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ग्रहसंघातयोगः
निर्माण नियम
सभी 7 ग्रह (सूर्य-शनि) 4 क्रमागत भावों में
उदाहरण कुण्डली
मेष लग्न उदाहरण — वास्तविक स्थिति भिन्न हो सकती है
ग्रह संघात तब बनता है जब सभी सात दृश्य ग्रह (सूर्य से शनि) 4 क्रमागत भावों की संकीर्ण खिड़की में संकेन्द्रित हों। यह तीव्र, केन्द्रित ऊर्जा उत्पन्न करता है। कौन से भाव अधिगृहीत हैं, इससे निर्धारित होता है कि यह संकेन्द्रण सकारात्मक (केन्द्र/त्रिकोण) या जीवन असन्तुलन (दुस्थान) के रूप में प्रकट होगा।
संकेन्द्रित ऊर्जा
सभी ग्रह ऊर्जा संकीर्ण क्षेत्र में — गहन जीवन विषय और विशेषज्ञता किन्तु खाली भावों में सम्भावित असन्तुलन।
ग्रह संघात वाले व्यक्ति अक्सर जीवन के विशिष्ट क्षेत्रों में उल्लेखनीय एकाग्रता और गहन विशेषज्ञता प्रदर्शित करते हैं, जिससे महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ प्राप्त होती हैं। हालांकि, यह तीव्र एकाग्रता जीवन के अन्य क्षेत्रों — जैसे संबंध या सामान्य कल्याण — को उपेक्षित या अविकसित महसूस करा सकती है, जिससे एक असमान जीवन अनुभव बनता है। उनका स्वभाव एकनिष्ठ लक्ष्य प्राप्ति और गहन विशेषज्ञता की ओर उन्मुख होता है।
ग्रह संघात के परिणाम सामान्यतः संबंधित ग्रहों की महादशाओं (दशाओं) या अंतर्दशाओं के दौरान प्रबल रूप से प्रकट होते हैं, विशेष रूप से सूर्य, चन्द्र, या जिस भाव में यह समूह स्थित है, उसके स्वामी की दशा/अंतर्दशा में।