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7 प्रकार के चौघड़िया, साप्ताहिक क्रम और दैनिक समय-निर्धारण में उपयोग
चौघड़िया (चौघड़ी) पारम्परिक वैदिक समय-विभाजन प्रणाली है जो प्रत्येक दिन और रात को लगभग 90 मिनट की 8 अवधियों में बाँटती है। शब्द गुजराती से आया है: 'चो' (चार) + 'घड़ी' (24 मिनट की पारम्परिक इकाई)। होरा (जो 60 मिनट की निश्चित अवधि है) के विपरीत, चौघड़िया दिन की लम्बाई के अनुसार बढ़ती-घटती है – ग्रीष्म में दिन के चौघड़िया लम्बे और शीतकाल में छोटे होते हैं। यह प्रणाली गुजरात, राजस्थान और पश्चिमी भारत में विशेष रूप से लोकप्रिय है।
प्रत्येक चौघड़िया 7 प्रकारों में से एक है, प्रत्येक का स्वामी ग्रह और विशिष्ट गुण है। शुभता क्रम: (1) अमृत (चन्द्र) – सर्वाधिक शुभ, यात्रा और व्यापार के लिए उत्तम। (2) शुभ (गुरु) – धार्मिक कार्य, शिक्षा, विवाह कार्य के लिए अनुकूल। (3) लाभ (बुध) – वित्तीय लेनदेन, व्यापार के लिए अच्छा। (4) चर (शुक्र) – सामान्य, यात्रा और नित्यकर्म के लिए। (5) रोग (मंगल) – अशुभ, संघर्ष से जुड़ा; केवल युद्ध या शल्य-क्रिया के लिए। (6) काल (शनि) – अशुभ, विलम्ब और बाधाओं से जुड़ा। (7) उद्वेग (सूर्य) – अशुभ, तनाव से जुड़ा; केवल सरकारी कार्य के लिए।
दिन का पहला चौघड़िया सदैव उस दिन के स्वामी ग्रह से शासित होता है: रविवार उद्वेग (सूर्य) से, सोमवार अमृत (चन्द्र) से, मंगलवार रोग (मंगल) से, बुधवार लाभ (बुध) से, गुरुवार शुभ (गुरु) से, शुक्रवार चर (शुक्र) से, शनिवार काल (शनि) से। पहली अवधि के बाद शेष 7 दिन-अवधियाँ एक निश्चित क्रम में चक्रित होती हैं। अवधि की लम्बाई आपके स्थान के सूर्योदय-सूर्यास्त पर निर्भर करती है।
| वार | पहला चौघड़िया |
|---|---|
| रविवार | उद्वेग |
| सोमवार | अमृत |
| मंगलवार | रोग |
| बुधवार | लाभ |
| गुरुवार | शुभ |
| शुक्रवार | चर |
| शनिवार | काल |
चौघड़िया 'त्वरित सन्दर्भ' समय-प्रणाली है – पूर्ण मुहूर्त विश्लेषण से सरल और दैनिक कार्यों के लिए आदर्श। व्यापारिक निर्णयों के लिए लाभ या शुभ चुनें। यात्रा के लिए अमृत या चर। नया उपक्रम आरम्भ करने के लिए शुभ या अमृत। रोग, काल, उद्वेग में महत्त्वपूर्ण कार्य न करें। महत्त्वपूर्ण सूक्ष्मता: अशुभ चौघड़िया भी अभिजित मुहूर्त या अमृत काल में हो तो उचित हो सकता है। इसके विपरीत, अमृत चौघड़िया भी राहु काल, यमगण्ड या वर्ज्यम में हो तो सावधानी बरतें।
लाभ, शुभ
अमृत, चर
शुभ, अमृत
अमृत चौघड़िया भी राहु काल, यमगण्ड या वर्ज्यम में हो तो सावधानी बरतें – अशुभ आवरण प्राथमिकता पर है।
चौघड़िया और होरा दोनों दिन को ग्रह अवधियों में बाँटते हैं, किन्तु मुख्य अन्तर हैं। होरा 60 मिनट की निश्चित अवधियाँ (24 होरा प्रतिदिन) कैल्डियन क्रम पर आधारित। चौघड़िया दिन/रात की वास्तविक अवधि पर आधारित 8 अवधियाँ, अतः प्रत्येक अवधि चरणशील। होरा सम्पूर्ण भारत और पश्चिमी ज्योतिष में प्रचलित। चौघड़िया मुख्यतः गुजरात और राजस्थान में। सर्वोत्तम विधि: दोनों देखें – यदि दोनों शुभ दर्शाएँ तो विश्वास दृढ़ है।