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हरियाली तीज श्रावण शुक्ल तृतीया केँ मनाओल जाइत अछि। विवाहित महिलासभ सूर्योदय सँ व्रत आरम्भ करैत छथि आ मध्याह्न (दिनक मध्य) मुहूर्त मे पूजा करैत छथि। ई पर्व दिन भरि झूला उत्सव सँ चिन्हित होइत अछि।
अहाँक स्थान खोजि रहल अछि...
हरियर वस्त्र (साड़ी वा लेहंगा) धारण करू आ सोलह श्रृंगार पूरा करू – १६ पारंपरिक प्रसाधन, जाहि मे बिंदी, सिन्दूर, काजल, चूड़ी, पायल, मेंहदी, नथ, कानक बाली, हार, आदि शामिल अछि। हरियर रंग वर्षा ऋतु आ उर्वरताक प्रतीक अछि।
पार्वती आ शिवक मूर्ति केँ संग राखू। देवी पार्वती केँ फूल, कुमकुम, सिन्दूर आ हरियर चूड़ी चढ़ाऊ। पार्वतीक मूर्ति केँ माँग मे सिन्दूर लगाऊ। भगवान शिव केँ बेलपत्र चढ़ाऊ।
तीज व्रत कथा सुनू वा पढ़ू, जाहिमे ई बताओल गेल अछि जे पार्वती भगवान शिव सँ मिलन लेल १०८ जन्म धरि तपस्या केने छलीह। ई कथा भक्ति आ वैवाहिक प्रेमक शक्ति पर जोर दैत अछि।
फूल आ हरियर पात सँ झूला सजाऊ। झूला पर पार्वती-शिवक मूर्ति स्थापित करू आ धीरे-धीरे झुलाऊ। विवाहित महिला लोकनि सेहो तीजक गीत (गीत) गबैत झूला झूलैत छथि। ई शिव सँ मिललाक बाद पार्वतीक प्रसन्नता केँ दर्शाबैत अछि।
हाथ आ पैर मे सुन्दर डिजाइनक संग मेहँदी (हिना) लगाऊ। ई तीजक एकटा मुख्य परम्परा अछि – लोकमान्यताक अनुसार, जतेक गाढ़ मेहँदीक रंग होइत अछि, पतिक प्रेम ओतबे गहिर होइत अछि।
घीक दीया आ कपूर सँ पार्वती-शिवक आरती करू। नैवेद्यक रूप मे घेवर, फल आ आन मिठाई चढ़ाऊ। उपस्थित सभ विवाहित महिला लोकनि मे प्रसाद वितरण करू।