सफला एकादशी
Vratसभी प्रयासों में सफलता (सफला) प्रदान करती है।
margashirsha कृष्ण
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The complete Hindu calendar for 2027 with all major festivals, Ekadashi vrat dates, eclipses, Purnima, and Amavasya – computed using classical Vedic astronomical algorithms from Ujjain (the traditional prime meridian of Hindu astronomy). Dates are accurate for all Indian cities.
हिन्दू कैलेंडर एक साथ खगोलीय और आध्यात्मिक है। प्रत्येक त्योहार की तिथि वास्तविक खगोलीय घटनाओं से गणित होती है — दीपावली कार्तिक की अमावस्या (नवचन्द्र) पर आती है, होली फाल्गुन की पूर्णिमा पर, गणेश चतुर्थी भाद्रपद की चतुर्थी पर। ये मनमानी तिथियाँ नहीं हैं — ये सटीक चन्द्र-सौर संरेखण हैं। यह कैलेंडर वैदिक समझ की एक जीवन्त अभिव्यक्ति है कि मानव जीवन ब्रह्माण्डीय लय से अन्तर्गुन्थित है।
सभी प्रयासों में सफलता (सफला) प्रदान करती है।
margashirsha कृष्ण
त्रयोदशी और संध्याकाल का संयोग शिव के लिए परम पवित्र है। शनिवार का प्रदोष (शनि प्रदोष) शनि पीड़ा निवारण में विशेष शक्तिशाली है।
margashirsha कृष्ण
margashirsha कृष्ण
margashirsha कृष्ण
सबसे अन्धेरी रात – आत्मनिरीक्षण और पूर्वजों से जुड़ने के लिए आदर्श।
margashirsha कृष्ण
pausha शुक्ल
कोनो हिन्दू अनुष्ठान मे गणेशक आह्वान सबसँ पहिने कयल जाइत अछि। मासिक चतुर्थीक पूजा सँ बाधासभक निरन्तर निवारण तथा बुद्धि, सफलता आ नव आरम्भक लेल आशीर्वाद सुनिश्चित होइत अछि।
pausha शुक्ल
Sun enters Capricorn – marks the northward journey (Uttarayana). Sacred bathing, charity, and sesame offerings.
शुक्ल
Sun enters Capricorn – marks the northward journey (Uttarayana). Sacred bathing, charity, and sesame offerings.
शुक्ल
Sun enters Capricorn – marks the northward journey (Uttarayana). Sacred bathing, charity, and sesame offerings.
शुक्ल
Sun enters Capricorn – marks the northward journey (Uttarayana). Sacred bathing, charity, and sesame offerings.
शुक्ल
Sun enters Capricorn – marks the northward journey (Uttarayana). Sacred bathing, charity, and sesame offerings.
शुक्ल
Sun enters Capricorn – marks the northward journey (Uttarayana). Sacred bathing, charity, and sesame offerings.
शुक्ल
ई पर्व सत्यक असत्य पर विजयक उत्सव मनाबैत अछि – मुरुगन द्वारा असुर सेनाक पराजय। भक्त लोकनि साहस, नकारात्मकता सँ रक्षा आ व्यक्तिगत बाधासभ पर विजय प्राप्त करबाक लेल प्रार्थना करैत छथि।
pausha शुक्ल
pausha शुक्ल
Sun enters Capricorn – marks the northward journey (Uttarayana). Sacred bathing, charity, and sesame offerings.
शुक्ल
Sun enters Capricorn – marks the northward journey (Uttarayana). Sacred bathing, charity, and sesame offerings.
शुक्ल
भगवतीक प्रति भक्ति केर मासिक नवीकरण। दुर्गा शक्ति केर संरक्षक, उग्र रूपक प्रतिनिधित्व करैत छथि। नियमित अष्टमी पूजा भय दूर करैत, साहस प्रदान करैत, आ शत्रु सँ रक्षा करैत मानल जाइत अछि।
pausha शुक्ल
pausha शुक्ल
सन्तान, विशेषतः सुयोग्य पुत्र प्रदान करती है।
pausha शुक्ल
त्रयोदशी और संध्याकाल का संयोग शिव के लिए परम पवित्र है। शनिवार का प्रदोष (शनि प्रदोष) शनि पीड़ा निवारण में विशेष शक्तिशाली है।
pausha शुक्ल
pausha शुक्ल
विघ्नहर्ता की मासिक पूजा। कृष्ण चतुर्थी (ढलते चन्द्र का 4वाँ दिन) पर।
pausha कृष्ण
कृष्णक प्रति मासिक भक्ति भक्तकेँ हुनकर प्रेम, कर्तव्य आ समर्पणक शिक्षासँ जोड़ि रखैत अछि। कृष्ण अष्टमी विशेष रूपसँ हुनका लेल शक्तिशाली होइत अछि जे दिव्य कृपा आ दैनिक जीवनमे आनंदक खोजमे छथि।
pausha कृष्ण
तिल दान दरिद्रता दूर करता है।
pausha कृष्ण
त्रयोदशी और संध्याकाल का संयोग शिव के लिए परम पवित्र है। शनिवार का प्रदोष (शनि प्रदोष) शनि पीड़ा निवारण में विशेष शक्तिशाली है।
pausha कृष्ण
pausha कृष्ण
pausha कृष्ण
pausha कृष्ण
सबसे अन्धेरी रात – आत्मनिरीक्षण और पूर्वजों से जुड़ने के लिए आदर्श।
pausha कृष्ण
तांत्रिक साधनाक लेल गुप्त नवरात्रि मुख्य नवरात्रि सँ सेहो बेसी शक्तिशाली मानल जाइत अछि। माघ गुप्त नवरात्रि जाड़क दिनमे पड़ैत अछि आ मंत्र सिद्धि तथा आध्यात्मिक जागरणक लेल विशेष रूप सँ प्रभावशाली अछि।
magha शुक्ल
magha शुक्ल
magha शुक्ल
कोनो हिन्दू अनुष्ठान मे गणेशक आह्वान सबसँ पहिने कयल जाइत अछि। मासिक चतुर्थीक पूजा सँ बाधासभक निरन्तर निवारण तथा बुद्धि, सफलता आ नव आरम्भक लेल आशीर्वाद सुनिश्चित होइत अछि।
magha शुक्ल
वसन्त ऋतु के आगमन का प्रतीक। शिक्षा, संगीत और कला आरम्भ करने का सबसे शुभ दिन।
magha शुक्ल
magha शुक्ल
ई पर्व सत्यक असत्य पर विजयक उत्सव मनाबैत अछि – मुरुगन द्वारा असुर सेनाक पराजय। भक्त लोकनि साहस, नकारात्मकता सँ रक्षा आ व्यक्तिगत बाधासभ पर विजय प्राप्त करबाक लेल प्रार्थना करैत छथि।
magha शुक्ल
रथ सप्तमी सूर्य के प्रतीकात्मक जन्मदिवस और वसन्त आगमन का सूचक है। आक के पत्तों से स्नान सात जन्मों के पापों का नाश करता है।
magha शुक्ल
Sun enters Aquarius – Kumbha Sankranti.
