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निशिता काल (मध्यरात्रिक समय) सबसँ शुभ समय अछि – भगवान् श्रीकृष्णक जन्म भाद्रपद कृष्ण अष्टमी (रोहिणी नक्षत्र) क ठीक मध्यरात्रिक समयमे भेलनि।
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सूर्योदयसँ पूर्ण उपवास राखू। कठोर भक्तगण निर्जला (जल बिना) व्रत करैत छथि, जखन कि दोसर लोक फलाहार (फल, दूध, मेवा) ल' सकैत छथि। उपवास मध्यरात्रिक पूजाक बाद धरि चलैत अछि।
पालना/झूलाकेँ फूल, आमक पात आ रङ्ग-बिरङ्गक वस्त्रसँ सजाऊ। ओहिमे एकटा छोट गद्दा आ तकिया राखू। ई मध्यरात्रिमे बाल कृष्णक लेल शय्या हेतय।
पूजा क्षेत्रकेँ कृष्णक प्रतिमा, मयूर पंख, बाँसुरी आ भोगक सामग्रीसँ सजाऊ। झूलाकेँ वेदीक समीप राखू। पञ्चामृतक सामग्री, माखन-मिश्री आ फलक व्यवस्था करू।
सूर्यास्तक समय दीप प्रज्वलित करू आ साँझक पूजा आरम्भ करू। कृष्णकेँ धूप आ दीप अर्पित करू। भगवद् गीता वा कृष्ण लीला कथाक पाठ आरम्भ करू।
राति भरि (जागरण) कृष्ण भजन आ कीर्तन करैत जागल रहू। लोकप्रिय गीत सभमे शामिल अछि: "हरे कृष्ण महामन्त्र", "गोविन्द बोलो हरि गोपाल बोलो", आ कृष्णक बाल लीला सभक वर्णन।
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
hare kṛṣṇa hare kṛṣṇa kṛṣṇa kṛṣṇa hare hare | hare rāma hare rāma rāma rāma hare hare ||
हे भगवान हरि (कृष्ण), हे भगवानक शक्ति (हरे/राधा) – काली सन्तरण उपनिषदक ई १६ शब्दक महामन्त्र कलियुग मे मोक्षक सर्वोच्च साधन अछि
ठीक निशिता काल (मध्यरात्री) मे, बाल कृष्णक मूर्तिकेँ पञ्चामृतसँ स्नान कराउ – पहिने दूध, फेर दही, फेर घी, फेर मधु, फेर चीनीक पानिसँ – ओकर बाद स्वच्छ पानिसँ। शङ्ख बजाउ, घण्टी बजाउ आ उद्घोष करू "नन्द घेर आनन्द भयो, जय कन्हैया लाल की!"
अभिषेकक बाद, बाल कृष्णकेँ नव वस्त्र पहिराउ, चन्दनक तिलक लगाउ, हुनकर मुकुट पर मोरपङ्ख राखू आ हुनकर हाथ मे बाँसुरी राखू। हुनका धीरे-धीरे सजल झूला (पालना) मे राखू।
पालनाकेँ धीरे-धीरे झुलाउ जखन भक्ति गीत गाबि रहल छी – बाल कृष्णक लेल लोरी जेना कि "सो जा राजकुमारी" वा "जय जय राधा रमण।" परिवारक प्रत्येक सदस्यकेँ बारी-बारीसँ झुलायबाक चाही।
बाल कृष्णकेँ नव माखन (मक्खन) मिश्री (खण्ड) सँ मिलाकय भोग लगाउ – हुनकर सबसँ प्रिय भोजन। दूध, दही, फल, पञ्चामृत आ तुलसीक पात सेहो अर्पित करू। भोगक चारू दिस जल छिड़िकू।
कपूर आ घीक दीया सँ बाल कृष्णक आरती करू। "आरती कुञ्ज बिहारी की" गाउ – भगवान कृष्णक सबसँ प्रसिद्ध आरती। पूरा समय घण्टी बजाउ आ शङ्ख फूकू।
मध्यरात्रिक पूजा, आरती आ नैवेद्यक बाद, पहिने पञ्चामृत प्रसाद लऽ कऽ व्रत तोड़ू, फेर माखन-मिश्री, ओकर बाद फल आ आन सात्विक भोजन करू।
अगिला दिन दही हाण्डी मनाउ – दही, माखन आ फलक एकटा हाँड़ी ऊँच जगह पर टाँगू, आ टोली बना कऽ ओकरा तोड़ू, जेना गोकुलमे ननका कृष्णक शरारती माखन चोरीक लीला होइत छल, ओहिना।