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नौ खगोलीय पिण्ड जे वैदिक ज्योतिषक आधार बनबैत अछि
ज्योतिष शास्त्रमे "ग्रह" शब्दक अर्थ "ग्रहण करनाइ" अछि – अर्थात् जे मानव चेतनाकेँ पकड़ि लैत अछि। नौ ग्रह ब्रह्माण्डीय शक्ति छथि जे मानव जीवनकेँ प्रभावित करैत अछि।
प्रत्येक ग्रह विशिष्ट वार, नक्षत्र आओर दशा पर शासन करैत अछि। सूर्य रविवार, चन्द्र सोमवार, मंगल मंगलवार, बुध बुधवार, बृहस्पति गुरुवार, शुक्र शुक्रवार आओर शनि शनिवार पर राज्य करैत अछि।
ग्रह ≠ ग्रह। ग्रह = "जो पकड़ता है" (√ग्रह् = ग्रहण करना)
7 भौतिक पिण्ड + 2 गणितीय छाया बिन्दु = 9 ग्रह
ग्रहक नैसर्गिक शुभ वा पाप वर्गीकरण ज्योतिषक मूलभूत सिद्धान्त अछि। शुभ ग्रह सकारात्मक फल दैत अछि, जखन कि पाप ग्रह चुनौती उत्पन्न करैत अछि।
♃ बृहस्पति – सर्वोत्तम शुभ (गुरु)
♀ शुक्र – सौन्दर्य और प्रेम का शुभ ग्रह
☽ चन्द्र – शुक्ल पक्ष में शुभ
☿ बुध – अपीड़ित होने पर शुभ
☉ सूर्य – पृथक करने वाला, दाहक प्रभाव
♂ मंगल – आक्रामक, संघर्षशील
♄ शनि – प्रतिबन्धक, विलम्ब, कर्म
☊ राहु – आसक्तिकर, मायावी, प्रवर्धक
☋ केतु – विरक्तिकर, कार्मिक, आध्यात्मिक
☽ चन्द्र – कृष्ण पक्ष में पाप
चन्द्र शुक्ल पक्षमे शुभ आओर कृष्ण पक्षमे पाप होइत अछि। बुध अकेला वा शुभ ग्रहक संग शुभ, पाप ग्रहक युतिमे पाप बनि जाइत अछि।
नैसर्गिक मैत्री प्रणाली ग्रहक सम्बन्धकेँ मित्र, सम आओर शत्रुमे वर्गीकृत करैत अछि। मित्रक राशिमे ग्रह शुभ फल दैत अछि। शत्रुक राशिमे ग्रह कठिनाई अनुभव करैत अछि।
| ग्रह | मित्र | सम | शत्रु |
|---|---|---|---|
| Sun / सूर्य | Moon, Mars, Jupiter | Mercury | Venus, Saturn |
| Moon / चन्द्र | Sun, Mercury | Mars, Jupiter, Venus, Saturn | None |
| Mars / मंगल | Sun, Moon, Jupiter | Venus, Saturn | Mercury |
| Mercury / बुध | Sun, Venus | Mars, Jupiter, Saturn | Moon |
| Jupiter / बृहस्पति | Sun, Moon, Mars | Saturn | Mercury, Venus |
| Venus / शुक्र | Mercury, Saturn | Mars, Jupiter | Sun, Moon |
| Saturn / शनि | Mercury, Venus | Jupiter | Sun, Moon, Mars |
पंचधा मैत्री = नैसर्गिक + तात्कालिक संयुक्त:
मित्र + मित्र = अधिमित्र | शत्रु + शत्रु = अधिशत्रु
ग्रहक बल कोन राशिमे अछि तकरा पर निर्भर करैत अछि। वैदिक ज्योतिष पाँच स्तर परिभाषित करैत अछि: उच्च, मूलत्रिकोण, स्वक्षेत्र, मित्र राशि, आओर नीच।
| ग्रह | उच्च | मूलत्रिकोण | स्वक्षेत्र | नीच |
|---|---|---|---|---|
| Sun | Aries 10° | Leo 0°-20° | Leo | Libra 10° |
| Moon | Taurus 3° | Taurus 4°-20° | Cancer | Scorpio 3° |
| Mars | Capricorn 28° | Aries 0°-12° | Aries, Scorpio | Cancer 28° |
| Mercury | Virgo 15° | Virgo 16°-20° | Gemini, Virgo | Pisces 15° |
| Jupiter | Cancer 5° | Sagittarius 0°-10° | Sagittarius, Pisces | Capricorn 5° |
| Venus | Pisces 27° | Libra 0°-5° | Taurus, Libra | Virgo 27° |