शुक्ल
भीष्म अष्टमी त्याग, दृढ़ संकल्प और प्रतिज्ञापालन का सन्देश देती है। इस दिन तर्पण करना सभी पितरों के तर्पण के समान माना जाता है।
magha शुक्ल
भगवतीक प्रति भक्ति केर मासिक नवीकरण। दुर्गा शक्ति केर संरक्षक, उग्र रूपक प्रतिनिधित्व करैत छथि। नियमित अष्टमी पूजा भय दूर करैत, साहस प्रदान करैत, आ शत्रु सँ रक्षा करैत मानल जाइत अछि।
magha शुक्ल
magha शुक्ल
शत्रुओं और बाधाओं पर विजय (जया) प्रदान करती है।
magha शुक्ल
हिन्दू धर्मग्रन्थक सबसँ महान चरित्रसभ मे सँ एक केँ सम्मानित करैत अछि – एकटा एहन पुरुष जे अपन पिताक इच्छाक लेल व्यक्तिगत सुखक त्याग केलनि, आजीवन ब्रह्मचर्यक व्रतक पालन केलनि, आ अपन मृत्यु केर क्षण स्वयं चुनलनि।
magha शुक्ल
त्रयोदशी और संध्याकाल का संयोग शिव के लिए परम पवित्र है। शनिवार का प्रदोष (शनि प्रदोष) शनि पीड़ा निवारण में विशेष शक्तिशाली है।
magha शुक्ल
magha शुक्ल
magha शुक्ल
magha शुक्ल
प्रत्येक पूर्णिमा का हिन्दू महीने के आधार पर विशेष नाम और महत्व है। पूर्णिमा प्रार्थना, ध्यान और दान के प्रभावों को बढ़ाती है।
magha शुक्ल
विघ्नहर्ता की मासिक पूजा। कृष्ण चतुर्थी (ढलते चन्द्र का 4वाँ दिन) पर।
magha कृष्ण
magha कृष्ण
कृष्णक प्रति मासिक भक्ति भक्तकेँ हुनकर प्रेम, कर्तव्य आ समर्पणक शिक्षासँ जोड़ि रखैत अछि। कृष्ण अष्टमी विशेष रूपसँ हुनका लेल शक्तिशाली होइत अछि जे दिव्य कृपा आ दैनिक जीवनमे आनंदक खोजमे छथि।
magha कृष्ण
सभी युद्धों और कार्यों में विजय की गारण्टी। स्वयं राम ने यह व्रत रखा था।
magha कृष्ण
त्रयोदशी और संध्याकाल का संयोग शिव के लिए परम पवित्र है। शनिवार का प्रदोष (शनि प्रदोष) शनि पीड़ा निवारण में विशेष शक्तिशाली है।
magha कृष्ण
वर्ष की सबसे अन्धकारमय रात्रि – अन्धकार और अज्ञान पर विजय का प्रतीक। इस रात्रि शिव की ऊर्जा सर्वाधिक सुलभ मानी जाती है।
magha कृष्ण
magha कृष्ण
magha कृष्ण
सबसे अन्धेरी रात – आत्मनिरीक्षण और पूर्वजों से जुड़ने के लिए आदर्श।
magha कृष्ण
phalguna शुक्ल
phalguna शुक्ल
कोनो हिन्दू अनुष्ठान मे गणेशक आह्वान सबसँ पहिने कयल जाइत अछि। मासिक चतुर्थीक पूजा सँ बाधासभक निरन्तर निवारण तथा बुद्धि, सफलता आ नव आरम्भक लेल आशीर्वाद सुनिश्चित होइत अछि।
phalguna शुक्ल
phalguna शुक्ल
ई पर्व सत्यक असत्य पर विजयक उत्सव मनाबैत अछि – मुरुगन द्वारा असुर सेनाक पराजय। भक्त लोकनि साहस, नकारात्मकता सँ रक्षा आ व्यक्तिगत बाधासभ पर विजय प्राप्त करबाक लेल प्रार्थना करैत छथि।
phalguna शुक्ल
Sun enters Pisces – Meena Sankranti.
शुक्ल
भगवतीक प्रति भक्ति केर मासिक नवीकरण। दुर्गा शक्ति केर संरक्षक, उग्र रूपक प्रतिनिधित्व करैत छथि। नियमित अष्टमी पूजा भय दूर करैत, साहस प्रदान करैत, आ शत्रु सँ रक्षा करैत मानल जाइत अछि।
phalguna शुक्ल
इस दिन आँवले के वृक्ष की पूजा सहस्र गायों के दान के बराबर है।
phalguna शुक्ल
त्रयोदशी और संध्याकाल का संयोग शिव के लिए परम पवित्र है। शनिवार का प्रदोष (शनि प्रदोष) शनि पीड़ा निवारण में विशेष शक्तिशाली है।
phalguna शुक्ल
होलिका दहन भक्ति की आसुरी शक्ति पर और सत्य की असत्य पर विजय का प्रतीक है। पवित्र अग्नि वातावरण को शुद्ध करती है। यह होली की पूर्व संध्या पर मनाया जाता है।
phalguna शुक्ल
अच्छाई (प्रह्लाद की भक्ति) की बुराई (हिरण्यकशिपु के अहंकार) पर विजय। वसन्त, नवीनता और सामाजिक एकता का उत्सव।
phalguna शुक्ल
phalguna शुक्ल
phalguna शुक्ल
विघ्नहर्ता की मासिक पूजा। कृष्ण चतुर्थी (ढलते चन्द्र का 4वाँ दिन) पर।
phalguna कृष्ण
phalguna कृष्ण
कृष्णक प्रति मासिक भक्ति भक्तकेँ हुनकर प्रेम, कर्तव्य आ समर्पणक शिक्षासँ जोड़ि रखैत अछि। कृष्ण अष्टमी विशेष रूपसँ हुनका लेल शक्तिशाली होइत अछि जे दिव्य कृपा आ दैनिक जीवनमे आनंदक खोजमे छथि।
phalguna कृष्ण
सभी पापों का नाश, टूटे व्रतों और शापों के प्रभाव को हटाती है
phalguna कृष्ण
त्रयोदशी और संध्याकाल का संयोग शिव के लिए परम पवित्र है। शनिवार का प्रदोष (शनि प्रदोष) शनि पीड़ा निवारण में विशेष शक्तिशाली है।
phalguna कृष्ण
phalguna कृष्ण
phalguna कृष्ण
phalguna कृष्ण
सबसे अन्धेरी रात – आत्मनिरीक्षण और पूर्वजों से जुड़ने के लिए आदर्श।
phalguna कृष्ण
चैत्र नवरात्रि हिन्दू नववर्ष और वसन्त आगमन का प्रतीक है। नई शुरुआत, साधना और देवी कृपा के लिए सबसे शुभ समय माना जाता है।
chaitra शुक्ल
