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रक्षाबन्धन श्रावण पूर्णिमा पर अपराह्न (दोपहर) मे कएल जाइत अछि। भद्रा काल सँ कड़ाई सँ बचबाक चाही – भद्रा मे राखी बान्हब सँ दुर्भाग्य अबैत अछि। भद्राक समय लेल पञ्चाङ्ग देखू आ एकरा पूर्ण रूप सँ टालू।
अहाँक स्थान खोजि रहल अछि...
बहिन जरैत दीया, रोली, अक्षत, मिश्री, एकटा फूल आ राखीक संग आरतीक थाली तैयार करैत अछि। दुनू भाई आ बहिनकेँ स्नान करबाक चाही आ स्वच्छ पाबनि-तिहारक वस्त्र पहिरबाक चाही।
बहिन जरैत दीयाक थालीकेँ भाईक मुँहक चारू कात तीन बेर दक्षिणावर्त घुमा कय हुनकर आरती करैत अछि।
बहिन अनामिका अँगुरिसँ भाईक कपार पर रोलीक तिलक लगबैत अछि, फेर तिलक पर अक्षत (चाउर) रखैत अछि। ई हुनका शुभ आशीर्वादसँ चिह्नित करैत अछि।
बहिन रक्षा सूत्र मन्त्रक जप करैत काल भाईक दाहिना हाथक कलाई पर राखी बान्हैत अछि। भाई अपन हथेली ऊपर दिस कय खुल्ला रखैत अछि। ई रक्षा बन्धनक मुख्य अनुष्ठान अछि।
येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबलः। तेन त्वामनुबध्नामि रक्षे मा चल मा चल॥
yena baddho balī rājā dānavendro mahābalaḥ | tena tvāmanubadhnāmi rakṣe mā cala mā cala ||
जाहि बन्धन सँ महाबली दानवराज बलि केँ बाँधल गेल छल, तेने हम अहाँ केँ बाँधैत छी। हे रक्षा (रक्षक), विचलित नहि होऊ, विचलित नहि होऊ!
बहिन भाईकेँ मिश्री वा मिठाई खियाबैत अछि, आ भाई बहिनकेँ मिठाई खिया कय प्रत्युत्तर दैत अछि। ई सम्बन्धकेँ मधुर बनाबैत अछि।
भाइ बहिन केँ उपहार (परम्परागत रूप सँ धन वा सोना) दैत छथि आ जीवन भरि ओकर रक्षा करबाक प्रतिज्ञा करैत छथि। ओ आशीर्वाद लेबाक लेल ओकर पैर वा माथ छूइत छथि।
परिवार संगहि मिठाई बाँटैत अछि आ उत्सव मनबैत अछि। पड़ोसी आ रिश्तेदार सभ केँ मिठाई बाँटू।
भाइ आ बहिन दुनू संगहि एक दोसरक कल्याण, दीर्घायु आ खुशीक लेल प्रार्थना करैत छथि। बहिन भाइक रक्षा लेल प्रार्थना करैत छथि; भाइ बहिनक समृद्धिक लेल प्रार्थना करैत छथि।