| Saturn | Libra 20° | Aquarius 0°-20° | Capricorn, Aquarius | Aries 20° |
बल क्रम: उच्च > मूलत्रिकोण > स्वक्षेत्र > मित्र > सम > शत्रु > नीच
नोट: राहु और केतु की गरिमा विवादित है; सूचीबद्ध राशियाँ पाराशरी परम्परा से हैं
ग्रह सूर्यक अत्यन्त निकट अबैत अछि तँ "अस्त" भ जाइत अछि – सूर्यक प्रखरताक कारण अपन फल दैबाक शक्ति खोइ दैत अछि।
राहु और केतु छाया बिन्दु हैं और अस्त नहीं हो सकते। कुछ ग्रन्थ स्वराशि में स्थित ग्रह को पूर्ण अस्त प्रभाव से मुक्त मानते हैं।
वक्री गति तखन होइत अछि जखन पृथ्वी सँ देखबामे ग्रह राशिचक्रमे पाछाँ चलैत देखाइत अछि। ज्योतिषमे वक्री ग्रह बलवान मानल जाइत अछि।
Mars, Mercury, Jupiter, Venus, Saturn
Sun, Moon
Rahu, Ketu (मध्यम गति)
नीच राशिक वक्री ग्रह किछु शास्त्रकारक अनुसार उच्च ग्रह समान मानल जाइत अछि – एकरा नीच भंग कहैत छथि।
वैदिक ज्योतिषमे प्रत्येक ग्रह अपन सातम भाव पर पूर्ण दृष्टि दैत अछि। मंगल, बृहस्पति आओर शनिक विशेष दृष्टि अछि।
सार्वभौमिक नियम: सभी ग्रह अपने 7वें भाव पर पूर्ण दृष्टि (100%) डालते हैं
मंगल अपने स्थान से 4थे (सम्पत्ति), 7वें (जीवनसाथी) और 8वें (आयु, गूढ़ विषय) भाव पर दृष्टि डालता है।
बृहस्पति 5वें (सन्तान, बुद्धि), 7वें (विवाह) और 9वें (धर्म, भाग्य) भाव पर दृष्टि डालता है। बृहस्पति की दृष्टि अत्यन्त शुभ मानी जाती है।
शनि 3रे (साहस), 7वें (साझेदारी) और 10वें (व्यवसाय, अधिकार) भाव पर दृष्टि डालता है। शनि की दृष्टि अनुशासन, विलम्ब और शिक्षा लाती है।
राहु बृहस्पति जैसी दृष्टि (5, 7, 9) डालता है किन्तु आसक्ति और अपारम्परिकता के साथ। कुछ शास्त्रकार राहु की विशेष दृष्टि स्वीकार नहीं करते।
केतु की दृष्टि राहु जैसी (5, 7, 9) होती है किन्तु आध्यात्मिक, वैरागिक और कार्मिक गुण के साथ।
सभ विशेष दृष्टि समान बल नहि रखैत अछि। शास्त्रीय ग्रन्थ आंशिक दृष्टि मान प्रदान करैत अछि।
| ग्रह | 3rd | 4th | 5th | 7th | 8th | 9th | 10th |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| All Planets | 25% | 75% | 50% | 100% | 25% | 50% | 25% |
| Mars / मंगल | 25% | 100% | 50% | 100% | 100% | 50% | 25% |
| Jupiter / बृहस्पति | 25% | 75% | 100% | 100% | 25% | 100% | 25% |
| Saturn / शनि | 100% | 75% | 50% | 100% | 25% | 50% | 100% |
नौ ग्रह सँ आगू, वैदिक ज्योतिष पाँच गणितीय बिन्दुकेँ मान्यता दैत अछि जेकरा उपग्रह कहैत छथि।
Smoke, pollution, confusion, inauspiciousness. Dhuma in a house creates haze and unclear outcomes. Associated with obstacles from hidden enemies and confusion in decisions.
Calamity, extreme misfortune. Vyatipata is considered one of the most inauspicious Upagrahas. Its placement shows where sudden reversals and unexpected disasters may occur. Particularly feared in muhurta calculations.
