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अमृतयोगः
निर्माण नियम
चन्द्र लग्न से केन्द्र में शुभ ग्रह से युत
उदाहरण कुण्डली
मेष लग्न उदाहरण — वास्तविक स्थिति भिन्न हो सकती है
अमृत योग — केन्द्र में शुभ युति से बलवान चन्द्र दीर्घायु, भावनात्मक सामंजस्य, जनप्रेम देता है।
उपचार और दीर्घायु
भावनात्मक सामंजस्य, जनप्रेम, उपचार क्षमता, दीर्घायु।
अमृत योग वाले व्यक्ति प्रायः स्वाभाविक रूप से दयालु और भावनात्मक रूप से संतुलित स्वभाव प्रदर्शित करते हैं, जिससे वे सार्वजनिक स्नेह और विश्वास आकर्षित करते हैं। वे ऐसे व्यवसायों में सफलता प्राप्त करते हैं जिनमें पोषण, उपचार या सार्वजनिक जुड़ाव शामिल हो, जहाँ उनकी सहज समानुभूति विशेष रूप से चमकती है। उनके संबंध सामान्यतः सामंजस्यपूर्ण होते हैं, और उनमें एक दृढ़ शारीरिक गठन होता है, जो कल्याण की भावना और दीर्घायु की प्रवृत्ति में योगदान देता है।
अमृत योग के परिणाम सामान्यतः चन्द्र (चन्द्रमा) अथवा युति करने वाले शुभ ग्रह की दशा या अन्तर्दशा काल में प्रकट होते हैं। ये अवधियाँ प्रायः भावनात्मक विकास, सार्वजनिक पहचान और बेहतर कल्याण के अवसर लेकर आती हैं।