उगादि वर्षकेँ एकटा पूर्ण घटनाक रूपमे घरक औपचारिक स्वीकृति अछि, केवल एकर मीठ भाग नहि। पचड़ीक छह रस — कड़ुआ, कसैला, खट्टा, नमकीन, तीखा, मीठ — नव वर्षक भोरमे एक संग, एकटा निवालामे, जानि-बूझि कऽ खाएल जाइत अछि: परिवार शरीरमे स्वीकार करैत अछि, आगाक माससभक लेल कोनो इच्छा बनयसँ पहिने, जे वर्षमे सभ छहटा रहत आ कोनो एकटाक बिना वर्षमे रहबाक कोनो उपाय नहि अछि। पंचांग श्रवण एहि समान शिक्षाकेँ एकटा भिन्न रूपमे प्रस्तुत करैत अछि: वर्षक गतिविधि सभकेँ शुरुआतमे सार्वजनिक कएल जाइत अछि, घर ओकरा सुनैत अछि, आ घर आश्चर्यचकित होयबाक बजाय सूचित भऽ कऽ वर्षमे प्रवेश करैत अछि। एक संग, ई दूटा अनुष्ठान उगादिक विशिष्ट ब्रह्मांड विज्ञानकेँ फ्रेम करैत अछि — नव वर्ष एकटा उपहार नहि अछि जे खोलबाक प्रतीक्षा कऽ रहल अछि, बल्कि आँखि खोलि कऽ कएल गेल एकटा पूर्ण धार्मिक संलग्नता अछि। ई पर्व ओ पंचांगीय संकेतक सेहो अछि जे ब्रह्मांडीय घड़ी अपन अगिला ३६०-दिवसीय घुमाव शुरू कऽ देलक अछि: ब्रह्म पुराणक विवरण एहि भोरमे सृष्टिक स्थापना करैत अछि, आ घर पचड़ी आ पंचांगक अनुष्ठानकेँ दोहरा कऽ अपन रसोई आ देहरीक स्तर पर समयक नवीकरणमे भाग लऽ रहल अछि।
chaitra शुक्ल
chaitra शुक्ल
chaitra शुक्ल
chaitra शुक्ल
chaitra शुक्ल
chaitra शुक्ल
chaitra शुक्ल
chaitra शुक्ल
chaitra शुक्ल
कोनो हिन्दू अनुष्ठान मे गणेशक आह्वान सबसँ पहिने कयल जाइत अछि। मासिक चतुर्थीक पूजा सँ बाधासभक निरन्तर निवारण तथा बुद्धि, सफलता आ नव आरम्भक लेल आशीर्वाद सुनिश्चित होइत अछि।
chaitra शुक्ल
chaitra शुक्ल
chaitra शुक्ल
chaitra शुक्ल
chaitra शुक्ल
chaitra शुक्ल
ई पर्व सत्यक असत्य पर विजयक उत्सव मनाबैत अछि – मुरुगन द्वारा असुर सेनाक पराजय। भक्त लोकनि साहस, नकारात्मकता सँ रक्षा आ व्यक्तिगत बाधासभ पर विजय प्राप्त करबाक लेल प्रार्थना करैत छथि।
chaitra शुक्ल
chaitra शुक्ल
chaitra शुक्ल
chaitra शुक्ल
chaitra शुक्ल
Sun enters Aries – Mesh Sankranti / Baisakhi.
शुक्ल
Sun enters Aries – Vishu.
शुक्ल
Sun enters Aries – Puthandu.
शुक्ल
Sun enters Aries – Poila Boishakh.
शुक्ल
Sun enters Aries – Bohag Bihu.
शुक्ल
Sun enters Aries – Pana Sankranti (Odia New Year).
शुक्ल
Sun enters Aries – Jud-Shital (Mithila New Year).
शुक्ल
भगवतीक प्रति भक्ति केर मासिक नवीकरण। दुर्गा शक्ति केर संरक्षक, उग्र रूपक प्रतिनिधित्व करैत छथि। नियमित अष्टमी पूजा भय दूर करैत, साहस प्रदान करैत, आ शत्रु सँ रक्षा करैत मानल जाइत अछि।
chaitra शुक्ल
मर्यादा पुरुषोत्तम के जन्म का उत्सव – जिन्होंने प्रत्येक कदम पर धर्म का पालन किया।
chaitra शुक्ल
सभी इच्छाएँ पूर्ण करती है, ब्रह्महत्या तुल्य पापों को नष्ट करती है
chaitra शुक्ल
त्रयोदशी और संध्याकाल का संयोग शिव के लिए परम पवित्र है। शनिवार का प्रदोष (शनि प्रदोष) शनि पीड़ा निवारण में विशेष शक्तिशाली है।
chaitra शुक्ल
chaitra शुक्ल
chaitra शुक्ल
भक्ति, शक्ति और निःस्वार्थ सेवा के मूर्तिमान रूप का उत्सव। हनुमान आदर्श भक्त हैं – शक्तिशाली किन्तु विनम्र।
chaitra शुक्ल
chaitra शुक्ल
chaitra कृष्ण
विघ्नहर्ता की मासिक पूजा। कृष्ण चतुर्थी (ढलते चन्द्र का 4वाँ दिन) पर।
chaitra कृष्ण
कृष्णक प्रति मासिक भक्ति भक्तकेँ हुनकर प्रेम, कर्तव्य आ समर्पणक शिक्षासँ जोड़ि रखैत अछि। कृष्ण अष्टमी विशेष रूपसँ हुनका लेल शक्तिशाली होइत अछि जे दिव्य कृपा आ दैनिक जीवनमे आनंदक खोजमे छथि।
chaitra कृष्ण
यमराज का भय दूर करती है, रक्षा और पुण्य प्रदान करती है
chaitra कृष्ण
त्रयोदशी और संध्याकाल का संयोग शिव के लिए परम पवित्र है। शनिवार का प्रदोष (शनि प्रदोष) शनि पीड़ा निवारण में विशेष शक्तिशाली है।
chaitra कृष्ण
chaitra कृष्ण
chaitra कृष्ण
सबसे अन्धेरी रात – आत्मनिरीक्षण और पूर्वजों से जुड़ने के लिए आदर्श।
chaitra कृष्ण
अक्षय तृतीया हिन्दू कैलेंडर के सबसे शुभ दिनों में से एक है – प्रत्येक क्षण मुहूर्त है, अलग शुभ मुहूर्त की आवश्यकता नहीं। यह स्वयंसिद्ध मुहूर्त दिवस है।
vaishakha शुक्ल
ई भगवान विष्णु केर अमर (चिरंजीवी) योद्धा-ऋषि अवतारक सम्मान करैत अछि जे न्याय केर पक्षधर छलाह। मानल जाइत अछि जे ओ अखनो महेन्द्रगिरि पर्वत पर निवास करैत छथि आ भगवान विष्णु केर अंतिम अवतार कल्कि केर युद्ध गुरुक रूप मे कार्य करताह।
vaishakha शुक्ल
कोनो हिन्दू अनुष्ठान मे गणेशक आह्वान सबसँ पहिने कयल जाइत अछि। मासिक चतुर्थीक पूजा सँ बाधासभक निरन्तर निवारण तथा बुद्धि, सफलता आ नव आरम्भक लेल आशीर्वाद सुनिश्चित होइत अछि।
vaishakha शुक्ल
vaishakha शुक्ल
vaishakha शुक्ल
ई पर्व सत्यक असत्य पर विजयक उत्सव मनाबैत अछि – मुरुगन द्वारा असुर सेनाक पराजय। भक्त लोकनि साहस, नकारात्मकता सँ रक्षा आ व्यक्तिगत बाधासभ पर विजय प्राप्त करबाक लेल प्रार्थना करैत छथि।
vaishakha शुक्ल
vaishakha शुक्ल
vaishakha शुक्ल
भगवतीक प्रति भक्ति केर मासिक नवीकरण। दुर्गा शक्ति केर संरक्षक, उग्र रूपक प्रतिनिधित्व करैत छथि। नियमित अष्टमी पूजा भय दूर करैत, साहस प्रदान करैत, आ शत्रु सँ रक्षा करैत मानल जाइत अछि।
vaishakha शुक्ल
vaishakha शुक्ल
vaishakha शुक्ल
vaishakha शुक्ल
Sun enters Taurus – Vrishabha Sankranti.
