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दुर्गा अष्टमी नवरात्रिक आठम दिन (आश्विन/चैत्र शुक्ल अष्टमी) मनाओल जाइत अछि। सन्धि पूजा – सभसँ पवित्र क्षण – अष्टमी आ नवमी तिथिक सन्धि कालमे होइत अछि। नित्य पूजा मध्याह्न (दिनक बीच) मे कएल जाइत अछि।
अहाँक स्थान खोजि रहल अछि...
भोरमे उठू, स्नान करू आ स्वच्छ लाल वा नारङ्गी वस्त्र धारण करू। पूजा स्थलकेँ ताजा फूलसँ सजाऊ आ दुर्गा मूर्तिकेँ स्वच्छ करू। हवन सामग्री, नैवेद्य आ कन्या पूजनक लेल उपहारक व्यवस्था करू।
जल आ अक्षत लऽ कऽ सङ्कल्प करू। देवी दुर्गाक १६-चरणीय (षोडशोपचार) पूजा करू: आवाहन (आह्वान), आसन, पाद्य, अर्घ्य, आचमनीय, स्नान, वस्त्र, गन्ध, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य, ताम्बूल, दक्षिणा, आरती, प्रदक्षिणा।
९ गोटि छोटकी कन्या (२-१० वर्षक) केँ आमन्त्रित करू जे दुर्गाक ९ रूपक प्रतिनिधित्व करैत छथि: कुमारिका (२), त्रिमूर्ति (३), कल्याणी (४), रोहिणी (५), काली (६), चण्डिका (७), शाम्भवी (८), दुर्गा (९), सुभद्रा (१०)। हुनकर पैर धोऊ, तिलक लगाऊ, भोजन (हलवा-पूरी-चना), नव वस्त्र आ दक्षिणा प्रदान करू।
महा अष्टमीक सबसँ महत्त्वपूर्ण अनुष्ठान। ई पूजा ठीक ओहि सन्धि काल (जखन अष्टमी तिथि समाप्त होइत अछि आ नवमी प्रारम्भ होइत अछि) मे करू – सामान्यतः ई ४८ मिनटक अवधि (सन्धि क्षणक २४ मिनट पहिने आ २४ मिनट बाद) होइत अछि। १०८ कमल आ १०८ दीप अर्पित करू। चामुण्डा मन्त्रक जाप करू।
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे। जयन्ती मङ्गला काली भद्रकाली कपालिनी। दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तु ते॥
oṃ aiṃ hrīṃ klīṃ cāmuṇḍāyai vicce | jayantī maṅgalā kālī bhadrakālī kapālinī | durgā kṣamā śivā dhātrī svāhā svadhā namo'stu te ||
ॐ, ऐं, ह्रीं, क्लीं सँ, हम चामुण्डा केँ आह्वान करैत छी। विजयदायिनी, शुभ काली, भद्रकाली, कपालधारिणी, दुर्गा, क्षमाशीला, शिव, पालनहार – स्वाहा, स्वधा, अहाँ केँ नमस्कार।
अस्त्र पूजा करू – शस्त्र आ उपकरणक पूजा। दुर्गा परम्परा मे, ई दुर्गा केँ देवगण द्वारा देल गेल दिव्य शस्त्रक प्रतीक अछि। घरक उपकरण, व्यावसायिक उपकरण, वा प्रतीकात्मक शस्त्र केँ देवीक समक्ष राखि फूल आ कुमकुम सँ ओकर पूजा करू।
हवन कुण्ड तैयार करू। पवित्र अग्नि प्रज्वलित करू आ दुर्गा अष्टमी मन्त्र तथा दुर्गा सप्तशतीक श्लोकक जाप करैत घृत, हवन सामग्री आ तिलक आहुति दियौ। अग्नि मे १०८ आहुति दियौ।
ॐ देवी दुर्गायै नमः। या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
oṃ devī durgāyai namaḥ | yā devī sarvabhūteṣu śaktirūpeṇa saṃsthitā | namastasyai namastasyai namastasyai namo namaḥ ||
ॐ, देवी दुर्गाकेँ प्रणाम। जे देवी सभ प्राणीमे शक्ति रूपेँ निवास करैत छथि – हुनका हम प्रणाम करैत छी, हुनका हम प्रणाम करैत छी, हुनका हम बारम्बार प्रणाम करैत छी।
घृत दीप, कपूर आ घण्टीक संग दुर्गा आरती करू। सब भक्तगण मे प्रसाद (हलवा-पूरी-चना) वितरित करू। यदि उपवास मे छी, तँ आरतीक बाद पवित्र भोजन सँ उपवास तोड़ू।