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सरस्वती पूजा माघ शुक्ल पञ्चमी केँ पूर्वाह्न (दोपहर सँ पहिने) मे, आदर्श रूप सँ प्रातः ७:०० बजे सँ १२:०० बजे धरि कएल जाइत अछि। भोरक समय सबसँ शुभ होइत अछि कारण सरस्वती भोरक देवी छथि, जे ब्रह्म मुहूर्त सँ सम्बन्धित छथि।
अहाँक स्थान खोजि रहल अछि...
भोर मे उठू, स्नान करू आ पीयर वस्त्र पहिरू – पीयर रङ्ग वसन्त मे फूलल सरसोक खेतक प्रतीक अछि आ वसन्ती पञ्चमीक लेल सरस्वतीक शुभ रङ्ग अछि। पूजा स्थल केँ साफ करू आ वेदी पर उज्जर वस्त्र बिछाउ।
सरस्वतीक मूर्ति/चित्र केँ उज्जर वस्त्र पर पूब दिस मुँह कयने राखू। मूर्ति केर सोझाँ पोथी, लिखबाक सामग्री आ वाद्ययंत्र राखू — ई सब देवी द्वारा आशीर्वादित होयत। वेदीक चारू कात पीयर आ उज्जर फूल सजाऊ।
आचमन करू (शुद्धिकरण लेल तीन बेर जल ग्रहण करू)। तखन दाहिना हाथ मे पीयर अक्षत आ जल लिय, सरस्वती पूजाक तिथि, स्थान आ उद्देश्य कहू, आ जल छोड़ू।
हाथ जोड़ि कय सरस्वती बीज मन्त्रक जप करैत मूर्ति मे देवी सरस्वतीक आवाहन करू। सोलह चरणक पूजा (षोडशोपचार) करू: आवाहन, आसन, पाद्य, अर्घ्य, आचमनीय, स्नान (पञ्चामृतक संग), वस्त्र, यज्ञोपवीत, गन्ध (चन्दन), पुष्प (उज्जर आ पीयर फूल), धूप, दीप, नैवेद्य, ताम्बूल, दक्षिणा, प्रदक्षिणा।
ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः
oṃ aiṃ sarasvatyai namaḥ
देवी सरस्वतीकेँ हुनकर बीज अक्षर 'ऐं' क माध्यमसँ प्रणाम – ज्ञान आ वाणीक आदिम ध्वनि।
पीयर चाउर (हल्दी अक्षत), पीयर फूल, पीयर मिठाई (केसर बर्फी, बूंदी लड्डू) आ पीयर फल अर्पित करू। पीयर रङ्ग वसन्त (बहार) क प्रतीक अछि आ ज्ञानक सरसोंक फूल जकाँ खिलबाक प्रतिनिधित्व करैत अछि।
भक्तिपूर्वक सरस्वती वन्दना श्लोक "या कुन्देन्दु तुषारहार धवला..." क पाठ करू। ई सरस्वतीक सबसँ प्रसिद्ध आवाहन अछि जे हुनकर उज्जर चमक, वीणा आ कमल आसनक वर्णन करैत अछि।
या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता। या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना॥ या ब्रह्माच्युतशंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा पूजिता। सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥
yā kundendutuṣārahāradhavalā yā śubhravastrāvṛtā | yā vīṇāvaradaṇḍamaṇḍitakarā yā śvetapadmāsanā || yā brahmācyutaśaṅkaraprabhṛtibhirdevaiḥ sadā pūjitā | sā māṃ pātu sarasvatī bhagavatī niḥśeṣajāḍyāpahā ||
जे चमेलीक फूल, चन्द्रमा आ बर्फक माला जकाँ उज्जर छथि; जे शुद्ध उज्जर वस्त्रसँ सुसज्जित छथि; जिनकर हाथ वीणा आ वरदान देनिहार दण्डसँ सुशोभित अछि; जे उज्जर कमल पर विराजमान छथि; जे ब्रह्मा, विष्णु, शङ्कर आ सभ देवतासभ द्वारा सदिखन पूजित छथि – ओ देवी सरस्वती, सभ अज्ञानताकेँ दूर करनिहार, हमर रक्षा करथि।
मालाक उपयोग करैत सरस्वती गायत्री मन्त्रक १०८ बेर जप करू। ज्ञान, वाणीक स्पष्टता आ रचनात्मक प्रेरणा पर ध्यान करू।
ॐ वाग्देव्यै विद्महे ब्रह्मपत्न्यै धीमहि तन्नो वाणी प्रचोदयात्
oṃ vāgdevyai vidmahe brahmapatnyai dhīmahi tanno vāṇī pracodayāt
हम वाणीक देवीक ध्यान करैत छी। हम ब्रह्माक पत्नीक चिन्तन करैत छी। ओ वाणी (भाषण) हमरा सभकेँ प्रेरित आ मार्गदर्शित करय।
ई बच्चा सभकेँ अक्षर ज्ञानक संसारमे प्रवेश करबाक लेल एकटा पवित्र अनुष्ठान अछि। बच्चाकेँ सरस्वतीक मूर्तिक सामने बैसाउ। बच्चाक हाथ पकड़ि 'ॐ' (ॐ) वा 'अ आ इ ई' अक्षर स्लेट, चाउरक थाली वा कॉपीमे लिखबाक लेल मार्गदर्शन करू। बच्चाक शिक्षा शुरू करबाक लेल ई सबसँ शुभ दिन मानल जाइत अछि।
देवी सरस्वतीकेँ नैवेद्यक रूपमे पीयर मिठाई, फल, मधु आ खीर अर्पण करू। 'ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः' मन्त्रक जप करैत भोगक चारू दिस जल छिड़कू।
घीक दीया आ कपूरसँ 'जय सरस्वती माता' गाबैत आरती करू। आरतीक समय घण्टी बजाउ। परिवारक सभ सदस्यकेँ एहिमे भाग लेबाक चाही।
दुनू हाथसँ फूल अर्पण करू, ज्ञान, बुद्धि, वाक्पटुता आ कलामे निपुणताक लेल प्रार्थना करैत। नमन करू आ सरस्वतीक आशीर्वाद लिअ। विद्यार्थीकेँ परीक्षा आ अध्ययनमे सफलताक लेल प्रार्थना करबाक चाही।
आशीर्वादित प्रसाद (पीयर मिठाई, फल) सभ परिवारक सदस्य आ आगन्तुक लोकनिकेँ वितरण करू। पीयर चाउरकेँ अक्षत प्रसादक रूपमे बाँटू। देवीक सोझाँ राखल पोथी आ वाद्ययन्त्र अखन आशीर्वादित भऽ गेल अछि – ओकरा सभकेँ अगिला दिनसँ उपयोग कएल जा सकैत अछि।