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शुक्ल पूर्णिमा, पूर्णिमा का दिन, चंद्र द्वारा शासित होता है, जो चंद्रमा देवता हैं, मन, भावनाओं और पवित्रता का प्रतीक हैं। यह तिथि आध्यात्मिक प्रथाओं, दान, पवित्र नदियों में स्नान और पूर्णिमा के अनुष्ठान करने के लिए अत्यंत शुभ है। यह मानसिक स्पष्टता और आध्यात्मिक ऊर्जा को बढ़ाती है। एक महत्वपूर्ण अनुष्ठान सत्यनारायण पूजा है, जो सत्य, समृद्धि और इच्छाओं की पूर्ति के लिए भगवान विष्णु के आशीर्वाद का आह्वान करने के लिए की जाती है।
शुक्ल पूर्णिमा, पूर्णिमा का दिन, चंद्र देव (चंद्रमा देवता) और भगवान विष्णु को समर्पित है। भक्त पूर्णिमा व्रत का पालन करते हैं और मानसिक शांति तथा समृद्धि के लिए सत्यनारायण पूजा करते हैं। आध्यात्मिक अभ्यास, दान, और नए कार्य शुरू करने के लिए यह अत्यंत शुभ है। मांस, शराब का सेवन करने, या विवादों में उलझने से बचें। बाल या नाखून काटने से बचें। 'ॐ चंद्राय नमः' या 'ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चंद्रमसे नमः' मंत्र का जाप करना चाहिए। दान में ब्राह्मणों या जरूरतमंदों को दूध, चावल, सफेद वस्त्र, या चांदी अर्पित करना शामिल है, जो भावनात्मक संतुलन और प्रचुरता के लिए आशीर्वाद प्राप्त करता है।
रविवार का स्वामी सूर्य (Surya) है, जो आत्मा, अधिकार और जीवन शक्ति का प्रतिनिधित्व करता है। इसका स्वभाव उग्र, शाही और प्रकाशमान है, जो नेतृत्व और स्वास्थ्य को दर्शाता है। यह दिन सरकारी कार्यों, वरिष्ठों से आशीर्वाद लेने और नए उद्यम शुरू करने के लिए शुभ होता है। यह आमतौर पर साहस और आत्मविश्वास की आवश्यकता वाले कार्यों के लिए अनुकूल होता है। सूर्य का सम्मान करने के लिए, भक्त सूर्य नमस्कार (Surya Namaskara) करते हैं और सूर्योदय के समय तांबे के पात्र से जल चढ़ाते हैं, अच्छे स्वास्थ्य और सफलता की कामना करते हैं। रविवार को उपवास भी जीवन शक्ति और समृद्धि के लिए रखा जाता है।
उज्जैन में रविवार, 31 मई 2026 को तिथि पूर्णिमा, नक्षत्र अनुराधा, योग सिद्ध और करण बव है। सूर्योदय 05:40, सूर्यास्त 19:08। राहु काल 17:27 से 19:08, इस दौरान नए शुभ कार्य न आरम्भ करें।
| तिथि | पूर्णिमा |
| नक्षत्र | अनुराधा |
| योग | सिद्ध |
| करण | बव |
| वार | रविवार |
| सूर्योदय | 05:40 |
| सूर्यास्त | 19:08 |
| राहु काल | 17:27 – 19:08 |
| अभिजित मुहूर्त | 11:57 – 12:51 |
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हर शब्द के पीछे की शास्त्रीय परिभाषा, गणितीय आधार और व्यावहारिक प्रयोग।
चान्द्र दिवस — सूर्य-चन्द्र के बीच 12° का अन्तर। प्रति मास 30।
चान्द्र भवन — 27 तारकीय भाग, प्रत्येक 13°20' का।
27 सूर्य-चन्द्र संयोग; (सूर्य+चन्द्र) ÷ 13°20'।
अर्ध-तिथि (6° अन्तर)। विष्टि सहित 11 करण।
वार और स्वामी ग्रह। जूलियन दिवस से निर्धारित।
अशुभ 90 मिनट का काल। वार के अनुसार स्थान बदलता है।
महत्वपूर्ण कार्यों के लिए शुभ काल।