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गुरु पूर्णिमा पूजा आषाढ़ पूर्णिमाक दिन भोरमे पूर्वाह्नमे कएल जाइत अछि। एकर उत्तम समय प्रातः ७:०० बजे सँ १२:०० बजे धरि अछि, जतय व्यास पूजा परम्परागत रूप सँ मध्याह्न सँ पहिने कएल जाइत अछि।
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भोरमे उठू, स्नान करू आ स्वच्छ उज्जर वा हल्का रंगक वस्त्र धारण करू। पूजा स्थानकेँ स्वच्छ करू आ गुरुक फोटो वा पादुकाकेँ एकटा स्वच्छ कपड़ा पर स्थापित करू। पोथी आ अध्ययन सामग्री वेदीक समीप राखू।
गुरुक प्रतिमाक समक्ष ध्यान मुद्रा मे बैसू। अपन आँखि बन्न करू आ अपन गुरुक स्वरूप, शिक्षा आ कृपा पर ध्यान करू। गुरु परम्परा (गुरुसभक वंश) केँ स्मरण करू।
गुरु केर पादुका वा चित्र पर पाद्य (पैर धोयबाक लेल जल) अर्पित करू। गुरु मन्त्रक जप करैत काल पादुका पर जल चढ़ाऊ। यदि गुरु सँ साक्षात् भेट करैत छी, तँ गुरु केर पैर जल सँ धोऊ आ चन्दनक लेप लगाऊ।
गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः। गुरुः साक्षात् परब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः॥
gururbrahmā gururviṣṇuḥ gururdevo maheśvaraḥ | guruḥ sākṣāt parabrahma tasmai śrī gurave namaḥ ||
गुरु ब्रह्मा (सृष्टिकर्ता) छथि, गुरु विष्णु (पालक) छथि, गुरु शिव (संहारक) छथि। गुरु साक्षात् परब्रह्म छथि। ताहि गुरुकेँ प्रणाम।
गुरु केर चित्र वा पादुका पर चन्दनक लेप आ कुमकुम लगाऊ। उज्जर आ पीयर फूल चढ़ाऊ आ अक्षत (अखण्डित चावल) छिड़िकू।
गुरु मन्त्र "गुरुर् ब्रह्मा गुरुर् विष्णु..." क जप करू, ओकर बाद गुरु गायत्रीक। तखन गुरु स्तोत्र वा गुरु अष्टकक पाठ करू, यदि ज्ञात अछि।
गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः। गुरुः साक्षात् परब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः॥
gururbrahmā gururviṣṇuḥ gururdevo maheśvaraḥ | guruḥ sākṣāt parabrahma tasmai śrī gurave namaḥ ||
गुरु ब्रह्मा (सृष्टिकर्ता) छथि, गुरु विष्णु (पालक) छथि, गुरु शिव (संहारक) छथि। गुरु साक्षात् परब्रह्म छथि। ताहि गुरुकेँ प्रणाम।
वेद व्यास – आदि गुरु जे वेदक संकलन केलनि, महाभारतक रचना केलनि आ पुराणक संहिताकरण केलनि – केर विशेष प्रार्थना करू। व्यास वन्दना श्लोकक जप करू। एही कारण सँ ई दिन व्यास पूर्णिमा सेहो कहाबैत अछि।
व्यासं वसिष्ठनप्तारं शक्तेः पौत्रमकल्मषम्। पराशरात्मजं वन्दे शुकतातं तपोनिधिम्॥
vyāsaṃ vasiṣṭhanaptāraṃ śakteḥ pautramakalmaṣam | parāśarātmajaṃ vande śukatātaṃ taponidhim ||
हम वसिष्ठक प्रपौत्र, शक्तिक निष्पाप पौत्र, पराशरक पुत्र, शुकक पिता, तपस्याक निधि व्यासकेँ प्रणाम करैत छी।
गुरु कें दक्षिणा (धनक उपहार) अर्पित करू, वा यदि घर पर पूजा कऽ रहल छी, तँ गुरु केर पादुका पर दक्षिणा राखू एकरा दान करबाक नियत सँ। नैवेद्यक रूप मे मिठाई, फल आ नारियल चढ़ाऊ।
गुरुक प्रतिमाक समक्ष कपूर आ घीक दीपकसँ आरती करू। गुरु प्रार्थनाकेँ आरतीक रूपमे गाबू।
गुरुक प्रतिमाक समक्ष प्रणाम करू आ ज्ञान तथा बुद्धिक लेल आशीर्वाद लिअ। एहि दिन किछु नव पढ़ब वा अध्ययन करब शुरू करू – कोनो नव शास्त्र, कोनो नव कौशल, वा कोनो नव विषय – गुरुकेँ अर्पणक रूपमे।
उपस्थित सभकेँ प्रसाद वितरित करू। ज्ञान वा कोनो शिक्षाकेँ आध्यात्मिक प्रसादक रूपमे दोसरसभक संग बाँटू।