राजमहेंद्री · Andhra Pradesh
हरतालिका तीज 2029राजमहेंद्री मध्ये
Exact puja times & muhurta computed for Rajahmundry coordinates (17.00°N, 81.80°E)
महत्त्वाच्या वेळा
उत्सवाची तारीख
Tuesday, September 11, 2029
सूर्योदय
05:50
सूर्यास्त
18:08
ही तारीख का?
मध्याह्न नियम: जिस दिन तृतीया तिथि मध्याह्न काल में व्याप्त हो, उस दिन मनाया जाता है।
पूजा विधी
आवश्यक साहित्य
- शिव-पार्वतीच्या माती किंवा वाळूच्या मूर्ती
- १६ शृंगार सामग्री (सोळा शृंगार)
- केळीची पाने (पूजेसाठी आधार म्हणून)
- फुले (मोसमी, विशेषतः जाई आणि झेंडूची)
- फळे (मोसमी)
पूजेच्या पायऱ्या
- 1
सकाळी – स्नान आणि शृंगार
सूर्योदयापूर्वी उठा आणि पवित्र स्नान करा. सोळा शृंगार वस्तू (आभूषणे) धारण करा – हा तीज परंपरेचा अनिवार्य भाग आहे. विवाहि...
- 2
मातीच्या मूर्ती बनवणे
माती, वाळू किंवा शेणापासून भगवान शंकराची (शिवलिंगाच्या रूपात) आणि देवी पार्वतीची मूर्ती बनवा. त्यांना फुलांनी सजवलेल्या ...
- 3
संकल्प आणि आवाहन
मूर्तींसमोर बसा आणि निर्जला व्रतासाठी अधिकृत संकल्प करा. आवाहन मंत्रांनी शिव आणि पार्वतीला मातीच्या मूर्तींमध्ये आवाहन क...
व्रत फळ (उपवासाचे फायदे)
हरतालिका तीज व्रत विवाहित महिलांसाठी सर्वात पुण्यकारक व्रत मानले जाते. ते सौभाग्य (शाश्वत वैवाहिक शुभत्व), जोडीदाराचे दीर्घायुष्य आणि प्रत्येक जन्मी त्याच पतीसोबत पुनर्मिलन प्रदान करते – जसे पार्वतीने तिच्या तपश्चर्येने शिव प्राप्त केले. अविवाहित महिलांना योग्य पती मिळतो.
गणनेचा पुरावा – पारदर्शक लेखापरीक्षण
देवता
भगवान शिव एवं देवी पार्वती
आख्यायिका आणि इतिहास
जब देवी पार्वती के पिता हिमालय ने उनका विवाह विष्णु से तय किया, पार्वती विचलित हुईं क्योंकि उन्होंने केवल शिव से विवाह का संकल्प लिया था। उनकी सखी ने उन्हें हर लिया – "हरतालिका" का अर्थ है "सखी का अ… पूर्ण आख्यायिका वाचा →कमी दाखवा ↑
जब देवी पार्वती के पिता हिमालय ने उनका विवाह विष्णु से तय किया, पार्वती विचलित हुईं क्योंकि उन्होंने केवल शिव से विवाह का संकल्प लिया था। उनकी सखी ने उन्हें हर लिया – "हरतालिका" का अर्थ है "सखी का अपहरण करने वाली"। घने वन में पार्वती ने मिट्टी का शिवलिंग बनाकर कठोर तपस्या की। शिव प्रसन्न होकर प्रकट हुए और पार्वती को पत्नी रूप में स्वीकार किया।
कसे पाळावे
महिलाएँ भाद्रपद शुक्ल तृतीया को कठोर निर्जला व्रत रखती हैं। मिट्टी या रेत से शिव-पार्वती की मूर्ति बनाकर मध्याह्न काल में फूल, बेलपत्र और फलों से पूजा करती हैं। रात भर जागरण करती हैं। अगली सुबह मूर्तियों का विसर्जन किया जाता है।
महत्त्व
हरतालिका तीज हिन्दू महिलाओं का सबसे महत्वपूर्ण व्रतों में से एक है, विशेषकर उत्तर भारत, महाराष्ट्र और राजस्थान में। यह पार्वती की शिव के प्रति अटल भक्ति और स्त्री संकल्प की शक्ति का उत्सव है।
उपवास
सूर्योदय से अगली सुबह तक कठोर निर्जला व्रत। मिट्टी की शिव-पार्वती मूर्तियों के विसर्जन के बाद पारण।