गंगा दशहरा 2030
गंगा दशहरा 2030 साठी अचूक तारीख, पूजा मुहूर्त आणि शहरानुसार वेळा
महत्त्वाची माहिती
उत्सवाची तारीख
Monday, June 10, 2030
2030 कॅलेंडर संदर्भ
वार
सोमवार
विक्रम संवत
2087
शके संवत
1952
This year Ganga Dussehra falls on a Monday, 10 days earlier than 2029 (2029-06-20) — typical lunar-calendar drift.
City-Wise Timings for Ganga Dussehra 2030
| शहर | सूर्योदय | सूर्यास्त |
|---|---|---|
| दिल्ली | 5:22 AM | 7:18 PM |
| मुंबई | 6:00 AM | 7:15 PM |
| बेंगलुरु | 5:52 AM | 6:45 PM |
| चेन्नई | 5:42 AM | 6:34 PM |
| कोलकाता | 4:51 AM | 6:20 PM |
| पुणे | 5:57 AM | 7:10 PM |
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ही तारीख का?
Ganga Dussehra follows the Udaya Tithi rule – the festival is observed on the day when the required tithi prevails at sunrise. This is the default Dharmasindhu convention for festivals without a special time-window requirement.
पूजा विधी
आवश्यक साहित्य
- तुपाचा दिवा (दिवा)
- फुले (कमळ, झेंडू, गुलाब)
- कापूर
- उदबत्ती
- दिव्यांसाठी पत्रवळ्या
पूजेच्या पायऱ्या
- 1
पवित्र स्नान (स्नान)
गंगा नदीत किंवा जवळच्या कोणत्याही नदीत पवित्र स्नान करा. जर कोणतीही नदी उपलब्ध नसेल, तर आपल्या स्नानाच्या पाण्यात गंगाजल...
- 2
घाटावर गंगा पूजा
पाण्याच्या जवळ बसा आणि एक लहान वेदी ठेवा. पाणी, फुले, अक्षत, कुंकू आणि हळद अर्पण करा. लहान गंगा प्रतिमेवर किंवा गंगेचे प...
- 3
संकल्प
उजव्या हातात पाणी आणि अक्षत घ्या. आपले नाव, गोत्र, तिथी (ज्येष्ठ शुद्ध दशमी) आणि उद्देश – दहा पापांच्या निराकरणासाठी गंग...
फळ (फायदे)
गंगा दशहरा दहा प्रकारची पापे (शरीराची तीन, वाणीची तीन, मनाची तीन आणि एक वैश्विक) नष्ट करतो. या दिवशी गंगेत स्नान करणे आणि तिची पूजा करणे सर्व तीर्थांना भेट देण्याइतके आध्यात्मिक पुण्य प्रदान करते. यामुळे शुद्धीकरण, पुनर्जन्माच्या चक्रातून मुक्ती आणि पूर्वजांना शांती मिळते.
देवता
देवी गंगा, भगवान शिव
आख्यायिका आणि इतिहास
गंगा दशहरा गंगा नदी के स्वर्ग से पृथ्वी पर अवतरण का उत्सव है। राजा भगीरथ ने हज़ारों वर्ष तपस्या कर गंगा को पृथ्वी पर लाया, जिससे सगर पुत्रों की आत्माओं को मुक्ति मिले। शिव ने गंगा के प्रचण्ड प्रवाह को… पूर्ण आख्यायिका वाचा →कमी दाखवा ↑
गंगा दशहरा गंगा नदी के स्वर्ग से पृथ्वी पर अवतरण का उत्सव है। राजा भगीरथ ने हज़ारों वर्ष तपस्या कर गंगा को पृथ्वी पर लाया, जिससे सगर पुत्रों की आत्माओं को मुक्ति मिले। शिव ने गंगा के प्रचण्ड प्रवाह को अपनी जटाओं में धारण किया।
कसे पाळावे
गंगा या किसी पवित्र नदी में स्नान करें। दस वस्तुएँ अर्पित करें (दशहरा = दस पापों का नाश)। गंगा आरती करें। अन्न, वस्त्र और तिल का दान करें। नदी में दीप प्रवाहित करें।
महत्त्व
गंगा दशहरा दस प्रकार के पापों का नाश करती है। इस दिन गंगा स्नान सभी तीर्थों के स्नान के समान माना जाता है। गंगा की पवित्रता और मोक्षदायिनी शक्ति का उत्सव है।