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धनतेरस पूजा कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी केँ प्रदोष काल (सूर्यास्तक बाद) मे कएल जाइत अछि। सबसँ शुभ समय स्थिर लग्न (स्थिर राशि उदय) अछि, जे सामान्यतः साँझ ६:०० बजे सँ ८:०० बजे धरि होइत अछि।
अहाँक स्थान खोजि रहल अछि...
पूजा सँ पहिने, एकटा नव सोना वा चाँदीक वस्तु किनू, वा कम सँ कम एकटा स्टील/पीतलक बर्तन। ई क्रय घर मे धनक आगमनक प्रतीक अछि। यदि सम्भव हो, तँ ई वस्तु प्रदोष काल मे किनबाक चाही।
पूरा घर केँ साफ करू, खास कऽ पूजा स्थल आ मुख्य द्वार केँ। पूजाक चौकी पर एकटा साफ वस्त्र बिछाउ। धन्वन्तरि आ लक्ष्मीक चित्र, नव किनकायल वस्तु, सिक्का आ मिठाई चौकी पर राखू।
शुद्धिकरण लेल तीन बेर जल ग्रहण करू। दाहिना हाथ मे जल आ अक्षत लऽ कऽ सङ्कल्प करू, पूजाक उद्देश्य बताबैत।
भगवान् धन्वन्तरि केर पूजा करू (दिव्य वैद्य, विष्णु केर अवतार जे समुद्र मन्थन काल अमृत कलश सँ प्रकट भेलाह)। कुमकुम, अक्षत, फूल, धतूरा आ धूप अर्पित करू। धन्वन्तरि मन्त्र केर जप करू।
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय धन्वन्तरये अमृतकलशहस्ताय सर्वामयविनाशनाय त्रैलोक्यनाथाय श्री महाविष्णवे नमः
oṃ namo bhagavate vāsudevāya dhanvantaraye amṛtakalaśahastāya sarvāmayavināśanāya trailokyānāthāya śrī mahāviṣṇave namaḥ
भगवान वासुदेव धन्वन्तरि केँ प्रणाम, जे अमृत (अमरताक रस) क कलश धारण करैत छथि, सभ रोगक विनाशक, तीनू लोकक स्वामी, महान विष्णु।
देवी लक्ष्मी केर फूल, कुमकुम, अक्षत आ धूप सँ पूजा करू। सिक्का आ नव धातु केर वस्तु हुनकर प्रतिमाक सोझाँ राखू। लक्ष्मी मन्त्र केर जप करू।
ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै नमः
oṃ śrīṃ hrīṃ klīṃ mahālakṣmyai namaḥ
महालक्ष्मी केँ प्रणाम, समृद्धि (श्रीं), माया (ह्रीं), आ आकर्षण (क्लीं) क बीज मन्त्रक संग।
घी वा सरिसोक तेल सँ भरल १३ माटिक दीया जराबू। ओकरा मुख्य दरवाजाक बाहर दक्षिण दिस मुँह कय कय राखू – ई यम दीप अछि, जे अकाल मृत्यु (अपमृत्यु) सँ बचाव लेल जराबैत अछि। एकटा दीया साँझ मे दक्षिण दिस मुँह कय कय राखल जाए आ राति भरि जरैत छोड़ि देल जाए।
नैवेद्यक रूप मे मिठाई, फल आ धनिया केर बीया अर्पित करू। कपूर आ घी केर दीप सँ आरती करू, धन्वन्तरि आरती गाबैत।
पूजा स्थलक ३ बेर परिक्रमा करू। सम्पूर्ण परिवारक लेल नीक स्वास्थ्य, धन आ अकाल मृत्यु सँ रक्षाक लेल प्रार्थना करू। प्रसाद वितरण करू।