Halo, encirclement, boundary. Parivesha can indicate being surrounded by obstacles or protective boundaries. It sometimes shows a sense of entrapment but also divine protection through circles of grace.
Rainbow, Indra's bow. Associated with sudden fortune or disaster depending on dignity. Can indicate government favor or punishment, dramatic turns of fate, and encounters with authority. Named after Indra, king of the Devas.
Sub-Ketu, secondary shadow. Functions like a minor Ketu – bringing detachment, spiritual inclination, and sudden events. Upaketu in a house can indicate unexpected losses but also sudden spiritual insights. Its effects are more subtle than Ketu but in a similar vein.
कारकत्वक अर्थ अछि – जीवनक ओ क्षेत्र जाहिपर प्रत्येक ग्रह स्वाभाविक रूप सँ शासन करैत अछि। बृहस्पति सदा सन्तान आओर ज्ञानक कारक छथि।
आत्मकारक, पिता, राजा, सरकारी अधिकार, अस्थि, हृदय, दायाँ नेत्र, ताम्र, माणिक्य
मन, माता, रानी, जनमत, जल, दूध, मोती, चाँदी, बायाँ नेत्र, सोमवार
साहस, भाई, सेनापति, भूमि, रक्त, शल्य, अग्नि, शस्त्र, पुलिस, मूँगा, मंगलवार
बुद्धि, वाणी, व्यापार, लेखन, गणित, मामा, त्वचा, पन्ना, बुधवार, ज्योतिष
ज्ञान, सन्तान, धर्म, गुरु, धन, भाग्य, यकृत, पुखराज, स्वर्ण, गुरुवार, शास्त्र
पत्नी, प्रेम, सौन्दर्य, कला, संगीत, विलास, वाहन, हीरा, शुक्रवार, सुगन्ध, पुष्प
आयु, कर्म, अनुशासन, सेवक, वृद्धावस्था, दुःख, लोहा, नीलम, शनिवार, तेल
विदेश, बहिष्कृत, माया, आकस्मिक घटनाएँ, दादा, सर्प, गोमेद
मोक्ष, आध्यात्मिक मुक्ति, नाना, संन्यासी, ध्वज, वैडूर्य, अमूर्त ज्ञान
Soul, authority, father, government, health, vitality, gold
Exalted in Aries (10°), Debilitated in Libra (10°)
Mind, emotions, mother, public, liquids, travel, silver
Exalted in Taurus (3°), Debilitated in Scorpio (3°)
Energy, courage, siblings, property, surgery, military, copper
Exalted in Capricorn (28°), Debilitated in Cancer (28°)
Intelligence, speech, trade, writing, mathematics, friends, green
Exalted in Virgo (15°), Debilitated in Pisces (15°)
Wisdom, fortune, children, dharma, guru, expansion, gold
Exalted in Cancer (5°), Debilitated in Capricorn (5°)
Love, beauty, luxury, art, spouse, vehicles, diamonds
Exalted in Pisces (27°), Debilitated in Virgo (27°)
Discipline, karma, longevity, delays, servants, iron, blue sapphire
Exalted in Libra (20°), Debilitated in Aries (20°)
Obsession, foreign, unconventional, sudden gains, illusion, hessonite
Strong in Taurus, Gemini, Virgo, Aquarius
Detachment, moksha, past karma, spiritual insight, cat's eye
Strong in Scorpio, Sagittarius, Pisces
विंशोत्तरी दशा प्रणाली प्रत्येक ग्रहकेँ विशिष्ट अवधि दैत अछि। कुल चक्र 120 वर्षक होइत अछि। आरम्भिक दशा जन्म समय चन्द्रक नक्षत्र सँ निर्धारित होइत अछि।
कुल: 7+20+6+10+7+18+16+19+17 = 120 वर्ष
नवग्रह समस्त ज्योतिष विश्लेषणक आधार छथि। कुण्डलीमे प्रत्येक ग्रह विशिष्ट राशि आओर नक्षत्रमे स्थित होइत अछि।
प्रत्येक नक्षत्र एक विशिष्ट ग्रह द्वारा शासित
ग्रह भावों और राशियों में कैसे स्थित होते हैं
वे भाव जिनमें ग्रह स्थित होते हैं और प्रभावित करते हैं
ग्रह काल जीवन में कैसे प्रकट होते हैं
ग्रहों द्वारा बनने वाले विशेष संयोग
आपकी चन्द्र राशि पर शनि का गोचर