शुक्ल
vaishakha शुक्ल
मोह का नाश, स्पष्टता और आध्यात्मिक प्रगति
vaishakha शुक्ल
त्रयोदशी और संध्याकाल का संयोग शिव के लिए परम पवित्र है। शनिवार का प्रदोष (शनि प्रदोष) शनि पीड़ा निवारण में विशेष शक्तिशाली है।
vaishakha शुक्ल
ई भगवान विष्णु केर उग्र अवतारक उत्सव मनाबैत अछि, जे ई सिद्ध केलनि जे ईश्वरीय रक्षा भक्तसभ धरि सब ठाम पहुँचैत अछि। ई अत्याचार पर आस्थाक विजयक प्रतीक अछि आ ई विश्वास दिलाबैत अछि जे कोनो वरदान धर्म सँ पैघ नहि भऽ सकैत अछि।
vaishakha शुक्ल
बुद्ध पूर्णिमा ज्ञान, करुणा और मध्यम मार्ग का परम प्रतीक है। यह स्मरण कराती है कि सम्यक् प्रयास से बोधि प्राप्त हो सकती है।
vaishakha शुक्ल
vaishakha शुक्ल
vaishakha शुक्ल
प्रत्येक पूर्णिमा का हिन्दू महीने के आधार पर विशेष नाम और महत्व है। पूर्णिमा प्रार्थना, ध्यान और दान के प्रभावों को बढ़ाती है।
vaishakha शुक्ल
विघ्नहर्ता की मासिक पूजा। कृष्ण चतुर्थी (ढलते चन्द्र का 4वाँ दिन) पर।
vaishakha कृष्ण
कृष्णक प्रति मासिक भक्ति भक्तकेँ हुनकर प्रेम, कर्तव्य आ समर्पणक शिक्षासँ जोड़ि रखैत अछि। कृष्ण अष्टमी विशेष रूपसँ हुनका लेल शक्तिशाली होइत अछि जे दिव्य कृपा आ दैनिक जीवनमे आनंदक खोजमे छथि।
vaishakha कृष्ण
अपरिमित पुण्य, अपयश दूर करती है
vaishakha कृष्ण
त्रयोदशी और संध्याकाल का संयोग शिव के लिए परम पवित्र है। शनिवार का प्रदोष (शनि प्रदोष) शनि पीड़ा निवारण में विशेष शक्तिशाली है।
vaishakha कृष्ण
vaishakha कृष्ण
vaishakha कृष्ण
सबसे अन्धेरी रात – आत्मनिरीक्षण और पूर्वजों से जुड़ने के लिए आदर्श।
vaishakha कृष्ण
jyeshtha शुक्ल
कोनो हिन्दू अनुष्ठान मे गणेशक आह्वान सबसँ पहिने कयल जाइत अछि। मासिक चतुर्थीक पूजा सँ बाधासभक निरन्तर निवारण तथा बुद्धि, सफलता आ नव आरम्भक लेल आशीर्वाद सुनिश्चित होइत अछि।
jyeshtha शुक्ल
jyeshtha शुक्ल
ई पर्व सत्यक असत्य पर विजयक उत्सव मनाबैत अछि – मुरुगन द्वारा असुर सेनाक पराजय। भक्त लोकनि साहस, नकारात्मकता सँ रक्षा आ व्यक्तिगत बाधासभ पर विजय प्राप्त करबाक लेल प्रार्थना करैत छथि।
jyeshtha शुक्ल
jyeshtha शुक्ल
भगवतीक प्रति भक्ति केर मासिक नवीकरण। दुर्गा शक्ति केर संरक्षक, उग्र रूपक प्रतिनिधित्व करैत छथि। नियमित अष्टमी पूजा भय दूर करैत, साहस प्रदान करैत, आ शत्रु सँ रक्षा करैत मानल जाइत अछि।
jyeshtha शुक्ल
गंगा दशहरा दस प्रकार के पापों का नाश करती है। इस दिन गंगा स्नान सभी तीर्थों के स्नान के समान माना जाता है। गंगा की पवित्रता और मोक्षदायिनी शक्ति का उत्सव है।
jyeshtha शुक्ल
jyeshtha शुक्ल
निर्जला एकादशी भारतीय ग्रीष्म ऋतु (ज्येष्ठ मास, मई-जून) केर चरम केँ चिह्नित करैत अछि जखन सूर्य सभसँ तीव्र होइत अछि — आ पूर्ण निर्जला व्रत हिन्दू वर्ष मे सभसँ कठिन तपस्या अछि। पद्म पुराण, ब्रह्म वैवर्त पुराण, आ महाभारत सभ एहि केँ सर्वोच्च एकादशीक रूप मे प्रशंसा करैत अछि: एकटा निष्ठापूर्वक पालन सँ वर्षक सभ २४ एकादशीक संयुक्त पुण्य प्राप्त होइत अछि। परम्परागत मान्यता अछि जे जे भक्त सभ २४ व्रत नहि राखि सकैत छथि ओ एहि एकटा व्रत सँ ओकर स्थान लऽ सकैत छथि आ वैकुण्ठ प्राप्त कऽ सकैत छथि — ठीक ओहि वरदानक समान जे भीम चाहैत छलाह। व्यक्तिगत पुण्यक अतिरिक्त, ई दिन हिन्दू धर्मक सभसँ सुन्दर ग्रीष्मकालीन प्रथा मे सँ एक केँ संस्थागत करैत अछि: जल-दान, जलक दान। भक्त लोकनि कलश-स्टेशन स्थापित करैत छथि, ठंढा जल आ ईखक रस वितरित करैत छथि, आ प्यासल लोक केँ सप्ताह भरि भोजन कराबैत छथि, व्यक्तिगत तपस्या केँ सामुदायिक करुणा मे परिवर्तित करैत छथि। एहि कारण सँ निर्जला केँ प्रायः "एकादशीक राजा" कहल जाइत अछि — मात्र पुण्यक गणनाक लेल नहि, बल्कि एहि लेल जे ई हिन्दू व्रतक सम्पूर्ण चाप केँ समाहित करैत अछि: स्वैच्छिक कष्ट, दिव्य हस्तक्षेप, धन्य पुरस्कार, आ समुदायक संग साझा कएल गेल पुण्य।
jyeshtha शुक्ल
Sun enters Gemini – Mithuna Sankranti.
शुक्ल
Sun enters Gemini – Raja Parba (Mithuna Sankranti).
