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कृष्ण एकादशी विष्णु को समर्पित है, जो संरक्षक हैं, ब्रह्मांडीय व्यवस्था और पोषण का प्रतीक हैं। यह तिथि आध्यात्मिक प्रथाओं, उपवास और गहन भक्ति के लिए अत्यंत शुभ है, विशेष रूप से शुद्धि और पैतृक आशीर्वाद के लिए। प्राथमिक अनुष्ठान एकादशी व्रत है, जहाँ भक्त अनाज और अन्य खाद्य पदार्थों से परहेज करते हैं, पापों को धोने और आध्यात्मिक योग्यता प्राप्त करने के लिए विष्णु पर ध्यान करते हैं, अक्सर मुक्ति पर ध्यान केंद्रित करते हुए।
कृष्ण एकादशी, भगवान विष्णु को समर्पित है, आध्यात्मिक शुद्धि के लिए एक अत्यंत शुभ दिन है। भक्त कठोर उपवास रखते हैं, या तो निर्जला (पानी के बिना) या फलाहार (केवल फल), अनाज, दालों और चावल से परहेज करते हुए। विष्णु सहस्रनाम या भगवद गीता का पाठ करना अत्यधिक अनुशंसित है। आध्यात्मिक दीक्षा और गहन ध्यान के लिए यह शुभ है। अनाज, प्याज, लहसुन, या मांसाहारी भोजन का सेवन करने से बचें। दाढ़ी न बनाएँ, नाखून न काटें, या सांसारिक सुखों में लिप्त न हों। शक्तिशाली मंत्र 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' का जाप करना चाहिए। दान में वैष्णव ब्राह्मणों या मंदिरों को अनाज (द्वादशी पर उपवास तोड़ने के बाद), वस्त्र, या धन अर्पित करना शामिल है।
शुक्रवार का स्वामी शुक्र (Shukra) है, जो प्रेम, सौंदर्य और भौतिक सुख-सुविधाओं का प्रतीक है। इसका स्वभाव कलात्मक, आकर्षक और कूटनीतिक है, जो रिश्तों और विलासिता को प्रभावित करता है। यह दिन कलात्मक कार्यों, रोमांटिक प्रयासों, विलासिता की वस्तुएं खरीदने और सामाजिक समारोहों के लिए शुभ होता है। यह आमतौर पर उन गतिविधियों के लिए अनुकूल होता है जो आनंद और सद्भाव लाती हैं। भक्त अक्सर देवी लक्ष्मी की पूजा करते हैं या संतोषी माँ व्रत (Santoshi Ma Vrat) रखते हैं, शांति, समृद्धि और इच्छाओं की पूर्ति की कामना करते हैं। सफेद फूल या मिठाई चढ़ाना और सफेद कपड़े पहनना शुक्र को प्रसन्न करने के लिए सामान्य प्रथाएं हैं।
उज्जैन में शुक्रवार, 4 दिसंबर 2026 को तिथि एकादशी, नक्षत्र हस्त, योग आयुष्मान् और करण बव है। सूर्योदय 06:53, सूर्यास्त 17:40। राहु काल 10:55 से 12:16, इस दौरान नए शुभ कार्य न आरम्भ करें।
| तिथि | एकादशी |
| नक्षत्र | हस्त |
| योग | आयुष्मान् |
| करण | बव |
| वार | शुक्रवार |
| सूर्योदय | 06:53 |
| सूर्यास्त | 17:40 |
| राहु काल | 10:55 – 12:16 |
| अभिजित मुहूर्त | 11:55 – 12:38 |
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हर शब्द के पीछे की शास्त्रीय परिभाषा, गणितीय आधार और व्यावहारिक प्रयोग।
चान्द्र दिवस — सूर्य-चन्द्र के बीच 12° का अन्तर। प्रति मास 30।
चान्द्र भवन — 27 तारकीय भाग, प्रत्येक 13°20' का।
27 सूर्य-चन्द्र संयोग; (सूर्य+चन्द्र) ÷ 13°20'।
अर्ध-तिथि (6° अन्तर)। विष्टि सहित 11 करण।
वार और स्वामी ग्रह। जूलियन दिवस से निर्धारित।
अशुभ 90 मिनट का काल। वार के अनुसार स्थान बदलता है।
महत्वपूर्ण कार्यों के लिए शुभ काल।