मुंबई · Maharashtra
तुलसी विवाह 2026मुंबई मध्ये
Exact puja times & muhurta computed for Mumbai coordinates (19.08°N, 72.88°E)
महत्त्वाच्या वेळा
उत्सवाची तारीख
Saturday, November 21, 2026
सूर्योदय
06:49
सूर्यास्त
17:59
ही तारीख का?
Tulsi Vivah follows the Udaya Tithi rule – the festival is observed on the day when the required tithi prevails at sunrise. This is the default Dharmasindhu convention for festivals without a special time-window requirement.
पूजा विधी
आवश्यक साहित्य
- तुळशीचे रोप (पवित्र तुळस)
- शाळीग्राम दगड (जीवाश्म ॲमोनाईट)
- मंडपाची सजावट (४ खांब असलेला छोटा मंडप)
- उसाचे दांडे (मंडपाच्या खांबांसाठी)
- आंब्याची पाने आणि झेंडूच्या माळा (मंडपासाठी)
पूजेच्या पायऱ्या
- 1
मंडप तयारी
तुळशीच्या रोपाभोवती ऊसाच्या काठ्यांचा खांब म्हणून वापर करून एक छोटा विवाह मंडप (कॅनॉपी) उभारा. आंब्याची पाने, झेंडूच्या ...
- 2
वधू आणि वर तयारी
तुळशीच्या रोपाला (वधू) पाण्याने स्नान घाला आणि लाल चुनरी (वस्त्र), फुले आणि दागिन्यांनी सजवा. शालिग्राम दगड (वर) तुळशीजव...
- 3
गणेश पूजा आणि संकल्प
सर्व हिंदू समारंभांप्रमाणे, अडथळे दूर करण्यासाठी गणेश पूजनाने सुरुवात करा. त्यानंतर, तुळशी विवाहासाठी तिथी, उद्देश आणि द...
फळ (फायदे)
तुळशी विवाह केल्याने कन्यादान (मुलीचे लग्न करून देणे) केल्यासारखेच पुण्य मिळते असे मानले जाते – जे दानाचे सर्वोच्च रूप आहे. यामुळे कौटुंबिक सलोखा, समृद्धी आणि घराला विष्णूचा आशीर्वाद प्राप्त होतो. पद्म पुराणात असे म्हटले आहे की जो तुळशी विवाह करतो, तो पितृऋणातून मुक्त होतो.
गणनेचा पुरावा – पारदर्शक लेखापरीक्षण
देवता
भगवान विष्णु (कृष्ण), तुलसी (वृन्दा)
आख्यायिका आणि इतिहास
तुलसी मूलतः वृन्दा थीं, दैत्य जलन्धर की पतिव्रता पत्नी। विष्णु ने जलन्धर की अजेयता तोड़ने के लिए छल किया, वृन्दा ने विष्णु को पत्थर (शालिग्राम) बनने का शाप दिया। विष्णु ने उन्हें पवित्र तुलसी के रूप म… पूर्ण आख्यायिका वाचा →कमी दाखवा ↑
तुलसी मूलतः वृन्दा थीं, दैत्य जलन्धर की पतिव्रता पत्नी। विष्णु ने जलन्धर की अजेयता तोड़ने के लिए छल किया, वृन्दा ने विष्णु को पत्थर (शालिग्राम) बनने का शाप दिया। विष्णु ने उन्हें पवित्र तुलसी के रूप में पुनर्जन्म का वरदान दिया और प्रतिवर्ष कार्तिक शुक्ल द्वादशी को विवाह का वचन दिया।
कसे पाळावे
तुलसी के पौधे का शालिग्राम या विष्णु/कृष्ण की मूर्ति से विधिवत विवाह कराया जाता है। तुलसी को दुल्हन की तरह साड़ी, फूल और गहनों से सजाया जाता है। गन्ने का मण्डप बनाया जाता है। मन्त्रोच्चारण और सभी विवाह संस्कार किये जाते हैं। यह चातुर्मास का अन्त और हिन्दू विवाह मौसम का आरम्भ है।
महत्त्व
तुलसी विवाह चार माह के चातुर्मास काल का अन्त और हिन्दू विवाह तथा शुभ कार्यों के पुनः आरम्भ का संकेत है। यह तुलसी (भक्ति) और विष्णु (दिव्यता) के शाश्वत बन्धन का प्रतीक है।