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चित्रा (Chitra) नक्षत्र के स्वामी मंगल हैं। देवता: त्वष्टा।
| पाद | English | हिन्दी | தமிழ் | తెలుగు | বাংলা | ಕನ್ನಡ | ગુજરાતી |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| 1 | Pe | पे | பே | పే | পে | ಪೇ | પે |
| 2 | Po | पो | போ | పో | পো | ಪೋ | પો |
| 3 | Ra | रा | ரா | రా | রা | ರಾ | રા |
| 4 | Ri | री | ரி | రి | রি | ರಿ | રિ |
वैदिक परम्परा के अनुसार, बच्चाक नाम ओकर जन्म नक्षत्र पाद सँ संबंधित अक्षर सँ शुरू होबाक चाही। चित्रा नक्षत्र मे जन्म लेनिहार बच्चा सभक लेल, नाम केर पहिल अक्षर जन्मक समय चन्द्रमाक नक्षत्रक पाद (भाग) सँ निर्धारित होइत अछि। ई प्रथा, जकरा नामकरण कहल जाइत अछि, बच्चाक नाम केँ ओकर ब्रह्मांडीय कंपन सँ जोड़ैत अछि।
सटीक अक्षर निर्धारित करबाक लेल, अहाँ केँ बच्चाक जन्म तिथि, समय आ स्थानक आवश्यकता होइत अछि — ई चन्द्रमाक नक्षत्र आ पादक सटीक गणनाक अनुमति दैत अछि। हमर कुंडली उपकरण ई स्वतः गणना करैत अछि।
चित्रा नक्षत्रक अधिष्ठाता देवता त्वष्टा छथि, जे दिव्य वास्तुकार आ ब्रह्मांडीय शिल्पकार छथि। वैदिक परम्परामे, ओ दिव्य शिल्पी छथि जे ब्रह्मांडक रचना केलनि, रूपसभक निर्माण केलनि, इंद्रक शक्तिशाली वज्र जकाँ शस्त्रसभ आ देवतासभक लेल रथसभ सेहो बनौलनि। ओ सृजन, कौशल, आ कच्चा पदार्थकेँ सुन्दर तथा सटीक आकार देबाक क्षमताकेँ मूर्त रूप दैत छथि। त्वष्टा परम मूर्तिकार छथि, जे दिव्य सरलता आ प्रकटीकरणक सूक्ष्म कलाकेँ प्रतिनिधित्व करैत छथि।
हीरा, चित्राक प्रतीक, चमक, मूल्यवानता आ भ्रमकेँ काइट सत्यकेँ उजागर करबाक क्षमताकेँ प्रतिनिधित्व करैत अछि। ई स्वाभाविक सुन्दरता, परिष्कार आ दबावक परिवर्तनकारी शक्ति द्योतित करैत अछि। एहि नक्षत्रक जातकमे प्रायः एकटा चमकीला व्यक्तित्व, सौन्दर्यक प्रति तीव्र दृष्टि आ उत्कृष्ट रचनासभकेँ उत्पन्न करबाक क्षमता होइत छन्हि, जेना एकटा हीराकेँ खुरदुरा पाथरसँ चमकाओल जाइत अछि।
चित्रा नक्षत्रमे जन्मल बच्चासभक नाम प्रायः सौन्दर्य, कलात्मकता, चमक, आ सृजनक विषयसभकेँ प्रतिबिम्बित करैत अछि, जे दिव्य वास्तुकारक रूपमे त्वष्टाक भूमिकाकेँ सम्मानित करैत अछि। प्रकाश, बहुमूल्य रत्न, शिल्प कौशल, आकर्षण, आ आंतरिक शक्तिसँ संबंधित अर्थ विशेष रूपसँ शुभ मानल जाइत अछि, जे नक्षत्रक दीप्तिमान आ परिष्कृत सारसँ मेल खाबैत अछि।
चित्रा नक्षत्रक नामकरण परम्परामे प्रायः 'पे' (Pe), 'पो' (Po), 'रा' (Ra), वा 'री' (Ri) अक्षर सँ शुरू होबयवला नामसभकेँ प्राथमिकता देल जाइत अछि। नामसभ आदर्श रूपसँ नक्षत्रक सौन्दर्य, सटीकता, आ कलात्मक अभिव्यक्ति पर जोरकेँ प्रतिबिम्बित करबाक चाही। यद्यपि एकर 'मृदु, कोमल' प्रकृति मधुर ध्वनिसभक सुझाव दैत अछि, मंगलक आधिपत्य गतिशील ऊर्जा आ आंतरिक शक्ति व्यक्त करयवला नामसभकेँ सेहो समायोजित कऽ सकैत अछि, विशेष रूपसँ बादक चरणसभ (पदासभ) मे जन्मल लोकसभक लेल।