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शुक्र शान्ति पूजा शुक्रदिन सबेरे वा साँझमे कएल जाइत अछि। अपराह्न (दोपहर) काल सेहो शुभ अछि। शुक्रबार शुक्र ग्रहक अपन दिन अछि।
अहाँक स्थान खोजि रहल अछि...
सुगन्धित जलसँ स्नान करू (गुलाबक पंखुड़ी वा चन्दन मिलाऊ)। उज्जर रेशमी वा सूती स्वच्छ वस्त्र धारण करू। चन्दनक लेप आ किछु इत्र लगाऊ।
पूरब दिस मुँह कऽ बैसू। दाहिना हाथक हथेलीमे उज्जर फूल आ इत्रक संग जल लिय। अपन नाम, गोत्र आ शुक्र ग्रहक शान्ति लेल अपन सङ्कल्प कहू।
एकटा चाँदीक वा स्वच्छ स्टीलक पात्रकेँ जल आ घृतक बूँदसँ भरू। उज्जर फूल आ एकटा चाँदीक सिक्का दिय। उज्जर रेशमी वस्त्रसँ ढकल चावलक दानाक आसन पर राखू।
घृतक दीप आ कपूर जड़ाकय शुक्र देवक आवाहन करू। उज्जर सुगन्धित फूल चढ़ाऊ आ इत्र छिड़कू। "ॐ शुक्राय नमः" तीन बेर उच्चारण करू।
शुक्र बीज मन्त्र १६,००० बेर (वा कम सँ कम १०८ बेर) जप करू। स्फटिक (क्रिस्टल) वा हीराक मालाक उपयोग करू। सुन्दरता आ सद्भावक एकटा चमकीला उज्जर गोला पर ध्यान करू।
ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः
oṃ drāṃ drīṃ drauṃ saḥ śukrāya namaḥ
शुक्रकेँ प्रणाम। ई बीज अक्षर प्रेम, सुन्दरता, कलात्मक प्रतिभा आ भौतिक समृद्धिक लेल शुक्रक सामंजस्यपूर्ण ऊर्जाकेँ आह्वान करैत अछि।
यदि सम्भव अछि तँ, घृत आ चन्दनक काठीसँ एकटा छोट होम करू। शुक्र गायत्रीक जप करैत काल अग्निमे चाउर आ उज्जर फूल अर्पित करू।
कोनो विवाहित महिला वा जरूरतमंदकेँ चाउर आ उज्जर वस्त्र (विशेषतः रेशमक) दान करू। प्रसाधन सामग्री, इत्र वा उज्जर वस्तु दान करब सेहो शुक्र शान्तिक लेल शुभ होइत अछि।
वैवाहिक सुख, सुन्दरता आ भौतिक सुखक लेल शुक्र देव आ देवी लक्ष्मीसँ प्रार्थना करू। नमस्कार करू आ सुगन्धित प्रसाद वितरण करू।