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कृष्ण चतुर्दशी शिव को समर्पित है, जो परिवर्तन, विघटन और आध्यात्मिक मुक्ति के देवता हैं। यह तिथि आध्यात्मिक प्रथाओं, तपस्या और सांसारिक मोह से मुक्ति मांगने के लिए अत्यधिक शक्तिशाली मानी जाती है, विशेष रूप से पैतृक अनुष्ठानों के लिए। यह आमतौर पर नए भौतिक उद्यम शुरू करने के लिए अशुभ है। एक पारंपरिक अनुष्ठान मासिक शिवरात्रि है, जहाँ भक्त आध्यात्मिक योग्यता प्राप्त करने, नकारात्मकता को दूर करने और मोक्ष प्राप्त करने के लिए भगवान शिव का व्रत और पूजा करते हैं।
कृष्ण चतुर्दशी, भगवान शिव को समर्पित है, विशेष रूप से महाशिवरात्रि (माघ मास में) के लिए महत्वपूर्ण है। भक्त शिव पूजा करते हैं, बिल्व पत्र, दूध और जल अर्पित करते हैं। आध्यात्मिक अभ्यास, ध्यान, और मोक्ष की तलाश के लिए यह अत्यंत शुभ है। मांस, शराब का सेवन करने, या विवादों में उलझने से बचें। नकारात्मक विचारों या कार्यों से बचें। 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का जाप करना चाहिए। दान में शिव मंदिरों या भक्तों को दूध, जल, बिल्व पत्र, या सफेद वस्त्र अर्पित करना शामिल है। यह दिन उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण है जो गहन आध्यात्मिक संबंध और आंतरिक परिवर्तन की तलाश में हैं।
शुक्रवार का स्वामी शुक्र (Shukra) है, जो प्रेम, सौंदर्य और भौतिक सुख-सुविधाओं का प्रतीक है। इसका स्वभाव कलात्मक, आकर्षक और कूटनीतिक है, जो रिश्तों और विलासिता को प्रभावित करता है। यह दिन कलात्मक कार्यों, रोमांटिक प्रयासों, विलासिता की वस्तुएं खरीदने और सामाजिक समारोहों के लिए शुभ होता है। यह आमतौर पर उन गतिविधियों के लिए अनुकूल होता है जो आनंद और सद्भाव लाती हैं। भक्त अक्सर देवी लक्ष्मी की पूजा करते हैं या संतोषी माँ व्रत (Santoshi Ma Vrat) रखते हैं, शांति, समृद्धि और इच्छाओं की पूर्ति की कामना करते हैं। सफेद फूल या मिठाई चढ़ाना और सफेद कपड़े पहनना शुक्र को प्रसन्न करने के लिए सामान्य प्रथाएं हैं।
उज्जैन में शुक्रवार, 5 फरवरी 2027 को तिथि चतुर्दशी, नक्षत्र उत्तराषाढ़ा, योग सिद्धि और करण शकुनि है। सूर्योदय 07:05, सूर्यास्त 18:16। राहु काल 11:16 से 12:40, इस दौरान नए शुभ कार्य न आरम्भ करें।
| तिथि | चतुर्दशी |
| नक्षत्र | उत्तराषाढ़ा |
| योग | सिद्धि |
| करण | शकुनि |
| वार | शुक्रवार |
| सूर्योदय | 07:05 |
| सूर्यास्त | 18:16 |
| राहु काल | 11:16 – 12:40 |
| अभिजित मुहूर्त | 12:18 – 13:03 |
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हर शब्द के पीछे की शास्त्रीय परिभाषा, गणितीय आधार और व्यावहारिक प्रयोग।
चान्द्र दिवस — सूर्य-चन्द्र के बीच 12° का अन्तर। प्रति मास 30।
चान्द्र भवन — 27 तारकीय भाग, प्रत्येक 13°20' का।
27 सूर्य-चन्द्र संयोग; (सूर्य+चन्द्र) ÷ 13°20'।
अर्ध-तिथि (6° अन्तर)। विष्टि सहित 11 करण।
वार और स्वामी ग्रह। जूलियन दिवस से निर्धारित।
अशुभ 90 मिनट का काल। वार के अनुसार स्थान बदलता है।
महत्वपूर्ण कार्यों के लिए शुभ काल।