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कृष्ण तृतीया गौरी को समर्पित है, जो पार्वती का एक रूप हैं, घटते हुए चरण के दौरान आंतरिक शक्ति और शुद्धि पर जोर देती हैं। यह तिथि तपस्या, आत्म-चिंतन और आंतरिक संघर्षों को सुलझाने के लिए उपयुक्त मानी जाती है। यह आध्यात्मिक अनुशासन और भावनात्मक शुद्धि के उद्देश्य से गतिविधियों का समर्थन करती है। कुछ क्षेत्रों में एक पारंपरिक अनुष्ठान कजरी तीज है, जहाँ महिलाएँ वैवाहिक आनंद और पारिवारिक कल्याण के लिए व्रत रखती हैं और प्रार्थना करती हैं, जिसमें अक्सर शुद्धि के लिए अनुष्ठान शामिल होते हैं।
कृष्ण तृतीया, देवी गौरी को समर्पित है, जिसे वैवाहिक सद्भाव और कल्याण के लिए मनाया जाता है। महिलाएँ गौरी व्रत कर सकती हैं, लाल फूल और कुमकुम अर्पित करते हुए। पारिवारिक संबंधों को मजबूत करने के लिए यह शुभ है। कठोर शब्दों, झगड़ों, या यात्राएँ शुरू करने से बचें। प्याज, लहसुन, या मांसाहारी भोजन का सेवन करने से बचें। पारंपरिक मंत्र 'ॐ गौर्यै नमः' या 'ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं गौरी देव्यै नमः' है। दान के लिए, विवाहित महिलाओं को 'सुहाग सामग्री' (सिंदूर, चूड़ियाँ, बिंदी) या ब्राह्मणों को लाल वस्त्र अर्पित करना अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है, जो रिश्तों में शांति और समृद्धि को बढ़ावा देता है।
शुक्रवार का स्वामी शुक्र (Shukra) है, जो प्रेम, सौंदर्य और भौतिक सुख-सुविधाओं का प्रतीक है। इसका स्वभाव कलात्मक, आकर्षक और कूटनीतिक है, जो रिश्तों और विलासिता को प्रभावित करता है। यह दिन कलात्मक कार्यों, रोमांटिक प्रयासों, विलासिता की वस्तुएं खरीदने और सामाजिक समारोहों के लिए शुभ होता है। यह आमतौर पर उन गतिविधियों के लिए अनुकूल होता है जो आनंद और सद्भाव लाती हैं। भक्त अक्सर देवी लक्ष्मी की पूजा करते हैं या संतोषी माँ व्रत (Santoshi Ma Vrat) रखते हैं, शांति, समृद्धि और इच्छाओं की पूर्ति की कामना करते हैं। सफेद फूल या मिठाई चढ़ाना और सफेद कपड़े पहनना शुक्र को प्रसन्न करने के लिए सामान्य प्रथाएं हैं।
उज्जैन में शुक्रवार, 6 मार्च 2026 को तिथि तृतीया, नक्षत्र हस्त, योग गण्ड और करण विष्टि है। सूर्योदय 06:44, सूर्यास्त 18:32। राहु काल 11:09 से 12:38, इस दौरान नए शुभ कार्य न आरम्भ करें।
| तिथि | तृतीया |
| नक्षत्र | हस्त |
| योग | गण्ड |
| करण | विष्टि |
| वार | शुक्रवार |
| सूर्योदय | 06:44 |
| सूर्यास्त | 18:32 |
| राहु काल | 11:09 – 12:38 |
| अभिजित मुहूर्त | 12:14 – 13:01 |
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हर शब्द के पीछे की शास्त्रीय परिभाषा, गणितीय आधार और व्यावहारिक प्रयोग।
चान्द्र दिवस — सूर्य-चन्द्र के बीच 12° का अन्तर। प्रति मास 30।
चान्द्र भवन — 27 तारकीय भाग, प्रत्येक 13°20' का।
27 सूर्य-चन्द्र संयोग; (सूर्य+चन्द्र) ÷ 13°20'।
अर्ध-तिथि (6° अन्तर)। विष्टि सहित 11 करण।
वार और स्वामी ग्रह। जूलियन दिवस से निर्धारित।
अशुभ 90 मिनट का काल। वार के अनुसार स्थान बदलता है।
महत्वपूर्ण कार्यों के लिए शुभ काल।