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लक्ष्मी पूजा प्रदोष काल (सूर्यास्तक बाद) आ निशिता काल (मध्यराति) मे कयल जाइत अछि। अमावस्याक राति मे सामान्यतः साँझ ६:०० बजे सँ राति ८:०० बजे धरिक समय सबसँ शुभ मानल जाइत अछि।
अहाँक स्थान खोजि रहल अछि...
पूजा स्थल केँ नीक जकाँ साफ करू। काठक चौकी पर लाल वस्त्र बिछाउ। लक्ष्मीक मूर्ति/चित्र केँ पूब दिस मुँह कय कय बीच मे स्थापित करू, गणेश केँ हुनकर बामा दिस राखू। मूर्ति सभक लग मे सिक्का, बही-खाता आ कलम राखू।
विष्णु कें नाम लेबय काल, आत्म-शुद्धिक लेल दाहिना हाथक अञ्जुलिसँ तीन बेर जल ग्रहण करू।
दाहिना हाथमे जल आ अक्षत लिय, लक्ष्मी-गणेश पूजाक तिथि, स्थान आ उद्देश्यक घोषणा करू, तखन जल छोड़ू।
सर्वप्रथम गणेश जीक पूजासँ आरम्भ करू (कोनो पूजासँ पहिने ई परम्परा अछि)। कुङ्कुम, अक्षत, दूर्वा आ लाल फूल अर्पित करू। गणेश बीज मन्त्रक जप करू।
ॐ गं गणपतये नमः
oṃ gaṃ gaṇapataye namaḥ
भगवान गणपति केँ प्रणाम, जे विघ्नहर्ता छथि।
हाथ जोड़ि कऽ मूर्ति/चित्रमे देवी लक्ष्मीक आवाहन करू। लक्ष्मी बीज मन्त्रक जप करैत काल अक्षत आ कमल फूल अर्पित करू।
ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः
oṃ śrīṃ mahālakṣmyai namaḥ
महान देवी लक्ष्मी केँ प्रणाम, जे शुभता आ धनक प्रदाता छथि।
देवी लक्ष्मी कें पैर धोयबाक लेल जल (पाद्य) आ सुगन्धित जल अर्घ्यक रूपमे अर्पित करू।
लक्ष्मी प्रतिमाकेँ पञ्चामृत (दूध, दही, घी, मधु, चीनी) सँ स्नान कराउ, फेर स्वच्छ जल सँ।
लक्ष्मीकेँ लाल साड़ी/वस्त्र अर्पित करू। यदि उपलब्ध अछि तँ आभूषण सँ शृङ्गार करू।
लक्ष्मी प्रतिमाकेँ चन्दनक लेप आ कुङ्कुम लगाउ।
देवी लक्ष्मीकेँ कमल पुष्प आ आन लाल/गुलाबी फूल अर्पित करू। कमल हुनकर सबसँ प्रिय फूल अछि।
अगरबत्ती जड़ाउ आ लक्ष्मी तथा गणेश दुनू प्रतिमाक समक्ष घुमाउ।
१३ टा घीक दीप जराउ। ओकरा सभकेँ पूजा क्षेत्रक चारू कात राखू। एकटा दीपकेँ देवतासभक सोझाँ दक्षिणावर्त दिशामे घुमाउ।
ऋग्वेदसँ श्री सूक्तक पाठ करू – ई दीपावली लक्ष्मी पूजाक समयक सभसँ महत्त्वपूर्ण पाठ अछि।
ॐ हिरण्यवर्णां हरिणीं सुवर्णरजतस्रजाम्। चन्द्रां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आवह॥
oṃ hiraṇyavarṇāṃ hariṇīṃ suvarṇarajatasrajām | candrāṃ hiraṇmayīṃ lakṣmīṃ jātavedo ma āvaha ||
हे जातवेदा (अग्नि), हमरा ओहि लक्ष्मी केँ आनू जे स्वर्ण वर्णक छथि, हरिणी सदृश, सोना आ चाँदीक माला सँ सुसज्जित, चन्द्रमा सदृश कान्तिमान आ सोना सदृश तेजस्वी छथि।
माला (जपमाला) क उपयोग करैत लक्ष्मी बीज मन्त्रक १०८ बेर जप करू। प्रचुरता आ समृद्धिक दिस ध्यान केन्द्रित करू।
ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः
oṃ śrīṃ mahālakṣmyai namaḥ
महान देवी लक्ष्मी केँ प्रणाम, जे शुभता आ धनक प्रदाता छथि।
कुबेर (दिव्य कोषाध्यक्ष) क पूजा करू मूर्ति लग सिक्का राखि आ कुबेर मन्त्रक जप कयकेँ। एहि सँ धनक निरन्तर प्रवाह सुनिश्चित होइत अछि।
ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये धनधान्यसमृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा
oṃ yakṣāya kuberāya vaiśravaṇāya dhanadhānyādhipataye dhanadhānyasamṛddhiṃ me dehi dāpaya svāhā
हे कुबेर, यक्षसभक स्वामी, विश्रवणक पुत्र, धन आ धान्यक स्वामी – हमरा धन आ धान्यक समृद्धि प्रदान करू।
नैवेद्यक रूपमे मिठाई (खीर, लड्डू, बर्फी), फल आ नारियल चढ़ाउ। चढ़ावाक चारू कात जल छिड़कू।
पान, सुपारी आ लवङ्ग ताम्बूलक रूपमे अर्पित करू।
नव बही-खाताकेँ लक्ष्मीक मूर्तिक सोझाँ राखू। नव लाल कलम सँ पहिल पृष्ठपर "श्री" वा "शुभ लाभ" लिखू। ओहिपर कुमकुम आ अक्षत लगाऊ।
कपूर आ घीक दीप सँ "ॐ जय लक्ष्मी माता" गाबैत काल आरती करू। घण्टी बजाऊ आ शङ्ख बजाऊ।
पूजा स्थलक ३ बेर दक्षिणावर्त दिशामे परिक्रमा करू।
समृद्धिक लेल प्रार्थना करैत काल दुनू हाथ सँ फूल अर्पित करू। प्रणाम करू आ आशीर्वाद माँगू।
पूजाक बाद, प्रवेश द्वार, खिड़की, बालकनी, तुलसीक गाछ लग आ घरक सभ कोठरी मे जरल दीप राखू। समूचा घर जगमगा उठबाक चाही।