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शुक्ल तृतीया गौरी को समर्पित है, जो पार्वती का एक रूप हैं, वैवाहिक सद्भाव, समृद्धि और शुभता का प्रतीक हैं। यह तिथि विवाह समारोहों, सगाई और पारिवारिक कल्याण के लिए आशीर्वाद मांगने के लिए अत्यधिक अनुकूल है। यह रिश्तों में स्थिरता और खुशी को बढ़ावा देती है। एक महत्वपूर्ण पारंपरिक अनुष्ठान गणगौर उत्सव है, विशेष रूप से राजस्थान में, जहाँ विवाहित महिलाएँ अपने पतियों की लंबी उम्र के लिए गौरी की पूजा करती हैं और अविवाहित महिलाएँ उपयुक्त जीवनसाथी के लिए प्रार्थना करती हैं।
शुक्ल तृतीया, देवी गौरी को समर्पित है, जिसे वैवाहिक सुख, संतान और कल्याण के लिए मनाया जाता है। महिलाएँ अक्सर गौरी व्रत करती हैं, कुमकुम लगाती हैं और देवी को लाल फूल अर्पित करती हैं। सगाई जैसे समारोह शुरू करना या आभूषण खरीदना शुभ होता है। कठोर शब्दों, झगड़ों, या लंबी यात्राएँ शुरू करने से बचें। प्याज, लहसुन, या मांसाहारी भोजन का सेवन करने से बचें। पारंपरिक मंत्र 'ॐ गौर्यै नमः' या 'ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं गौरी देव्यै नमः' है। दान के लिए, विवाहित महिलाओं को 'सुहाग सामग्री' (सिंदूर, चूड़ियाँ, बिंदी) या ब्राह्मणों को लाल वस्त्र अर्पित करना अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है, जो सद्भाव और समृद्धि सुनिश्चित करता है।
बुधवार का स्वामी बुध (Budha) है, जो बुद्धि, संचार और व्यावसायिक कौशल का प्रतीक है। इसका स्वभाव अनुकूलनीय, मजाकिया और विश्लेषणात्मक है, जो शिक्षा और व्यापार को प्रभावित करता है। यह दिन नई पढ़ाई शुरू करने, अनुबंधों पर हस्ताक्षर करने, व्यावसायिक लेनदेन और बौद्धिक कार्यों के लिए अत्यधिक शुभ होता है। यह आमतौर पर संचार, लेखन और यात्रा के लिए अनुकूल होता है। भक्त अक्सर बुधवार को भगवान विष्णु या विठोबा की पूजा करते हैं, ज्ञान, समृद्धि और प्रयासों में सफलता की कामना करते हैं। हरी मूंग चढ़ाना या विष्णु सहस्रनाम (Vishnu Sahasranama) का पाठ करना आशीर्वाद के लिए सामान्य प्रथाएं हैं।
उज्जैन में बुधवार, 17 जून 2026 को तिथि तृतीया, नक्षत्र पुनर्वसु, योग ध्रुव और करण तैतिल है। सूर्योदय 05:41, सूर्यास्त 19:14। राहु काल 12:27 से 14:09, इस दौरान नए शुभ कार्य न आरम्भ करें।
| तिथि | तृतीया |
| नक्षत्र | पुनर्वसु |
| योग | ध्रुव |
| करण | तैतिल |
| वार | बुधवार |
| सूर्योदय | 05:41 |
| सूर्यास्त | 19:14 |
| राहु काल | 12:27 – 14:09 |
| अभिजित मुहूर्त | 12:00 – 12:54 |
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हर शब्द के पीछे की शास्त्रीय परिभाषा, गणितीय आधार और व्यावहारिक प्रयोग।
चान्द्र दिवस — सूर्य-चन्द्र के बीच 12° का अन्तर। प्रति मास 30।
चान्द्र भवन — 27 तारकीय भाग, प्रत्येक 13°20' का।
27 सूर्य-चन्द्र संयोग; (सूर्य+चन्द्र) ÷ 13°20'।
अर्ध-तिथि (6° अन्तर)। विष्टि सहित 11 करण।
वार और स्वामी ग्रह। जूलियन दिवस से निर्धारित।
अशुभ 90 मिनट का काल। वार के अनुसार स्थान बदलता है।
महत्वपूर्ण कार्यों के लिए शुभ काल।