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बैसाखी प्रत्येक वर्ष १३ वा १४ अप्रैल कऽ पड़ैत अछि, जे विक्रम संवत् पंचांगमे वैशाख मासक पहिल दिनक सूचक अछि। मुख्य पूजा सूर्योदयक समय कएल जाइत अछि। सिख परम्परामे, ई दिन १६९९ ई. मे आनंदपुर साहिबमे गुरु गोबिंद सिंह जी द्वारा खालसा पंथक स्थापनाक स्मरण कराबैत अछि। उत्सव भोरमे शुरू होइत अछि आ नगर कीर्तन जुलूसक संग दिनभरि चलैत रहैत अछि।
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भोरसँ पहिने उठू आ पवित्र स्नान करू। नव वा साफ उज्ज्वल रंगक वस्त्र पहिरू – पंजाबी पुरुष सामान्यतः रंगीन पगड़ीक संग कुर्ता-पायजामा पहिरैत छथि, महिलासभ उज्ज्वल सलवार-कमीज वा फुलकारी दुपट्टा पहिरैत छथि। घरक प्रवेश द्वारकेँ रङ्गिोलीक आकृतिसँ साफ करू आ सजाऊ। फसलक प्रतीकक रूपमे द्वार पर गेहूंक बाली आ गेंदाक माला राखू।
सूर्योदयक समय पूब दिस मुँह कए दुनू हाथसँ सूर्यकेँ जल (अर्घ्य) अर्पित करू। एकटा साफ वेदी पर आमक पात आ नारियलक संग एकटा कलश राखू। घीक दीप आ धूप जराऊ। अक्षत, कुमकुम, फूल आ फल चढ़ाऊ। सूर्य नमस्कार मन्त्र आ गायत्री मन्त्रक जप करू। गेहूंक फसल पकाबैक आ समस्त जीवनकेँ पोषित करबाक लेल सूर्य देवताकेँ धन्यवाद करू।
ॐ भूर्भुवः स्वः तत् सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्
oṃ bhūrbhuvaḥ svaḥ tat saviturvareṇyaṃ bhargo devasya dhīmahi dhiyo yo naḥ pracodayāt
हम सब दिव्य सावित्री (सूर्य) क महिमामय तेज पर ध्यान करैत छी। ओ दिव्य प्रकाश हमर बुद्धिकें प्रकाशित करू आ हमरा सभकें धर्मक मार्ग पर अग्रसर करू।
बैसाखीक विशेष प्रार्थनाक लेल भोरमे गुरुद्वारा जाऊ। गुरु ग्रन्थ साहिब जी केँ औपचारिक स्नान (प्रकाश) कराओल जाइत अछि। ग्रंथी खालसाक स्थापनाक स्मरणमे विशेष शबद पाठ करैत छथि। वाहेगुरुकेँ आशीर्वादक लेल अरदास (सामूहिक प्रार्थना) कएल जाइत अछि। नव दीक्षितसभक लेल अमृत संचार (खालसा दीक्षा समारोह) कएल जा सकैत अछि। सिख समुदायक लेल ई दिनक सबसँ महत्त्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान अछि।
गुरुद्वाराक सामुदायिक लंगर (निःशुल्क रसोई) मे भाग लिअ जतय जाति, धर्म वा सामाजिक स्थिति निरपेक्ष सभ गोटे एक संग भोजन करैत छथि। ई समानता आ सेवा (सेवा) क सिखक एकटा मूल मूल्य अछि। बैसाखी पर, लंगर पारम्परिक पंजाबी व्यंजनसभक संग विशेष रूपसँ भव्य होइत अछि। हिन्दू परम्परामे, परिवारसभ मक्कीक रोटी, सरसोंक साग, खीर, आ गेहूंक पकवानक संग ताजा गुड़ सहित एकटा उत्सवपूर्ण भोजन साझा करैत छथि।
ऊर्जावान भांगड़ा (पुरुषसभक फसल नृत्य) आ गिद्दा (महिलासभक नृत्य) बिना बैसाखी अधूरा अछि। किसानसभ ढोल पर उत्साहपूर्ण ढोलक बजाकय सफल गेहूंक फसलक उत्सव मनबैत छथि। सवारी, लोक प्रदर्शन, कुश्ती (कुश्ती), आ पगड़ी बान्हैक प्रतियोगिताक संग बैसाखी मेला (मेला) जाऊ। ग्रामीण पंजाबमे, ई वर्षक मुख्य आकर्षण होइत अछि। नगर कीर्तन शोभायात्रा (सिख समुदायक शोभायात्रा) गुरु ग्रन्थ साहिबकेँ एकटा सजल झाँकी पर लए शहरक सड़कसभसँ गुजरैत अछि।
साँझमे, घरक मन्दिरमे घीक दीप आ कपूरसँ आरती करू। वर्षभरिक आशीर्वादक लेल ईश्वरक आभार व्यक्त करू। काड़ा प्रसाद (गेहूँक आटा, घी आ चीनीसँ बनल हलुआ) सभ परिवारक सदस्य आ आगन्तुक लोकनिक बीच बाँटू। बुजुर्ग लोकनि खालसाक स्थापना आ पञ्जाबक कृषि विरासतक कथा कहैत छथि। आबयवला कृषि चक्रक लेल कृतज्ञता आ प्रार्थनाक संग दिनक समापन करू।