शुक्ल
त्रयोदशी और संध्याकाल का संयोग शिव के लिए परम पवित्र है। शनिवार का प्रदोष (शनि प्रदोष) शनि पीड़ा निवारण में विशेष शक्तिशाली है।
jyeshtha शुक्ल
एकटा समर्पित पत्नीक प्रेमकेँ शक्ति केँ मनाओल जाइत अछि। बरगदक गाछ अमरताक प्रतीक अछि (ई कहियो सचमुच मरैत नहि अछि)। सावित्रीक कथा ई सिखबैत अछि जे साँच भक्ति आ ज्ञान मृत्युकेँ सेहो जीत सकैत अछि।
jyeshtha शुक्ल
jyeshtha शुक्ल
jyeshtha शुक्ल
jyeshtha शुक्ल
jyeshtha कृष्ण
विघ्नहर्ता की मासिक पूजा। कृष्ण चतुर्थी (ढलते चन्द्र का 4वाँ दिन) पर।
jyeshtha कृष्ण
कृष्णक प्रति मासिक भक्ति भक्तकेँ हुनकर प्रेम, कर्तव्य आ समर्पणक शिक्षासँ जोड़ि रखैत अछि। कृष्ण अष्टमी विशेष रूपसँ हुनका लेल शक्तिशाली होइत अछि जे दिव्य कृपा आ दैनिक जीवनमे आनंदक खोजमे छथि।
jyeshtha कृष्ण
रोगों से मुक्ति, शापों को हटाती है, तीर्थस्थलों पर दान से अधिक पुण्यदायी
jyeshtha कृष्ण
त्रयोदशी और संध्याकाल का संयोग शिव के लिए परम पवित्र है। शनिवार का प्रदोष (शनि प्रदोष) शनि पीड़ा निवारण में विशेष शक्तिशाली है।
jyeshtha कृष्ण
jyeshtha कृष्ण
ashadha शुक्ल
jyeshtha कृष्ण
ashadha शुक्ल
सबसे अन्धेरी रात – आत्मनिरीक्षण और पूर्वजों से जुड़ने के लिए आदर्श।
jyeshtha कृष्ण
ई भारतक सभसँ पैघ उत्सवसभ मे सँ एक अछि, जे भगवानक समक्ष समानताक प्रतीक अछि – भगवान जगन्नाथ गर्भगृह सँ बाहर अबैत छथि ताकि सब लोक दर्शन कऽ सकय। रथक रस्सी केँ एक क्षणक लेल सेहो खींचब अत्यंत पुण्यकारी मानल जाइत अछि।
ashadha शुक्ल
कोनो हिन्दू अनुष्ठान मे गणेशक आह्वान सबसँ पहिने कयल जाइत अछि। मासिक चतुर्थीक पूजा सँ बाधासभक निरन्तर निवारण तथा बुद्धि, सफलता आ नव आरम्भक लेल आशीर्वाद सुनिश्चित होइत अछि।
ashadha शुक्ल
ई पर्व सत्यक असत्य पर विजयक उत्सव मनाबैत अछि – मुरुगन द्वारा असुर सेनाक पराजय। भक्त लोकनि साहस, नकारात्मकता सँ रक्षा आ व्यक्तिगत बाधासभ पर विजय प्राप्त करबाक लेल प्रार्थना करैत छथि।
ashadha शुक्ल
भगवतीक प्रति भक्ति केर मासिक नवीकरण। दुर्गा शक्ति केर संरक्षक, उग्र रूपक प्रतिनिधित्व करैत छथि। नियमित अष्टमी पूजा भय दूर करैत, साहस प्रदान करैत, आ शत्रु सँ रक्षा करैत मानल जाइत अछि।
ashadha शुक्ल
ashadha शुक्ल
ashadha शुक्ल
चातुर्मास का आरम्भ। आध्यात्मिक साधना और दान के लिए अत्यन्त शुभ।
ashadha शुक्ल
त्रयोदशी और संध्याकाल का संयोग शिव के लिए परम पवित्र है। शनिवार का प्रदोष (शनि प्रदोष) शनि पीड़ा निवारण में विशेष शक्तिशाली है।
ashadha शुक्ल
ashadha शुक्ल
Sun enters Cancer – marks the southward journey (Dakshinayana).
शुक्ल
आषाढ़ की पूर्णिमा गुरु तत्व को समर्पित है – अन्धकार का निवारक (गु = अन्धकार, रु = निवारक)।
ashadha शुक्ल
ashadha शुक्ल
ashadha शुक्ल
प्रत्येक पूर्णिमा का हिन्दू महीने के आधार पर विशेष नाम और महत्व है। पूर्णिमा प्रार्थना, ध्यान और दान के प्रभावों को बढ़ाती है।
ashadha शुक्ल
ashadha कृष्ण
ashadha कृष्ण
विघ्नहर्ता की मासिक पूजा। कृष्ण चतुर्थी (ढलते चन्द्र का 4वाँ दिन) पर।
ashadha कृष्ण
ashadha कृष्ण
ashadha कृष्ण
कृष्णक प्रति मासिक भक्ति भक्तकेँ हुनकर प्रेम, कर्तव्य आ समर्पणक शिक्षासँ जोड़ि रखैत अछि। कृष्ण अष्टमी विशेष रूपसँ हुनका लेल शक्तिशाली होइत अछि जे दिव्य कृपा आ दैनिक जीवनमे आनंदक खोजमे छथि।
ashadha कृष्ण
इस दिन तुलसी अर्पण करने से पुण्य अनन्तगुना बढ़ता है। मृत्यु का भय दूर होता है।
ashadha कृष्ण
ashadha कृष्ण
त्रयोदशी और संध्याकाल का संयोग शिव के लिए परम पवित्र है। शनिवार का प्रदोष (शनि प्रदोष) शनि पीड़ा निवारण में विशेष शक्तिशाली है।
ashadha कृष्ण
ashadha कृष्ण
ashadha कृष्ण
ashadha कृष्ण
सबसे अन्धेरी रात – आत्मनिरीक्षण और पूर्वजों से जुड़ने के लिए आदर्श।
ashadha कृष्ण
हरियाली तीज दाम्पत्य सुख, भक्ति और पति-पत्नी के बन्धन का उत्सव है। उत्तर भारत की विवाहित महिलाओं का सबसे महत्त्वपूर्ण त्योहार। हरा रंग उर्वरता और सावन की खुशी का प्रतीक है।
shravana शुक्ल
shravana शुक्ल
shravana शुक्ल
कोनो हिन्दू अनुष्ठान मे गणेशक आह्वान सबसँ पहिने कयल जाइत अछि। मासिक चतुर्थीक पूजा सँ बाधासभक निरन्तर निवारण तथा बुद्धि, सफलता आ नव आरम्भक लेल आशीर्वाद सुनिश्चित होइत अछि।
shravana शुक्ल
नाग पञ्चमी नागों को पृथ्वी के रक्षक और पाताल के अधिपति के रूप में सम्मानित करती है। नाग कुण्डलिनी शक्ति और सन्तान का प्रतीक हैं। कालसर्प दोष निवारण में सहायक।
shravana शुक्ल
shravana शुक्ल
ई पर्व सत्यक असत्य पर विजयक उत्सव मनाबैत अछि – मुरुगन द्वारा असुर सेनाक पराजय। भक्त लोकनि साहस, नकारात्मकता सँ रक्षा आ व्यक्तिगत बाधासभ पर विजय प्राप्त करबाक लेल प्रार्थना करैत छथि।
shravana शुक्ल
भगवतीक प्रति भक्ति केर मासिक नवीकरण। दुर्गा शक्ति केर संरक्षक, उग्र रूपक प्रतिनिधित्व करैत छथि। नियमित अष्टमी पूजा भय दूर करैत, साहस प्रदान करैत, आ शत्रु सँ रक्षा करैत मानल जाइत अछि।
shravana शुक्ल
shravana शुक्ल
वर्षक दूटा पुत्रदा एकादशीमे सँ ई दोसर अछि (पहिली पौष शुक्ल होइत अछि)। दक्षिण भारतीय वैष्णव परम्परासभ एहि श्रावण मासक पालनपर बेसी जोर दैत छथि; उत्तर भारतीय स्मार्त परम्परासभ पौष मासपर जोर दैत छथि। अनेक दम्पति पूर्ण लाभक लेल दुनू व्रत करैत छथि। शाब्दिक संतानसँ बेसी गहीर शिक्षा ई अछि: "आध्यात्मिक संतान" — शिष्य, विद्यार्थी, आ अगला पीढ़ी जेकरा पोसल जाइत अछि — कऽ पोषण सेहो ओतबे मान्य अछि जतेक कि माँगि गेल वरदान।
shravana शुक्ल
त्रयोदशी और संध्याकाल का संयोग शिव के लिए परम पवित्र है। शनिवार का प्रदोष (शनि प्रदोष) शनि पीड़ा निवारण में विशेष शक्तिशाली है।
shravana शुक्ल
दक्षिण भारतमे विवाहित महिलासभक लेल ई सबसँ महत्वपूर्ण व्रतक एक अछि। वरद लक्ष्मीक पूजासँ लक्ष्मीक आठो रूपक संयुक्त आशीर्वाद प्राप्त होइत अछि – धन, साहस, ज्ञान, संतान, विजय, पराक्रम, भोजन आ आनंद।
shravana शुक्ल
भाई-बहन के पवित्र बन्धन और रक्षा के कर्तव्य का उत्सव।
shravana शुक्ल
shravana शुक्ल
Sun enters Leo – Simha Sankranti.
