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गुरु शान्ति पूजा बृहस्पतिदिन सबेरे, आदर्श रूप सँ ब्रह्म मुहूर्त मे वा सूर्योदयक बादक पहिल तीन घण्टा मे कएल जाइत अछि। गुरुबार (बृहस्पतिदिन) बृहस्पति केर अपन दिन अछि।
अहाँक स्थान खोजि रहल अछि...
भोर मे स्नान करू आ स्वच्छ पीयर वस्त्र धारण करू। कपार पर हल्दीक टीका लगाऊ। बृहस्पति गुरु सिद्धान्तक प्रतिनिधित्व करैत छथि – विनम्रता आ श्रद्धाक संग समीप आऊ।
उत्तर-पूर्व दिस मुँह कऽ कऽ बैसू। दाहिना हाथक हथेली मे हल्दी आ पीयर फूलक संग जल लिय। अपन नाम, गोत्र आ गुरु ग्रह केँ शान्त करबाक सङ्कल्प कहू।
पीतल वा सोनाक रङ्गक पात्र मे जल भरू। हल्दी, पीयर फूल आ यदि उपलब्ध अछि तँ एकटा सोनाक सिक्का दिय। पीयर वस्त्र सँ झाँपल चना दालक बिछौना पर राखू।
घीक दीप जराबि कऽ आ पीयर फूल आ केरा चढ़ा कऽ बृहस्पति केँ आवाहन करू। कलश पर हल्दी लगाऊ। "ॐ गुरवे नमः" मन्त्रक तीन बेर जप करू।
गुरु बीज मन्त्रक १९,००० बेर जप करू (वा कम सँ कम १०८ बेर)। पुखराज (पीयर नीलमणि) वा हल्दीक मालाक उपयोग करू। दिव्य ज्ञानक स्वर्ण-पीयर गोला पर ध्यान करू।
ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः
oṃ grāṃ grīṃ grauṃ saḥ gurave namaḥ
बृहस्पति (गुरु) केँ प्रणाम। बीज अक्षर ज्ञान, समृद्धि आ दिव्य कृपाक लेल बृहस्पति केर व्यापक ऊर्जाकेँ आह्वान करैत अछि।
यदि सम्भव अछि तँ, घी आ चन्दनक काठीक संग एकटा छोट होम करू। गुरु गायत्रीक जप करैत काल आगिमे चना दाल आ हल्दी अर्पित करू।
चना दाल आ हल्दी कोनो ब्राह्मण वा जरूरतमन्दकेँ दान करू। गुरु दक्षिणा (गुरुकेँ उपहार) देब बृहस्पति ग्रहक लेल सबसँ शक्तिशाली उपाय अछि। पीयर वस्तुसभ दान करू।
बृहस्पति आ भगवान् दक्षिणामूर्ति (शिव सर्वोच्च गुरुक रूपमे) सँ ज्ञान आ धार्मिक मार्गदर्शनक लेल प्रार्थना करू। साष्टाङ्ग नमस्कार करू। प्रसाद सभक संग बाँटू।