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तुलसी विवाह कार्तिक शुक्ल द्वादशी (कार्तिक मासक शुक्ल पक्षक बारहम् दिन) केँ कयल जाइत अछि, जे चातुर्मासक समापनक सूचक अछि। ई अनुष्ठान प्रदोष काल (साँझक बेरा) मे कयल जाइत अछि, जेना सामान्य हिन्दू विवाह साँझ मे कयल जाइत अछि।
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तुलसी गाछक चारू कात ईखक डंटीक उपयोग खम्भाक रूप मे कय एकटा छोट विवाह मण्डप (छत) बनाउ। आमक पात, गेंदाक माला आ रंगीन कपड़ा सँ सजाउ। ई विवाह स्थल अछि।
तुलसी गाछ (दुलहिन) कें जल सँ स्नान कराउ आ लाल चुनरी (कपड़ा), फूल आ गहना सँ सजाउ। शालिग्राम पत्थर (दुलहा) कें तुलसीक नजदीक एकटा छोट चौकी पर, पीयर कपड़ा सँ लपेटि कय राखू।
सभ हिन्दू अनुष्ठान सभक समान, बाधा सभक निवारणक लेल गणेश पूजा सँ आरम्भ करू। तखन तुलसी विवाहक लेल औपचारिक सङ्कल्प करू, जाहिमे तिथि, उद्देश्य आ दिव्य युगलक नाम बतायल जाय।
गृहस्थ प्रतीकात्मक रूप सँ कन्या दान करैत छथि – तुलसी (वृन्दा देवी) केँ भगवान विष्णु (शालिग्राम) सँ विवाह कराबैत। दाहिना हत्था सँ जल ढारू आ दान मन्त्रक उच्चारण करू, ठीक ओहिना जेना वास्तविक विवाहमे होइत अछि।
शालिग्राम पत्थरकेँ तुलसी गाछक चारू कात 4 बेर घुमाऊ (हिन्दू विवाहक चारि फेरा/चक्कर)। प्रत्येक फेरा धर्म (कर्तव्य), अर्थ (समृद्धि), काम (प्रेम) आ मोक्ष (मुक्ति) केँ प्रतिनिधित्व करैत अछि।
तुलसी गाछक जड़िमे सिन्दूर लगाऊ आ गाछक धड़मे एकटा छोट मङ्गलसूत्र बान्हू। ई विवाह अनुष्ठानक पूर्णताक प्रतीक अछि, ठीक ओहिना जेना वर कन्याकेँ सिन्दूर लगबैत छथि।
तुलसी मन्त्रक 108 बेर जप करू। तुलसी वृन्दा देवी छथि – जे वनस्पति रूपमे विष्णुकेँ सबसँ प्रिय पत्नी छथि। ई मन्त्र हुनकर पवित्र स्थिति केँ सम्मान करैत अछि।
ॐ तुलस्यमृतजन्मासि सदा त्वं केशवप्रिये। केशवार्थं चिनोमि त्वां वरदा भव शोभने॥
oṃ tulasyamṛtajanmāsi sadā tvaṃ keśavapriye | keśavārthaṃ cinomi tvāṃ varadā bhava śobhane ||
हे तुलसी, अहाँ अमृतसँ उत्पन्न भेल छी, अहाँ केशव (विष्णु) कें सदिखन प्रिय छी। हम अहाँकें केशव कें पूजाक लेल तोड़ैत छी – हे सुन्दरी, अहाँ वरदान देनिहार बनू।
विष्णु मन्त्र १०८ बेर जप करू। भगवान् विष्णुसँ घरक कल्याणक लेल प्रार्थना करू, जेना ओ तुलसी (वृन्दा) सँ अपन विवाहक आशीर्वाद दैत छथि।
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
oṃ namo bhagavate vāsudevāya
ॐ, हम भगवान् वासुदेव (विष्णु) कें प्रणाम करैत छी, जे परम सत्ता आ तुलसीक वर छथि।
आँवला, लावा, मिठाई आ फलक नैवेद्य चढ़ाऊ। पञ्चदीप (पाँच बातीक दीप) आ कपूरसँ आरती करू। विवाह गीत (मङ्गल गीत) गाबू।
प्रसाद (मिठाई, लावा, आँवला) पड़ोसी आ समाजक लोक सभक बीच बाँटू, जेना कोनो वास्तविक विवाह भोजमे होइत अछि। उत्सव मनाबय लेल आतिशबाजी वा दीया जराऊ। ई चातुर्मासक आधिकारिक समापन आ विवाहक मौसमक प्रारम्भक सूचक अछि।