जय जय श्री शनिदेव, भक्तन हितकारी।
सूरज के पुत्र प्रभु, छाया महतारी॥
जय जय श्री शनिदेव॥
श्याम शरीर विशाल अंग, धारत हैं मुण्डमाला।
तन में सदा काला वस्त्र, निर्मल शनि बाला॥
जय जय श्री शनिदेव॥
कर में सूर्य छत्र है, विराजत कृत लोका।
करत सदा न्याय, शनि दण्ड सब शोका॥
जय जय श्री शनिदेव॥
परनारी को माता जानत, पर धन नहिं चाहो।
पण्डित हो धर्मात्मा, आदि मनु जानो॥
जय जय श्री शनिदेव॥
श्री शनिदेव की आरती, जो कोई नर गावे।
कहत कवि सुन्दरदास, मन वांछित फल पावे॥
जय जय श्री शनिदेव॥
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महत्व और पाठ विधि
Shani Dev Aarti is recited on Saturdays, which is Shani's day. Shani (Saturn) is the planet of justice, karma, and discipline. Those undergoing Sade Sati (7.5-year Saturn transit), Shani Mahadasha, or Dhaiyya should recite this aarti regularly. Offering mustard oil, black sesame, and lighting a sesame oil lamp on Saturdays are traditional remedies.