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बुद्ध पूर्णिमा वैशाख पूर्णिमाकेँ पड़ैत अछि। पूजा ब्रह्मा मुहूर्त (भोरसँ पहिने) वा भोरक समयमे करब सबसँ उत्तम होइत अछि। ध्यान दिनभरि कयल जा सकैत अछि, खास कऽ पूर्णिमाक चन्द्रमाक उदयक समयमे।
अहाँक स्थान खोजि रहल अछि...
भोरसँ पहिने उठू, स्वच्छ जलसँ स्नान करू। पवित्रताक प्रतीकक रूपमे उज्जर वा हल्का रङ्गक वस्त्र धारण करू। पूजा स्थलकेँ साफ करू आ बुद्धक मूर्तिकेँ पूब दिस मुँह कए स्थापित करू। फूल, जल आ अन्य सामग्री सभकेँ सजाकय राखू।
तीन शरण ग्रहण करू: बुद्धं शरणं गच्छामि, धम्मं शरणं गच्छामि, सङ्घं शरणं गच्छामि। ई पूजाक लेल आध्यात्मिक आधार स्थापित करैत अछि।
बुद्धं शरणं गच्छामि। धर्मं शरणं गच्छामि। सङ्घं शरणं गच्छामि।
buddhaṃ śaraṇaṃ gacchāmi | dharmaṃ śaraṇaṃ gacchāmi | saṅghaṃ śaraṇaṃ gacchāmi |
हम बुद्धक शरणमे जाइत छी। हम धर्मक (उपदेशक) शरणमे जाइत छी। हम संघक (समुदायक) शरणमे जाइत छी।
बुद्धक मूर्तिकेँ उज्जर फूल (विशेष कए कमल) अर्पण करू। घृतक दीप आ अगरबत्ती जराबू। दीप अज्ञानताक अन्धकारकेँ दूर करयवला ज्ञानक प्रकाशक प्रतीक अछि।
बुद्ध मूर्तिकेँ चन्दनक लेप मिलाओल स्वच्छ जलसँ धीरे-धीरे स्नान कराबू। ई अनुष्ठान राजकुमार सिद्धार्थक जन्मक समय देवगण द्वारा कएल गेल स्नानक स्मरण कराबैत अछि। मूर्तिकेँ सुखाकय नव फूलसँ सुसज्जित करू।
बुद्ध प्रतिमाक सोझाँ आरामदायक ध्यान मुद्रा मे बैसू। कम सँ कम १५-३० मिनट धरि सचेतन ध्यान (आनापानसति – श्वासक प्रति जागरूकता) क अभ्यास करू। चारि आर्य सत्य आ अष्टांगिक मार्ग पर विचार करू।
मालाक उपयोग करैत "ॐ मणि पद्मे हूँ" १०८ बेर जप करू। एकर बाद बुद्धं शरणं गच्छामि मन्त्रक जप करू। ई पवित्र अक्षर दया आ ज्ञानक आह्वान करैत अछि।
ॐ मणि पद्मे हूँ
oṃ maṇi padme hūṃ
ॐ, कमल मे रत्न – दयाक एकटा मन्त्र जे अवलोकितेश्वर (चेनरेज़िग), सार्वभौमिक दयाक साक्षात् स्वरूप, क आशीर्वादक आह्वान करैत अछि।
दान (परोपकार) क अभ्यास करू – गरीबकें भोजन कराऊ, वस्त्र दान करू, भिक्षुक लोकनिकें भिक्षा दियौ। बुद्ध पूर्णिमा पर कयल गेल दान अत्यंत पुण्यकारी मानल जाइत अछि। पक्षी आ जानवरकें सेहो भोजन कराऊ।
खीर (चाउर क खीर) नैवेद्यक रूप मे अर्पित करू – सुजाता सिद्धार्थकें हुनकर ज्ञान प्राप्तिक पूर्व खीर अर्पित केने छलीह। उपस्थित सभकें प्रसाद वितरण करू। सभ सचेत प्राणीक कल्याणक लेल प्रार्थनाक संग समापन करू।