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चतुःसागरयोगः
निर्माण नियम
चारों केन्द्र (1, 4, 7, 10) में ग्रह
उदाहरण कुण्डली
मेष लग्न उदाहरण — वास्तविक स्थिति भिन्न हो सकती है
चतुःसागर योग तब बनता है जब चारों केन्द्र भावों में ग्रह हों। यह चारों दिशाओं में फैलने वाले यश का संकेत है।
व्यापक यश
सभी दिशाओं में यश, अन्तर्राष्ट्रीय मान्यता।