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आपकी चन्द्र राशि से प्रत्येक भाव में गोचर करते हुए मन्दगति ग्रह आपके वर्षों को कैसे आकार देते हैं।
वैदिक ज्योतिष में गोचर चन्द्र राशि से पढ़ा जाता है – पश्चिमी ज्योतिष की तरह सूर्य राशि से नहीं।
मन्दगति ग्रह सर्वाधिक महत्वपूर्ण: शनि ~2.5 वर्ष, गुरु ~1 वर्ष, राहु-केतु ~1.5 वर्ष एक राशि में।
भाव-दर-भाव प्रभाव देखने के लिए ग्रह चुनें
आत्म-दबाव, स्वास्थ्य सतर्कता, पहचान संकट। जिम्मेदारी का बोझ सीधे कंधों पर। शरीर भारी।
आर्थिक तनाव, वाणी कठोर, पारिवारिक तनाव। बचत की परीक्षा। शब्दों में सावधानी – शनि वाणी को तीखा बनाता है।
संघर्ष से साहस बढ़ता है, कठिन परिश्रम के बाद प्रयास सफल, छोटी यात्राएँ उत्पादक। भाई-बहन सहायक या आत्मनिर्भरता।
घरेलू अशान्ति, माता के स्वास्थ्य की चिन्ता, सम्पत्ति विवाद, गहरी आन्तरिक चिन्ता। घर बोझ लगता है।
सन्तान समस्या, शिक्षा विलम्बित, प्रेम अवरुद्ध, सट्टे में हानि। रचनात्मक अभिव्यक्ति दबी।
उत्कृष्ट – शत्रुओं पर विजय, अनुशासन से स्वास्थ्य सुधार, ऋण मुक्ति, कानूनी विजय। शनि प्रयास के भाव में कठिन परिश्रम का पुरस्कार देता है।
विवाह की कड़ी परीक्षा, साझेदारी तनावपूर्ण, व्यापार पुनर्गठन। कमजोर सम्बन्ध समाप्त, मजबूत गहरा।
दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्याएँ, छिपे मामले उजागर, बाध्य परिवर्तन। बीमा/विरासत जटिलताएँ।
आस्था की परीक्षा, पिता को कठिनाइयाँ, लम्बी यात्राएँ बाधित, धर्म पर प्रश्न। संदेह से आध्यात्मिक विकास।
करियर शिखर या करियर संकट – अष्टकवर्ग पर निर्भर। कठिन परिश्रम सदा फलदायक। अर्जित अधिकार बढ़ता है। सार्वजनिक छवि जाँच।
उत्कृष्ट – आय स्थिर रूप से बढ़ती है, मित्र सहायक, इच्छाएँ पूर्ण। सर्वश्रेष्ठ शनि गोचर। बड़े भाई-बहन समृद्ध।
व्यय तीव्र वृद्धि, नींद बाधित, विदेश यात्रा सम्भव पर थकाऊ। अस्पताल का जोखिम। साढ़ेसाती का आरम्भ (यदि चन्द्र अगली राशि में)।
वैदिक ज्योतिष की सबसे विश्वसनीय समय-निर्धारण तकनीक: घटनाएँ तभी घटित होती हैं जब गुरु और शनि दोनों एक साथ एक ही भाव को सक्रिय करें।
हमारे गोचर पृष्ठ पर देखें कि गुरु और शनि आपकी चन्द्र राशि से कौन से भाव सक्रिय कर रहे हैं।
विवाह
गुरु + शनि → 7th
करियर
गुरु + शनि → 10th
सन्तान
गुरु + शनि → 5th