शुक्ल
विघ्नहर्ता की मासिक पूजा। कृष्ण चतुर्थी (ढलते चन्द्र का 4वाँ दिन) पर।
shravana कृष्ण
भगवद्गीता के वक्ता परमात्मा का जन्म। कृष्ण दिव्य प्रेम, ब्रह्माण्डीय ज्ञान और कर्मयोग के प्रतीक हैं।
shravana कृष्ण
shravana कृष्ण
कृष्णक प्रति मासिक भक्ति भक्तकेँ हुनकर प्रेम, कर्तव्य आ समर्पणक शिक्षासँ जोड़ि रखैत अछि। कृष्ण अष्टमी विशेष रूपसँ हुनका लेल शक्तिशाली होइत अछि जे दिव्य कृपा आ दैनिक जीवनमे आनंदक खोजमे छथि।
shravana कृष्ण
संचित कष्टों का नाश, खोया सम्मान और भाग्य वापस
shravana कृष्ण
त्रयोदशी और संध्याकाल का संयोग शिव के लिए परम पवित्र है। शनिवार का प्रदोष (शनि प्रदोष) शनि पीड़ा निवारण में विशेष शक्तिशाली है।
shravana कृष्ण
shravana कृष्ण
shravana कृष्ण
shravana कृष्ण
सबसे अन्धेरी रात – आत्मनिरीक्षण और पूर्वजों से जुड़ने के लिए आदर्श।
shravana कृष्ण
हरतालिका तीज हिन्दू महिलाओं का सबसे महत्वपूर्ण व्रतों में से एक है। यह पार्वती की शिव के प्रति अटल भक्ति और स्त्री संकल्प की शक्ति का उत्सव है।
bhadrapada शुक्ल
bhadrapada शुक्ल
नई शुरुआत के देवता, विघ्नहर्ता। सभी कार्यों से पहले पूजित। ज्ञान, समृद्धि और भक्ति की शक्ति का उत्सव।
bhadrapada शुक्ल
bhadrapada शुक्ल
bhadrapada शुक्ल
कोनो हिन्दू अनुष्ठान मे गणेशक आह्वान सबसँ पहिने कयल जाइत अछि। मासिक चतुर्थीक पूजा सँ बाधासभक निरन्तर निवारण तथा बुद्धि, सफलता आ नव आरम्भक लेल आशीर्वाद सुनिश्चित होइत अछि।
bhadrapada शुक्ल
bhadrapada शुक्ल
ई पर्व सत्यक असत्य पर विजयक उत्सव मनाबैत अछि – मुरुगन द्वारा असुर सेनाक पराजय। भक्त लोकनि साहस, नकारात्मकता सँ रक्षा आ व्यक्तिगत बाधासभ पर विजय प्राप्त करबाक लेल प्रार्थना करैत छथि।
bhadrapada शुक्ल
bhadrapada शुक्ल
bhadrapada शुक्ल
भगवतीक प्रति भक्ति केर मासिक नवीकरण। दुर्गा शक्ति केर संरक्षक, उग्र रूपक प्रतिनिधित्व करैत छथि। नियमित अष्टमी पूजा भय दूर करैत, साहस प्रदान करैत, आ शत्रु सँ रक्षा करैत मानल जाइत अछि।
bhadrapada शुक्ल
चातुर्मास व्रतों का पुण्य प्राप्त होता है।
bhadrapada शुक्ल
राजा महाबलिक वार्षिक घर वापसीक उत्सव मनाओल जाइत अछि। ई केरलक सभसँ महत्वपूर्ण पर्व अछि, जे समृद्धि, समानता, आ महाबलिक शासनक स्वर्ण युगक प्रतीक अछि जखन कोनो गरीबी वा भेदभाव नहि छल।
bhadrapada शुक्ल
bhadrapada शुक्ल
bhadrapada शुक्ल
त्रयोदशी और संध्याकाल का संयोग शिव के लिए परम पवित्र है। शनिवार का प्रदोष (शनि प्रदोष) शनि पीड़ा निवारण में विशेष शक्तिशाली है।
bhadrapada शुक्ल
अनन्त चतुर्दशी विष्णु की अनन्त और अविनाशी प्रकृति का प्रतीक है। 14 गाँठें 14 लोकों का प्रतीक हैं। गणेश विसर्जन अनासक्ति और आगमन-प्रस्थान चक्र की शिक्षा देता है।
bhadrapada शुक्ल
bhadrapada शुक्ल
bhadrapada शुक्ल
bhadrapada कृष्ण
Sun enters Virgo – Kanya Sankranti.
