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कृष्ण नवमी दुर्गा द्वारा शासित होती है, जो शक्ति और सुरक्षा की देवी हैं। यह तिथि घटते हुए काल के दौरान दिव्य सुरक्षा मांगने, विरोधियों पर विजय पाने और आध्यात्मिक संकल्प को मजबूत करने के लिए अनुकूल मानी जाती है। यह स्वयं को नुकसान से बचाने के उद्देश्य से गतिविधियों का समर्थन करती है। जबकि यह किसी सार्वभौमिक त्योहार से चिह्नित नहीं है, भक्त चुनौतीपूर्ण समय में शक्ति और सुरक्षा के लिए दुर्गा से प्रार्थना कर सकते हैं।
कृष्ण नवमी, देवी दुर्गा को समर्पित है, जिसे शक्ति, विजय और सुरक्षा के लिए मनाया जाता है। भक्त दुर्गा पूजा करते हैं, दुर्गा सप्तशती का पाठ करते हैं, और लाल फूल अर्पित करते हैं। नवमी व्रत का पालन करना अत्यंत पुण्यकारी होता है। विरोधियों के खिलाफ दिव्य हस्तक्षेप की तलाश करने और चुनौतियों पर काबू पाने के लिए यह शुभ है। आलस्य, नए रिश्ते शुरू करने, या बड़े वित्तीय लेनदेन में उलझने से बचें। मांस, शराब, या प्याज/लहसुन का सेवन करने से बचें। 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चे' मंत्र या दुर्गा चालीसा का पाठ करना चाहिए। दान में कन्याओं (छोटी लड़कियों) या महिलाओं को लाल वस्त्र, मिठाइयाँ, या भोजन अर्पित करना शामिल है, जो शक्ति और साहस के लिए आशीर्वाद प्राप्त करता है।
शनिवार का स्वामी शनि (Shani) है, जो अनुशासन, कर्म और दीर्घायु का प्रतिनिधित्व करता है। इसका स्वभाव गंभीर, धैर्यवान और कर्म-संबंधी है, जो कड़ी मेहनत और न्याय को प्रभावित करता है। यह दिन दीर्घकालिक योजना, आध्यात्मिक अनुशासन और धर्मार्थ कार्यों के लिए शुभ होता है। यह आमतौर पर धैर्य और दृढ़ता की आवश्यकता वाले कार्यों के लिए अनुकूल होता है, लेकिन अक्सर नए उद्यम शुरू करने या यात्रा के लिए कम शुभ माना जाता है। भक्त भगवान शनि की पूजा करते हैं ताकि साढ़े साती (Sade Sati) जैसे चुनौतीपूर्ण प्रभावों को कम किया जा सके, अक्सर सुरक्षा और शक्ति के लिए हनुमान चालीसा (Hanuman Chalisa) का पाठ करते हैं। उपवास और काले तिल या तेल चढ़ाना सामान्य प्रथाएं हैं।
उज्जैन में शनिवार, 5 सितंबर 2026 को तिथि नवमी, नक्षत्र मृगशिरा, योग वज्र और करण तैतिल है। सूर्योदय 06:10, सूर्यास्त 18:40। राहु काल 09:17 से 10:51, इस दौरान नए शुभ कार्य न आरम्भ करें।
| तिथि | नवमी |
| नक्षत्र | मृगशिरा |
| योग | वज्र |
| करण | तैतिल |
| वार | शनिवार |
| सूर्योदय | 06:10 |
| सूर्यास्त | 18:40 |
| राहु काल | 09:17 – 10:51 |
| अभिजित मुहूर्त | 12:00 – 12:50 |
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हर शब्द के पीछे की शास्त्रीय परिभाषा, गणितीय आधार और व्यावहारिक प्रयोग।
चान्द्र दिवस — सूर्य-चन्द्र के बीच 12° का अन्तर। प्रति मास 30।
चान्द्र भवन — 27 तारकीय भाग, प्रत्येक 13°20' का।
27 सूर्य-चन्द्र संयोग; (सूर्य+चन्द्र) ÷ 13°20'।
अर्ध-तिथि (6° अन्तर)। विष्टि सहित 11 करण।
वार और स्वामी ग्रह। जूलियन दिवस से निर्धारित।
अशुभ 90 मिनट का काल। वार के अनुसार स्थान बदलता है।
महत्वपूर्ण कार्यों के लिए शुभ काल।