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कामदा एकादशी चैत्र शुक्ल एकादशी को पड़ती है। व्रत दशमी सायंकाल से आरम्भ होता है और पूजा एकादशी को मध्याह्न मुहूर्त में की जाती है। यह हिन्दू नववर्ष (विक्रम सम्वत्) की पहली एकादशी है।
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एकादशी को सूर्योदय से पहले उठें। गंगाजल मिश्रित जल से स्नान करें। कामनापूर्ति हेतु निर्जला या फलाहार व्रत रखने का संकल्प लें। जल और अक्षत हाथ में लेकर नाम, गोत्र और उद्देश्य बोलें।
पीले कपड़े से ढकी स्वच्छ वेदी पर विष्णु मूर्ति स्थापित करें। पंचामृत से स्नान कराएँ। चन्दन तिलक लगाएँ। तुलसी, पीले फूल, कुमकुम और अक्षत अर्पित करें। घी का दीपक और धूप जलाएँ।
कामदेव नमस्तुभ्यं सर्वकामप्रदायक। पापं हर सदा विष्णो त्वं हि लोकहितो प्रभो॥
kāmadeva namastubhyaṃ sarvakāmapradāyaka | pāpaṃ hara sadā viṣṇo tvaṃ hi lokahito prabho ||
सभी कामनाओं को पूर्ण करने वाले, आपको नमस्कार। हे विष्णु, सदा पाप हरें – आप संसार के हितकारी हैं, हे प्रभु।
वराह पुराण से कामदा एकादशी व्रत कथा सुनें। यह गन्धर्व ललित और अप्सरा ललिता की कहानी बताती है – कैसे ललित को राक्षस बनने का शाप मिला और ललिता द्वारा भक्तिपूर्वक इस एकादशी व्रत के पालन से मुक्त हुआ।
तुलसी माला पर द्वादशाक्षर विष्णु मंत्र (ॐ नमो भगवते वासुदेवाय) का 108 बार जाप करें। जाप करते हुए अपनी मनोकामना पर ध्यान केन्द्रित रखें – यही कामदा (कामनापूर्ति) का पहलू है।
घी के दीपक और कपूर से आरती करें। अनाज-रहित नैवेद्य – फल, दूध, मेवे और नारियल – अर्पित करें। भक्तों में प्रसाद वितरित करें। अधिकतम लाभ के लिए रात्रि जागरण की सिफारिश है।