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आज शुक्रवार को उज्जैन के लिए दिन और रात के गौरी पंचांग समय। अमृत, सिद्ध, लाभ, धन, सुगम (शुभ) में नए कार्य करें; मरण, रोग, शोक (अशुभ) से बचें।
गौरी पंचांग सूर्योदय और सूर्यास्त के आधार पर गणना किया जाता है, इसलिए प्रत्येक शहर के लिए समय भिन्न होता है। नीचे इंटरैक्टिव टूल में अपना शहर चुनें।
| गौरी पंचांग | समय | स्वभाव |
|---|---|---|
| सिद्ध | 6:07 AM – 7:42 AM | शुभ |
| मरण | 7:42 AM – 9:17 AM | अशुभ |
| रोग | 9:17 AM – 10:52 AM | अशुभ |
| लाभ | 10:52 AM – 12:27 PM | शुभ |
| धन | 12:27 PM – 2:03 PM | शुभ |
| सुगम | 2:03 PM – 3:38 PM | शुभ |
| शोक | 3:38 PM – 5:13 PM | अशुभ |
| अमृत | 5:13 PM – 6:48 PM | शुभ |
| गौरी पंचांग | समय | स्वभाव |
|---|---|---|
| धन | 6:48 PM – 8:13 PM | शुभ |
| सुगम | 8:13 PM – 9:38 PM | शुभ |
| शोक | 9:38 PM – 11:03 PM | अशुभ |
| अमृत | 11:03 PM – 12:27 AM | शुभ |
| सिद्ध | 12:27 AM – 1:52 AM | शुभ |
| मरण | 1:52 AM – 3:17 AM | अशुभ |
| रोग | 3:17 AM – 4:42 AM | अशुभ |
| लाभ | 4:42 AM – 6:07 AM | शुभ |
गौरी पंचांग (गौरी नल्ल नेरम) दक्षिण भारत में — तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और केरल — व्यापक रूप से प्रयुक्त वैदिक काल-विभाजन प्रणाली है। यह उत्तरी भारत में प्रचलित चौघड़िया का दक्षिण भारतीय समकक्ष है। प्रत्येक दिन और रात को 8 बराबर भागों में बाँटा जाता है, कुल 16 काल-खण्ड।
अमृत (अत्यन्त शुभ — अमृत), सिद्ध (कार्य-सिद्धि), लाभ (लाभ), धन (धन), सुगम (सुख-सुविधा) — ये पाँच शुभ गौरी काल हैं। मरण (मृत्यु-सूचक), रोग (रोग), शोक (दुःख) — ये तीन अशुभ हैं। चौघड़िया की भाँति कोई "चर" (तटस्थ) काल नहीं — गौरी में प्रत्येक काल शुभ या अशुभ।
दिन का गौरी: सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को 8 बराबर भागों में बाँटा जाता है (प्रत्येक लगभग 90 मिनट)। रात का गौरी: सूर्यास्त से अगले दिन के सूर्योदय तक 8 भागों में। प्रत्येक वार के लिए प्रारम्भिक काल अलग होता है — यह उस वार के ग्रह स्वामी पर निर्भर करता है।
दोनों ही वैदिक काल-विभाजन प्रणालियाँ हैं, परन्तु अंतर हैं: (1) गौरी में 8 भिन्न काल-नाम, चौघड़िया में 7 (चर दो बार)। (2) गौरी में कोई "तटस्थ" वर्ग नहीं। (3) गौरी का वार-चक्र अलग है। (4) गौरी दक्षिण भारत की पारम्परिक प्रणाली; चौघड़िया उत्तर-पश्चिम भारत में अधिक प्रचलित।
शुक्रवार, 28 अगस्त 2026
चेन्नई
05:57 – 07:30
07:30 – 09:03
09:03 – 10:37
10:37 – 12:10
12:10 – 13:43
13:43 – 15:16
15:16 – 16:49
16:49 – 18:22
18:22 – 19:49
19:49 – 21:16
21:16 – 22:43
22:43 – 00:10
00:10 – 01:37
01:37 – 03:03
03:03 – 04:30
04:30 – 05:57
गौरी पंचांग (जिसे गौरी नल्ल नेरम भी कहा जाता है) दक्षिण भारत में प्रचलित चौघड़िया का समकक्ष है — एक वैदिक काल-विभाजन प्रणाली जो प्रत्येक दिन और रात को 8 बराबर भागों में बाँटती है। पाँच काल शुभ हैं (अमृत, सिद्ध, लाभ, धन, सुगम) और तीन अशुभ (मरण, रोग, शोक)। यह तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और केरल में नए कार्य, यात्रा, व्यापार और अनुष्ठान के लिए शुभ समय चुनने में व्यापक रूप से प्रयुक्त है।
अमृत — सबसे शुभ काल, सभी नए कार्यों और महत्वपूर्ण आरम्भ के लिए उत्तम
कार्य-सिद्धि — महत्वपूर्ण कार्य पूरा करने, अनुबंध हस्ताक्षर, परीक्षा के लिए उत्कृष्ट
लाभ — व्यापार, वाणिज्य, वित्तीय निर्णयों के लिए सर्वश्रेष्ठ
धन — निवेश, खरीद, बैंकिंग गतिविधियों के लिए शुभ
सुख-सुविधा — सौम्य और सहायक काल, यात्रा और सामाजिक कार्यों के लिए
मृत्यु-सूचक — दृढ़ता से अशुभ; चिकित्सा प्रक्रिया, शल्य, यात्रा से बचें
रोग — स्वास्थ्य सम्बन्धी निर्णय, नया आहार, तनावपूर्ण गतिविधियों से बचें
दुःख — विवाद, अनुबंध हस्ताक्षर, भावनात्मक प्रतिबद्धताओं से बचें
नए कार्य आरम्भ या नए घर में प्रवेश के लिए — अमृत सार्वभौमिक रूप से सबसे शक्तिशाली माना जाता है। व्यापार और वित्तीय गतिविधियाँ लाभ या धन काल में सर्वोत्तम। यात्रा और पारिवारिक समारोह — सुगम काल में। परीक्षा, प्रमाणपत्र, महत्वपूर्ण अनुबंध — सिद्ध काल में सबसे मजबूत सहायता। मरण, रोग, शोक काल में कोई भी शुभ कार्य न करें — ये काल विश्राम, नियमित रखरखाव, या जो आप समाप्त करना चाहते हैं उसके लिए उपयुक्त हैं।