शुक्ल
bhadrapada कृष्ण
विघ्नहर्ता की मासिक पूजा। कृष्ण चतुर्थी (ढलते चन्द्र का 4वाँ दिन) पर।
bhadrapada कृष्ण
bhadrapada कृष्ण
कृष्णक प्रति मासिक भक्ति भक्तकेँ हुनकर प्रेम, कर्तव्य आ समर्पणक शिक्षासँ जोड़ि रखैत अछि। कृष्ण अष्टमी विशेष रूपसँ हुनका लेल शक्तिशाली होइत अछि जे दिव्य कृपा आ दैनिक जीवनमे आनंदक खोजमे छथि।
bhadrapada कृष्ण
bhadrapada कृष्ण
पूर्वजों को कष्ट से मुक्ति। दिवंगत आत्माओं को शान्ति (पितृ मुक्ति)।
bhadrapada कृष्ण
त्रयोदशी और संध्याकाल का संयोग शिव के लिए परम पवित्र है। शनिवार का प्रदोष (शनि प्रदोष) शनि पीड़ा निवारण में विशेष शक्तिशाली है।
bhadrapada कृष्ण
bhadrapada कृष्ण
दैवी स्त्री शक्ति (शक्ति) की बुराई पर विजय। नौ रूपों में से प्रत्येक स्त्री ऊर्जा के एक भिन्न पहलू का प्रतिनिधित्व करता है।
ashwina शुक्ल
bhadrapada कृष्ण
ashwina शुक्ल
सबसे अन्धेरी रात – आत्मनिरीक्षण और पूर्वजों से जुड़ने के लिए आदर्श।
bhadrapada कृष्ण
ashwina शुक्ल
ashwina शुक्ल
ashwina शुक्ल
ashwina शुक्ल
कोनो हिन्दू अनुष्ठान मे गणेशक आह्वान सबसँ पहिने कयल जाइत अछि। मासिक चतुर्थीक पूजा सँ बाधासभक निरन्तर निवारण तथा बुद्धि, सफलता आ नव आरम्भक लेल आशीर्वाद सुनिश्चित होइत अछि।
ashwina शुक्ल
ashwina शुक्ल
ashwina शुक्ल
ashwina शुक्ल
ई पर्व सत्यक असत्य पर विजयक उत्सव मनाबैत अछि – मुरुगन द्वारा असुर सेनाक पराजय। भक्त लोकनि साहस, नकारात्मकता सँ रक्षा आ व्यक्तिगत बाधासभ पर विजय प्राप्त करबाक लेल प्रार्थना करैत छथि।
ashwina शुक्ल
ashwina शुक्ल
ashwina शुक्ल
दुर्गाष्टमी नवरात्रि का सबसे शक्तिशाली दिन माना जाता है। अष्टमी-नवमी सन्धि पूजा सम्पूर्ण उत्सव का सबसे पवित्र अनुष्ठान है।
ashwina शुक्ल
ashwina शुक्ल
भगवतीक प्रति भक्ति केर मासिक नवीकरण। दुर्गा शक्ति केर संरक्षक, उग्र रूपक प्रतिनिधित्व करैत छथि। नियमित अष्टमी पूजा भय दूर करैत, साहस प्रदान करैत, आ शत्रु सँ रक्षा करैत मानल जाइत अछि।
ashwina शुक्ल
महानवमी नौ दिनों की देवी आराधना की पूर्णाहुति और दैवी स्त्री शक्ति की बुराई पर अन्तिम विजय का प्रतीक है।
ashwina शुक्ल
विजयादशमी – "विजय का दसवाँ दिन"। नए कार्य आरम्भ करने का सर्वाधिक शुभ दिन। रावण दहन दस दुर्गुणों के नाश का प्रतीक है।
ashwina शुक्ल
ashwina शुक्ल
ashwina शुक्ल
ashwina शुक्ल
ashwina शुक्ल
ashwina शुक्ल
पापों को नियन्त्रित और नष्ट करती है। मृत्यु के बाद वैकुण्ठ प्रदान करती है।
ashwina शुक्ल
त्रयोदशी और संध्याकाल का संयोग शिव के लिए परम पवित्र है। शनिवार का प्रदोष (शनि प्रदोष) शनि पीड़ा निवारण में विशेष शक्तिशाली है।
ashwina शुक्ल
ई वर्षक सबसँ चमकीला आ पूर्ण पूर्णिमा होइत अछि। चन्द्रमा पृथ्वीक सबसँ नजदीक होइत अछि आ एकर किरणसभकेँ आरोग्यदायक मानल जाइत अछि। ई वर्षा ऋतुक समाप्ति आ शीतल, स्वच्छ शरद ऋतुक शुरुआतक प्रतीक अछि।
ashwina शुक्ल
ashwina शुक्ल
ashwina शुक्ल
ashwina शुक्ल
ashwina शुक्ल
ashwina कृष्ण
ashwina कृष्ण
Sun enters Libra – Tula Sankranti.
शुक्ल
विघ्नहर्ता की मासिक पूजा। कृष्ण चतुर्थी (ढलते चन्द्र का 4वाँ दिन) पर।
ashwina कृष्ण
ashwina कृष्ण
कृष्णक प्रति मासिक भक्ति भक्तकेँ हुनकर प्रेम, कर्तव्य आ समर्पणक शिक्षासँ जोड़ि रखैत अछि। कृष्ण अष्टमी विशेष रूपसँ हुनका लेल शक्तिशाली होइत अछि जे दिव्य कृपा आ दैनिक जीवनमे आनंदक खोजमे छथि।
ashwina कृष्ण
लक्ष्मी का आशीर्वाद, दरिद्रता दूर करती है। सभी तीर्थयात्राओं से अधिक पुण्यदायी।
ashwina कृष्ण
धनतेरस दीपावली के पाँच दिवसीय उत्सव का पहला दिन है। "धन" का अर्थ सम्पत्ति और "तेरस" त्रयोदशी। यह स्वास्थ्य, धन और समृद्धि का उत्सव है।
ashwina कृष्ण
ashwina कृष्ण
ashwina कृष्ण
त्रयोदशी और संध्याकाल का संयोग शिव के लिए परम पवित्र है। शनिवार का प्रदोष (शनि प्रदोष) शनि पीड़ा निवारण में विशेष शक्तिशाली है।
ashwina कृष्ण
नरक चतुर्दशी बुराई के नाश और पीड़ितों की मुक्ति का प्रतीक है। भोर का स्नान पापों को धोता है और चौदह दीप चौदह लोकों को प्रकाशित करते हैं। यह दीपावली से पूर्व शुद्धिकरण का दिन है।
ashwina कृष्ण
ashwina कृष्ण
ashwina कृष्ण
प्रकाश का त्योहार – अन्धकार पर प्रकाश, अज्ञान पर ज्ञान, बुराई पर अच्छाई की विजय। सबसे अन्धेरी रात (अमावस्या) को प्रकाशित किया जाता है।
ashwina कृष्ण
ashwina कृष्ण
ashwina कृष्ण
ashwina कृष्ण
सबसे अन्धेरी रात – आत्मनिरीक्षण और पूर्वजों से जुड़ने के लिए आदर्श।
ashwina कृष्ण
गोवर्धन पूजा प्रकृति-भक्ति और आत्मनिर्भरता की शिक्षा देती है। कृष्ण ने दिखाया कि समुदाय का पोषण करने वाला पर्वत और गौएँ पूजा के योग्य हैं। यह दीपावली का चौथा दिन है।
kartika शुक्ल
kartika शुक्ल
kartika शुक्ल
kartika शुक्ल
kartika शुक्ल
kartika शुक्ल
भाई दूज भाई-बहन के पवित्र बन्धन का उत्सव है। यह दीपावली का पाँचवाँ और अन्तिम दिन है। बहन का आशीर्वाद यम को भी दूर रखने में समर्थ माना जाता है।
kartika शुक्ल
kartika शुक्ल
kartika शुक्ल
कोनो हिन्दू अनुष्ठान मे गणेशक आह्वान सबसँ पहिने कयल जाइत अछि। मासिक चतुर्थीक पूजा सँ बाधासभक निरन्तर निवारण तथा बुद्धि, सफलता आ नव आरम्भक लेल आशीर्वाद सुनिश्चित होइत अछि।
