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शुभकर्तरीयोगः
निर्माण नियम
किसी विशेष भाव या ग्रह के निकटवर्ती भावों में शुभ ग्रह
उदाहरण कुण्डली
मेष लग्न उदाहरण — वास्तविक स्थिति भिन्न हो सकती है
शुभ कर्तरी योग तब बनता है जब शुभ ग्रह किसी भाव या ग्रह को दोनों ओर से घेरें। यह सकारात्मक ऊर्जा का रक्षात्मक कवच बनाता है।
रक्षा और वृद्धि
घेरे गये भाव के चारों ओर रक्षात्मक कवच, बढ़े हुए सकारात्मक परिणाम।
शुभ कर्तरी योग वाले व्यक्ति अक्सर घिरे हुए भाव के कारकत्वों के आसपास एक निरंतर सुरक्षात्मक प्रभाव पाते हैं। यह उस विशिष्ट जीवन क्षेत्र में बढ़ी हुई संभावनाओं और कम बाधाओं में परिणत होता है, जैसे कि दशम भाव के शामिल होने पर करियर में स्थिरता, या यदि लग्न घिरा हुआ हो तो सुदृढ़ स्वास्थ्य। वे सहायक परिस्थितियों और लोगों को आकर्षित करते हैं, जिससे स्थिर वृद्धि और सकारात्मक परिणाम प्राप्त होते हैं।
इस योग के सुरक्षात्मक और वर्धक प्रभाव सामान्यतः कर्तरी योग बनाने वाले शुभ ग्रहों की, अथवा कर्तरी में आए भाव के स्वामी की दशा या अन्तर्दशा काल में प्रकट होते हैं। ये अवधियाँ प्रतिश्रुत सकारात्मक परिणाम लाती हैं।