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कृष्ण द्वितीया ब्रह्मा द्वारा शासित होती है, जो सृष्टिकर्ता हैं, आत्मनिरीक्षण और भविष्य की कार्रवाइयों की सावधानीपूर्वक योजना को प्रभावित करते हैं। यह तिथि विचारशील विचार की आवश्यकता वाले कार्यों, पिछले प्रयासों की समीक्षा करने और भविष्य के चक्रों की तैयारी के लिए उपयुक्त मानी जाती है। यह आमतौर पर भव्य उद्घाटन या नई दीर्घकालिक प्रतिबद्धताओं के लिए आदर्श नहीं है। भक्त ऊर्जा के इस घटते हुए समय में शांत चिंतन में संलग्न हो सकते हैं या व्यक्तिगत विकास पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं।
कृष्ण द्वितीया, ब्रह्मा से संबंधित है, ज्ञान और बुद्धि पर ध्यान केंद्रित करने का दिन है। यह शैक्षिक गतिविधियों या रचनात्मक कार्यों को जारी रखने के लिए उपयुक्त है। दूध और फलों पर उपवास करना लाभकारी होता है। तर्क-वितर्क करने, बड़े निर्माण कार्य शुरू करने, या कानूनी मामलों को शुरू करने से बचना चाहिए। शराब, मांस, या तीखे भोजन का सेवन करने से बचें। बौद्धिक स्पष्टता के लिए 'ॐ ब्रह्मणे नमः' या सरस्वती मंत्र जैसे 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं सरस्वत्यै नमः' का जाप करना चाहिए। दान में आमतौर पर छात्रों को किताबें, शैक्षिक सामग्री, या विद्वानों और ब्राह्मणों को सफेद वस्त्र दान करना शामिल है, जो सीखने और आध्यात्मिक विकास को बढ़ावा देता है।
मंगलवार का स्वामी मंगल (Mangala) है, जो ऊर्जा, साहस और दृढ़ता का प्रतीक है। इसका स्वभाव उग्र, गतिशील और सुरक्षात्मक है, जो शारीरिक शक्ति और संपत्ति संबंधी मामलों को प्रभावित करता है। यह दिन शक्ति की आवश्यकता वाले कार्यों, विवादों को सुलझाने और भूमि या इंजीनियरिंग से संबंधित मामलों के लिए शुभ होता है। यह आमतौर पर सर्जिकल प्रक्रियाओं या प्रतिस्पर्धी प्रयासों के लिए अनुकूल होता है। भक्त अक्सर हनुमान चालीसा (Hanuman Chalisa) का पाठ करते हैं और भगवान हनुमान की पूजा करते हैं ताकि मंगल के चुनौतीपूर्ण प्रभावों को कम किया जा सके और प्रतिकूलताओं से शक्ति, साहस और सुरक्षा प्राप्त की जा सके। बाधाओं को दूर करने के लिए उपवास भी रखा जाता है।
उज्जैन में मंगलवार, 2 जून 2026 को तिथि द्वितीया, नक्षत्र मूल, योग साध्य और करण तैतिल है। सूर्योदय 05:40, सूर्यास्त 19:09। राहु काल 15:46 से 17:28, इस दौरान नए शुभ कार्य न आरम्भ करें।
| तिथि | द्वितीया |
| नक्षत्र | मूल |
| योग | साध्य |
| करण | तैतिल |
| वार | मंगलवार |
| सूर्योदय | 05:40 |
| सूर्यास्त | 19:09 |
| राहु काल | 15:46 – 17:28 |
| अभिजित मुहूर्त | 11:57 – 12:51 |
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हर शब्द के पीछे की शास्त्रीय परिभाषा, गणितीय आधार और व्यावहारिक प्रयोग।
चान्द्र दिवस — सूर्य-चन्द्र के बीच 12° का अन्तर। प्रति मास 30।
चान्द्र भवन — 27 तारकीय भाग, प्रत्येक 13°20' का।
27 सूर्य-चन्द्र संयोग; (सूर्य+चन्द्र) ÷ 13°20'।
अर्ध-तिथि (6° अन्तर)। विष्टि सहित 11 करण।
वार और स्वामी ग्रह। जूलियन दिवस से निर्धारित।
अशुभ 90 मिनट का काल। वार के अनुसार स्थान बदलता है।
महत्वपूर्ण कार्यों के लिए शुभ काल।