kartika शुक्ल
kartika शुक्ल
kartika शुक्ल
छठ एकमात्र वैदिक उत्सव अछि जे सूर्य कऽ जीवनदायी शक्ति कऽ उपासना केँ समर्पित अछि। ई बिहार, झारखण्ड आ पूर्वी उत्तर प्रदेश कऽ सबसँ महत्वपूर्ण त्योहार अछि।
kartika शुक्ल
kartika शुक्ल
ई पर्व सत्यक असत्य पर विजयक उत्सव मनाबैत अछि – मुरुगन द्वारा असुर सेनाक पराजय। भक्त लोकनि साहस, नकारात्मकता सँ रक्षा आ व्यक्तिगत बाधासभ पर विजय प्राप्त करबाक लेल प्रार्थना करैत छथि।
kartika शुक्ल
kartika शुक्ल
kartika शुक्ल
भगवतीक प्रति भक्ति केर मासिक नवीकरण। दुर्गा शक्ति केर संरक्षक, उग्र रूपक प्रतिनिधित्व करैत छथि। नियमित अष्टमी पूजा भय दूर करैत, साहस प्रदान करैत, आ शत्रु सँ रक्षा करैत मानल जाइत अछि।
kartika शुक्ल
kartika शुक्ल
kartika शुक्ल
चातुर्मास का अन्त। विवाह ऋतु का आरम्भ। अत्यन्त शुभ।
kartika शुक्ल
तुलसी विवाह चार माह के चातुर्मास काल का अन्त और हिन्दू विवाह तथा शुभ कार्यों के पुनः आरम्भ का संकेत है। यह तुलसी (भक्ति) और विष्णु (दिव्यता) के शाश्वत बन्धन का प्रतीक है।
kartika शुक्ल
त्रयोदशी और संध्याकाल का संयोग शिव के लिए परम पवित्र है। शनिवार का प्रदोष (शनि प्रदोष) शनि पीड़ा निवारण में विशेष शक्तिशाली है।
kartika शुक्ल
kartika शुक्ल
कार्तिक पूर्णिमा वर्ष की सबसे पवित्र पूर्णिमा मानी जाती है। इस दिन गंगा स्नान सौ अश्वमेध यज्ञों का पुण्य देता है। पवित्र कार्तिक मास की पूर्णाहुति और देवताओं का दीपोत्सव।
kartika शुक्ल
kartika शुक्ल
गुरु नानक जयन्ती सिख कैलेण्डर कऽ पवित्रतम दिन। संस्थापक गुरु नानक कऽ "ना कोई हिन्दू ना कोई मुसलमान" कऽ पहिल वचन लङ्गर कऽ रूप मे आइ धरि जीवित।
kartika शुक्ल
kartika शुक्ल
प्रत्येक पूर्णिमा का हिन्दू महीने के आधार पर विशेष नाम और महत्व है। पूर्णिमा प्रार्थना, ध्यान और दान के प्रभावों को बढ़ाती है।
kartika शुक्ल
Sun enters Scorpio – Vrischika Sankranti.
शुक्ल
विघ्नहर्ता की मासिक पूजा। कृष्ण चतुर्थी (ढलते चन्द्र का 4वाँ दिन) पर।
kartika कृष्ण
kartika कृष्ण
kartika कृष्ण
कृष्णक प्रति मासिक भक्ति भक्तकेँ हुनकर प्रेम, कर्तव्य आ समर्पणक शिक्षासँ जोड़ि रखैत अछि। कृष्ण अष्टमी विशेष रूपसँ हुनका लेल शक्तिशाली होइत अछि जे दिव्य कृपा आ दैनिक जीवनमे आनंदक खोजमे छथि।
kartika कृष्ण
सभी एकादशियों की "माता"। इसका पालन सभी एकादशी व्रतों का आधार है।
kartika कृष्ण
त्रयोदशी और संध्याकाल का संयोग शिव के लिए परम पवित्र है। शनिवार का प्रदोष (शनि प्रदोष) शनि पीड़ा निवारण में विशेष शक्तिशाली है।
kartika कृष्ण
kartika कृष्ण
kartika कृष्ण
सबसे अन्धेरी रात – आत्मनिरीक्षण और पूर्वजों से जुड़ने के लिए आदर्श।
kartika कृष्ण
margashirsha शुक्ल
कोनो हिन्दू अनुष्ठान मे गणेशक आह्वान सबसँ पहिने कयल जाइत अछि। मासिक चतुर्थीक पूजा सँ बाधासभक निरन्तर निवारण तथा बुद्धि, सफलता आ नव आरम्भक लेल आशीर्वाद सुनिश्चित होइत अछि।
margashirsha शुक्ल
margashirsha शुक्ल
margashirsha शुक्ल
ई पर्व सत्यक असत्य पर विजयक उत्सव मनाबैत अछि – मुरुगन द्वारा असुर सेनाक पराजय। भक्त लोकनि साहस, नकारात्मकता सँ रक्षा आ व्यक्तिगत बाधासभ पर विजय प्राप्त करबाक लेल प्रार्थना करैत छथि।
margashirsha शुक्ल
भगवतीक प्रति भक्ति केर मासिक नवीकरण। दुर्गा शक्ति केर संरक्षक, उग्र रूपक प्रतिनिधित्व करैत छथि। नियमित अष्टमी पूजा भय दूर करैत, साहस प्रदान करैत, आ शत्रु सँ रक्षा करैत मानल जाइत अछि।
margashirsha शुक्ल
margashirsha शुक्ल
मोक्ष (पुनर्जन्म से मुक्ति) प्रदान करती है। इस दिन गीता पाठ सर्वोत्तम पुण्यदायी है।
margashirsha शुक्ल
margashirsha शुक्ल
त्रयोदशी और संध्याकाल का संयोग शिव के लिए परम पवित्र है। शनिवार का प्रदोष (शनि प्रदोष) शनि पीड़ा निवारण में विशेष शक्तिशाली है।
margashirsha शुक्ल
margashirsha शुक्ल
margashirsha शुक्ल
margashirsha शुक्ल
Sun enters Sagittarius – Dhanu Sankranti.
शुक्ल
विघ्नहर्ता की मासिक पूजा। कृष्ण चतुर्थी (ढलते चन्द्र का 4वाँ दिन) पर।
margashirsha कृष्ण
margashirsha कृष्ण
कृष्णक प्रति मासिक भक्ति भक्तकेँ हुनकर प्रेम, कर्तव्य आ समर्पणक शिक्षासँ जोड़ि रखैत अछि। कृष्ण अष्टमी विशेष रूपसँ हुनका लेल शक्तिशाली होइत अछि जे दिव्य कृपा आ दैनिक जीवनमे आनंदक खोजमे छथि।
margashirsha कृष्ण
सभी प्रयासों में सफलता (सफला) प्रदान करती है।
margashirsha कृष्ण
त्रयोदशी और संध्याकाल का संयोग शिव के लिए परम पवित्र है। शनिवार का प्रदोष (शनि प्रदोष) शनि पीड़ा निवारण में विशेष शक्तिशाली है।
margashirsha कृष्ण
margashirsha कृष्ण
margashirsha कृष्ण
सबसे अन्धेरी रात – आत्मनिरीक्षण और पूर्वजों से जुड़ने के लिए आदर्श।
margashirsha कृष्ण
pausha शुक्ल
कोनो हिन्दू अनुष्ठान मे गणेशक आह्वान सबसँ पहिने कयल जाइत अछि। मासिक चतुर्थीक पूजा सँ बाधासभक निरन्तर निवारण तथा बुद्धि, सफलता आ नव आरम्भक लेल आशीर्वाद सुनिश्चित होइत अछि।
pausha शुक्ल
Dates computed for Ujjain (23.18°N, 75.79°E) – the traditional Hindu prime meridian. Tithi boundaries are within ±30 minutes for all Indian cities.