Loading...
Loading...

शकटयोगः
निर्माण नियम
बृहस्पति चन्द्र से 6, 8 या 12वें भाव में
उदाहरण कुण्डली
मेष लग्न उदाहरण — वास्तविक स्थिति भिन्न हो सकती है
शकट योग गजकेसरी का विपरीत है — बृहस्पति चन्द्र से 6, 8 या 12वें भाव में है। नाम का अर्थ "गाड़ी" है — जातक का भाग्य गाड़ी के पहिये की तरह उतार-चढ़ाव करता है।
यह योग सामान्य है (~25% कुण्डलियाँ) और इसके प्रभाव भिन्न हैं। चन्द्र से 8वें में बृहस्पति सबसे चुनौतीपूर्ण है।
उतार-चढ़ाव भाग्य
समृद्धि और विपत्ति के चक्र। भाग्य स्थिर नहीं — लाभ के बाद हानि।
शकट योग वाले व्यक्ति अक्सर अपने पेशेवर और वित्तीय जीवन में महत्वपूर्ण उतार-चढ़ाव का अनुभव करते हैं, जिसमें सफलता की अवधि के बाद अक्सर अप्रत्याशित गिरावट आती है। इससे अस्थिरता की भावना पैदा हो सकती है, जिससे उन्हें बदलती परिस्थितियों के अनुकूल ढलना पड़ता है। उनका स्वभाव इस परिवर्तनशीलता को दर्शा सकता है, जो आशावाद और सावधानी के बीच झूलता रहता है, जैसे-जैसे वे समृद्धि और प्रतिकूलता के आवर्ती चक्रों को पार करते हैं।
शकट योग के उतार-चढ़ाव वाले परिणाम सामान्यतः गुरु (बृहस्पति) और चन्द्र (चन्द्रमा) की दशा और अन्तर्दशा काल में प्रकट होते हैं, विशेषकर जब ये ग्रह कुंडली में सक्रिय हों।