिक सुरक्षा केन्द्रीय जीवन विषय। कृत्तिका लग्न (सूर्य नक्षत्र) अग्नि-पृथ्वी तनाव – व्यावहारिकता में आधारित सृजनात्मक जुनून। रोहिणी लग्न (चन्द्र नक्षत्र) सबसे शास्त्रीय वृषभ व्यक्तित्व – कामुक, कलात्मक, आकर्षक। मृगशिरा लग्न (मंगल नक्षत्र) स्थिर वृषभ में बेचैन जिज्ञासा जोड़ता है। लग्नेश शुक्र की गरिमा का आकलन अनिवार्य।
चन्द्र वृषभ में उच्च – भावनात्मक स्थिरता के लिए सर्वोत्तम स्थानों में से एक। मन शान्त, इन्द्रिय-उन्मुख और सौन्दर्य, संगीत, प्रकृति से शान्ति पाता है। भावनात्मक प्रतिक्रियाएँ संयमित होती हैं। किन्तु आराम से गहरी आसक्ति और परिवर्तन का प्रतिरोध। रोहिणी चन्द्र ज्योतिष में सबसे भावनात्मक रूप से परिष्कृत – कलात्मक संवेदनशीलता और चुम्बकीय आकर्षण। कृत्तिका चन्द्र भावनात्मक प्रकृति में अग्नि और शुद्धिकारक तीव्रता जोड़ता है।
नवांश (D9) में वृषभ जीवनसाथी को इंगित करता है जो कामुक, वफादार, आरामपसन्द और सम्भवतः वित्त या कला से जुड़ा। दशमांश (D10) में बैंकिंग, कृषि, विलासिता, आतिथ्य, संगीत या ऐसा क्षेत्र जहाँ शुक्र का सौन्दर्य बोध पृथ्वी की व्यावहारिकता से मिलता है। D9 में बली शुक्र के साथ वृषभ प्रायः सुन्दर, स्थिर विवाह।
भ्रान्ति: वृषभ आलसी है। सत्य: वृषभ रणनीतिक रूप से ऊर्जा संरक्षित करता है – सतत प्रयास करता है, विस्फोट नहीं। भ्रान्ति: वृषभ भौतिकवादी है। सत्य: वृषभ समझता है कि भौतिक सुरक्षा आध्यात्मिक विकास की नींव है। भ्रान्ति: वृषभ सब परिवर्तन का विरोध करता है। सत्य: वृषभ अनावश्यक परिवर्तन का विरोध करता है – वह राशिचक्र का गुणवत्ता नियन्त्रक है।
जब वृषभ कुण्डली में विभिन्न भाव शिखरों पर पड़ता है, तो वह उस जीवन क्षेत्र में शुक्र की भौतिक, सौन्दर्यात्मक और स्थिरकारी ऊर्जा लाता है। यहाँ वृषभ प्रत्येक भाव को कैसे रंगता है:
शुक्र शासित व्यक्तित्व – आकर्षक, धैर्यवान, आरामपसन्द। सौन्दर्य और इन्द्रिय सुख प्रेमी दृढ़ शारीरिक संरचना। धन संचय स्वाभाविक प्रतिभा।
धन के लिए उत्कृष्ट – वाणी और वित्त के अपने क्षेत्र में शुक्र। मधुर स्वर, उत्तम भोजन प्रेम, दृढ़ पारिवारिक मूल्य। समय के साथ सम्पत्ति का स्थिर संचय।
कलात्मक संवाद शैली। भाई-बहन सृजनात्मक या वित्तीय क्षेत्रों में। साहस आक्रामकता से नहीं बल्कि दृढ़ता से। संगीत, लेखन या डिज़ाइन में कुशल।
सुन्दर, आरामदायक गृह। माता और मातृभूमि से गहरा लगाव। भूसम्पत्ति निवेश सफल। भौतिक स्थिरता से भावनात्मक सुरक्षा। बाग और भूमि प्रेम।
कला, संगीत और विलासिता व्यापार में सृजनात्मक प्रतिभा। प्रेम में रोमांटिक किन्तु अधिकारी। सन्तान कलात्मक प्रवृत्ति। शुक्र बली हो तो सट्टे में स्थिर लाभ।
कण्ठ और थायरॉइड सम्बन्धी स्वास्थ्य समस्याएँ। शत्रु धनवान या कलात्मक। सौन्दर्य, आतिथ्य या वित्त उद्योग में सेवा। धैर्यपूर्ण योजना से ऋण प्रबन्धन।
जीवनसाथी आकर्षक, वफादार और आरामपसन्द। विवाह भौतिक समृद्धि लाता है। शुक्र-सम्बन्धित क्षेत्रों में व्यापारिक साझेदारी फलती है। दृढ़ प्रतिबद्धता किन्तु अधिकार भावना का जोखिम।
विरासत और जीवनसाथी का धन समृद्ध। छिपे संसाधन और बीमा लाभ। इन्द्रिय अनुभवों से रूपान्तरण। तान्त्रिक साधनाओं में रुचि। शुक्र बली हो तो दीर्घायु।
कला, सौन्दर्य और विलासिता से भाग्य। पिता वित्त या सृजनात्मक क्षेत्र में। सौन्दर्य संवर्धन से धर्म अभिव्यक्ति। सुन्दर, पवित्र स्थानों की तीर्थयात्रा।
कला, विलासिता, वित्त, सौन्दर्य या आतिथ्य में करियर। विश्वसनीयता और सौन्दर्य बोध की व्यावसायिक प्रतिष्ठा। धीमी किन्तु स्थिर करियर वृद्धि। सुसंगत गुणवत्ता से अधिकार।
कलात्मक और वित्तीय नेटवर्क से लाभ। धनवान मित्र और सामाजिक वृत्त। बड़े भाई-बहन सृजनात्मक क्षेत्रों में। आकांक्षाएँ भौतिक सुरक्षा और सौन्दर्य उपलब्धि के इर्दगिर्द।
विलासिता, सौन्दर्य और आराम पर व्यय। सुखद स्थानों पर विदेशी निवास। इन्द्रिय त्याग से आध्यात्मिक विकास। शयनकक्ष सुख और निजी कलात्मक साधना।